Vegetable Farming : कृषि की दुनिया में नित नए प्रयोग हो रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक तरह-तरह की फल सब्जियों के किस्में इजाद कर रहे हैं। जो ना सिर्फ किसानों के लिए लाभदायक हैं बल्कि देखने वालों के लिए अजूबे से कम नही है। उत्तर प्रदेश के एक कृषि वैज्ञानिक ने लौकी की किस्मों के साथ नए-नए प्रयोग कर देखने वालों को अचंभे में डाल दिया है। उनकी लौकी की खासियत देखकर उनका नाम ही “लौकी मैन” पड़ गया है।
“नरेंद्र शिवानी” नाम की लौकी की किस्म तैयार की
“भारत के लौकी मैन” प्रोफेसर शिव पूजन सिंह को ” लौकी मैन” के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने “नरेंद्र शिवानी” किस्म की लौकी विकसित की है, जो अपने असाधारण आकार और लंबाई के लिए जानी जाती है। वे उत्तर प्रदेश के अयोध्या के कुमारगंज में नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक और बागवानी विशेषज्ञ हैं।
उत्तर प्रदेश देश भर में लौकी का सबसे बड़ा उत्पादक
लौकी के साथ प्रोफेसर सिंह के काम ने उन्हें भारतीय कृषि में एक उल्लेखनीय व्यक्ति बना दिया है, खासकर उत्तर प्रदेश में, जो देश में लौकी का सबसे बड़ा उत्पादक है। उनकी “नरेंद्र शिवानी” किस्म ने अपने प्रभावशाली आकार के कारण लोगों का ध्यान भी आकर्षित किया है, जिसमें कुछ नमूने 8 फीट लंबाई तक पहुंचते हैं।
8 फीट की लौकी
लौकी की खेती के प्रति उनका जुनून बचपन से ही है, क्योंकि वे आजमगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार में पले-बढ़े थे। उन्होंने कृषि में अपनी शिक्षा प्राप्त की और अंततः लौकी पर ध्यान केंद्रित करते हुए पौधों के प्रजनन में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने अपना एक लौकी म्यूजियम भी बना रखा है।
लौकी से बनाते हैं वाद्य यंत्र और शोपीस
प्रोफेसर सिंह ने लौकी की एक विशेष किस्म विकसित की है, जिसे “नरेंद्र शिवानी” नाम दिया गया है। यह लौकी 8 फीट तक लंबी हो सकती है और इसे संगीत वाद्ययंत्र के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, प्रोफेसर सिंह ने अपनी इस उपलब्धि से न केवल खेती में क्रांति ला दी है, बल्कि वैश्विक पहचान भी हासिल की है। लौकी से बने शंख की ध्वनि तो बहुत ही अदभुत है। इसे दिखाने के दौरान उन्होंने शंख बजाया तो लगा जैसे मंदिर का शंख बज रहा हो।
उनके लौकी से बने शो पीस देखने लायक होते है। कोई भी इनके द्वारा विकसित की गई लौकी की प्रजातियों को लगा सकता है और खेती को और लाभदायक बना सकता है। इनसे संपर्क कर आप भी सीड मंगा सकते हैं।