US Market Crash : डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद पूरी दुनिया में आर्थिक और बाजार के स्तर पर उथल-पुथल मची हुई है। कनाडा और मैक्सिको से लेकर यूरोप की बड़ी आर्थिक शक्तियों और एशिया में चीन और भारत जैसे देशों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में पूरे विश्व से जवाबी प्रतिक्रिया और कारवाई भी देखने को मिल रही हैं, जिसके कारण अमेरिका के आर्थिक हालात और वहां के शेयर बाजार में भी खासा प्रभाव दिखने लगा है। यही वजह है कि अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट ने दुनिया भर के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार के ऐलान के बाद अमेरिका में मंदी की आशंकाएं तेज हो गयी हैं। सोमवार को अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भारी गिरावट देखने को मिली। बिकवाली (selling pressure) में पिछ्ले हफ्ते आई तेजी का प्रभाव अभी तक देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही रिसेशन की बात से इंकार किया है। लेकिन ट्रंप की अनर्गल नीतियों की वजह से अमेरिका समेत ग्लोबल इकॉनमी पर संकट के बादल छा गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए अब निवेशकों की नजर भारतीय बाजार और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा अमेरिका नही है मंदी की चपेट में :
सोमवार को अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में आई भारी गिरावट को देखते हुए दुनिया भर के शेयर इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ गई। अमेरिका की आर्थिक सुस्ती और शेयर बाजार में भारी गिरावट ने वैश्विक निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान देकर “अमेरिका मंदी की चपेट में नहीं आने वाला है”, मुश्किल में पड़ते आर्थिक हालात को संभालने की कोशिश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार विश्व स्तर की बड़ी कंपनियां सिस्को, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट में काम कर रहे कई कर्मचारियों की छंटनी एक साल अन्दर ही कर दी गई है। यह दुनिया के लिए एक चिंता का विषय है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आने वाली मंदी की आशंका से इनकार किया है।
सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली जिसमें डाउजोंस में 900 अंकों की गिरावट देखने को मिली। वहीं दूसरी तरफ नैस्डेक कंपोजिट में 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। एसएंडपी के शेयर 2.7 फ़ीसदी की गिरावट पर बंद हुए। जिसकी वजह से शेयर बाजार के निवेशकों में घबराहट और चिंता बढ़ गई। इन सभी आंकड़ों को देखते हुए अमेरिका में मंदी के आशंकाएं तेज होने लगी हैं। जानकारों का कहना है कि अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी ने, बढ़ती हुई महंगाई और रिसेशन के मद्देनजर शेयर बाजार के सेंटीमेंट को भी प्रभावित किया है। अमेरिकी शेयर बाजार में निवेशको के 4 ट्रिलियन डॉलर यानी की भारत की कुल जीडीपी से ज्यादा डूब चुके हैं ।
ट्रंप की टैरिफ नीति का असर दुनिया भर में :
विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में भारी गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों की चिंता है जो ट्रंप के टैरिफ पॉलिसी और मंदी की संभावना को लेकर बढ़ रही है। खास बात यह है कि अमेरिकी शेयर बाजारों में यह गिरावट 2 साल में सबसे बड़ी गिरावट है। बड़े शेयरों के बात की जाए तो दुनिया के सबसे धनी उद्योगपति एलन मस्क की इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी टेस्ला का शेयर 15.43 % की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 3.34 % और अमेजॉन के शेयर 2.36 %, डेल्टा एयरलाइन के शेयर 5.54 % गिरावट पर बंद हुए। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है।
US Market Crash का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी
भारतीय शेयर बाजार भी इस गिरावट से अछूता नहीं है। अमेरिकी शेयर बाजार में मची उथल-पुथल का असर भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिल रहा है। सोमवार को निफ्टी गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुआ। BSE सेंसेक्स 217 अंकों की गिरावट के साथ 74,115 पर बंद हुआ । NSE निफ्टी में भी गिरावट देखने को मिली थी। निफ्टी 50 भी 92.20 अंक गिरकर 22,460 पर बंद हुआ ।
अगर टैरिफ वार की ये लड़ाई लंबी चली तो इसका प्रभाव विश्व के तमाम देशों की आर्थिक नीतियों पर पड़ने के कारण न सिर्फ शेयर बाजार बल्कि एशिया और अफ्रीका के विकासशील और गरीब देशों के नागरिकों पर भी पड़ेगा। आर्थिक तरक्की के जो प्रयास पूरे विश्व के लिए, विश्व की अनेक संस्थाएं सामूहिक उत्तरदायित्व के तौर पर करती आ रही थीं और जिनका नेतृत्व बहुत हद तक अमेरिका के जिम्मे था वह अब छिन्न भिन्न होता नजर आ रहा है।
बबीता आर्या