Uttarakhand Damask Rose : भारत के उत्तराखंड के पहाड़ो में मिलने वाले गुलाब की कीमत इतनी है कि आप इससे जमीन भी खरीद सकते हैं। उत्तराखंड में खिलने वाले गुलाब की खुशबू न सिर्फ भारत में फैली है बल्की कनाडा और ऑस्ट्रेलिया तक भी इसकी खुशबू पहुंच रही है। आपको बता दें कि इस कीमती गुलाब का नाम दमस्क रोज है । जो एक बेहद कीमती प्रजाति का उगने वाला गुलाब है। जिससे बनने वाला एसेंशियल ऑयल कितना कीमती होता है कि आप इसका अंदाजा भी नही लगा सकते हैं । इसकी एक लीटर तेल की कीमत से आप एक घर खरीद सकते हैं। इस तेल की कीमत 13 लाख रुपए प्रति लीटर है। इस गुलाब के तेल का उपयोग परफ्यूम और कॉस्मेटिक में किया जाता है । आइये जानते कुछ दिलचस्प बातें इस कीमती गुलाब के बारे में।
उत्तराखंड मे होती है दमस्क गुलाब की खेती:
यूं तो गुलाब की खेती पूरे भारतवर्ष में होती है । लेकिन भारत के उत्तराखंड प्रदेश के चमोली , टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल ,बागेश्वर जैसी 29 जगह में इस गुलाब की खेती की जाती है। जो एक बेहद कीमती गुलाब माना जाता है। दमस्क गुलाब के फूल से बनने वाला तेल बेहद कीमती होता है। इसके तेल की कीमत सामान्य गुलाब के फूल से हटकर 12 से 13 लाख रुपए प्रति लीटर होती है। इन गुलाबों का प्रयोग इत्र और खुशबूदार तेल बनाने में किया जाता है। इससे बने तेल का प्रयोग कॉस्मेटिक,साबुन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में किया जाता है। वैसे तो दमस्क गुलाब के फूल का मूल स्थान सीरिया है। लेकिन अब इसकी खेती भारत के भी कई इलाकों में की जाने लगी है । उत्तराखंड के कई किसान इसकी खेती करने का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं । इसके द्वारा बनाए गए तेल का प्रयोग इत्र और परफ्यूम के अलावा पान मसाले में, तेल और रोज वॉटर के तौर पर कई अन्य उत्पादों में किया जाता है ।
दमस्क रोज से बने तेल की कीमत 12 से 13 लाख प्रति लीटर:
सेंटर ऑफ एरोमेटिक प्लांट के निदेशक डॉक्टर नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि इस गुलाब की खेती को अरोमा टूरिज्म से जोड़ा जा रहा है । जिससे इस खेती को बढ़ावा मिलेगा। साल 2021 में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत पहाड़ी जिलों के 1600 से ज्यादा किसान इस गुलाब की खेती से जुडे हैं । इस गुलाब की खेती से उत्पन्न हुए तेल की कीमत 12 से 13 लाख रुपए प्रति लीटर है। इसका इस्तेमाल परफ्यूम ,फ्लेवर और कॉस्मेटिक से जुड़े हुए उत्पादन में किया जाता है। पहले इसकी खेती की शुरुआत बाउंड्री फसल के रूप में की जाती थी। जिसकी वजह से जंगली जानवर अन्य खेती की फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। बाद में इस खेती को धीरे-धीरे व्यावसायिक तौर पर किया जाने लगा। पहले इस गुलाब की खेती 100 हेक्टेयर पर की जा रही थी। जो कि अब 2024 से 25 में बढ़कर 150 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। प्रतिवर्ष लगभग 700 क्विंटल गुलाब का उत्पादन किया जाता है। इस गुलाब से बने हुए उत्पाद को विदेशों में भेजने पर भी काम चल रहा है। इस गुलाब की व्यावसायिक खेती के तौर पर कई किसानों को रोजगार मिल रहा है।
1 लीटर तेल मे 3.5 टन गुलाब का इस्तेमाल होता है:
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस गुलाब की खेती के लिए ठंडी जलवायु का होना आवश्यक है। जो कि उत्तराखंड और उसके आसपास के इलाकों में प्राप्त होती है। इसलिए उत्तराखंड में इसकी खेती की अच्छी संभावनाएं है। भारत के कई बड़े शहरों दिल्ली ,मुंबई के अलावा भारत के बाहर कनाडा, ऑस्ट्रेलिया तक की कई कंपनियां उत्तराखंड के इलाकों से दमस्क रोज से बना रोज एसेंशियल ऑयल और रोज वॉटर आयात करवाती है । इस गुलाब का औषधीय गुण होने के कारण इसका प्रयोग इत्र, गुलाब जल और एसेंशियल ऑयल को बनाने में किया जाता है। 1 किलो तेल निकालने के लिए लगभग 3.5 टन दमस्क रोज की प्रोसेसिंग करनी पड़ती है । इसलिए इस गुलाब का तेल काफी महंगा मिलता है। इस प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाला रोज वॉटर अन्य रोज वॉटर के मुकाबले काफी तेज होता है । इसके इत्र और परफ्यूम को तैयार करने के लिए इसकी कुछ बूंद ही काफी होती है।
मुगलकाल से हो रही है इसकी खेती:
दमस्क गुलाब की खेती की शुरुआत भारतवर्ष से पहले सीरिया की राजधानी में हुई थी । मुगलकालीन समय से ही इस गुलाब की खेती की शुरुआत तुर्की और ईरान में की जाने लगी थी। इसके साथ ही मुगल काल के समय से ही उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में किसानों द्वारा इसे उगाया जाने लगा था। क्योंकि मुगलकालीन रानियों को स्नान करने के लिए और लगाने के लिए एक खास तरह के गुलाब के इत्र की जरूरत होती थी। उन्होंने बताया कि शाही श्रृंगार के लिए इस्तेमाल में आने वाला एक विशेष प्रकार का गुलाब का तेल दमस्क रोज से बनाया जाता था। शाही श्रृंगार के लिए इस्तेमाल होने वाले इस गुलाब के तेल की कीमत आज के समय में 12 से 13 लाख रुपए प्रति लीटर है।
बबीता आर्या