IndusInd Bank Share: शेयर बाजार से निवेशकों के लिए अच्छी खबर आजकल कम ही आ रही है। शेयर बाजार में मंदी का दौर चल रहा है। लेकिन आज शेयर बाजार में एक शेयर की चर्चा हर किसी की जुबान पर थी। शेयर बाजार आज IndusInd Bank Share की महा गिरावट से कपंकपाता रहा। एक ही दिन में 243 अंक यानी 27% की गिरावट से निवेशकों के माथे पर पसीने छूटने लगे।
एक साल में आधा हुआ शेयर का भाव
अगर इस गिरावट की पड़ताल करें और आंकड़ों की बात करें तो एक साल पहले यानी 11 मार्च 2024 को इस शेयर का भाव 1536 रूपये था। जो एक साल बाद यानी 11 मार्च 2025 को गिरकर आधे से भी ज्यादा यानी 880 रुपए गिरकर 656 प्रति शेयर के भाव पर पहुंच गया है। इंडसइंड बैंक का शेयर बैंकिंग शेयरों में एक अच्छा शेयर माना जाता था और निवेशकों को अच्छा रिटर्न भी दे रहा था। लेकिन इस शेयर के इस कदर टूट जाने से निवेशकों का इस शेयर से भरोसा ही हिल गया है। एक ही दिन में इस शेयर का 18000 करोड़ रुपए से ज्यादा का मार्केट कैप साफ हो चुका है।
IndusInd Bank Share 4 साल की सबसे बड़ी गिरावट
यह इसके शेयरों में 4 साल की सबसे बड़ी गिरावट है।
इंडसइंड बैंक के शेयर (IndusInd Bank Share) में क्यों मचा हाहाकार ?
अगर शेयर के लगातार गिरने के कारण की चर्चा करें तो इसके कई कारण है। सबसे बड़ा कारण डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में बड़ा नुकसान है। डेरिवेटिव्स को लेकर कंपनी ने अब जो खुलासा किया है उससे इन्वेस्टर्स सकते में आ गए हैं। कंपनी ने कहा है कि डेरिवेटिव में कम से कम 1500 करोड़ का स्वैप लॉस आएगा और नेटवर्थ पर करीब 2.35 % तक का असर आ सकता है।
इस खुलासे के बाद अब बाहरी एजेंसी से हो सकती है जांच !
इंडसइंड बैंक में जिस तरह से डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में बड़े नुकसान की बात सामने आई है उससे अब कंपनी की बाहरी एजेंसी से भी जांच होने की संभावना बन गई है। Q 4 के अंत में डेरिवेटिव लॉस पर रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
येन डॉलर स्वैप के MTM नुकसान को छुपाया
कंपनी को येन डॉलर स्वैप के कारण MTM यानी मार्केट टू मार्केट नुकसान हुआ है। आरबीआई के 2023 के सर्कुलर के बाद यह बात संज्ञान में आई थी । सितंबर 2024 से कंपनी ने इस मामले की अपने स्तर पर छानबीन शुरू की जिसके बाद यह सामने आया कि कंपनी को 1500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। MTM लॉस दर्ज न हो पाने के कारण मुनाफा और मार्जिन पर भी असर हो सकता है। इन्हीं सब मामलों के बीच कंपनी के CFO ने भी इस्तीफा दे दिया था। जिससे निवेशक कुछ समय के लिए हतप्रभ हुए थे। उसके बाद आरबीआई ने इंटरवीन करते हुए एमडी और सीईओ का कार्यकाल केवल एक साल के लिए ही बढ़ाया था, जबकि बोर्ड की मंजूरी 3 साल के लिए दी गई थी ।
MFI में खराब लोन
इतना ही नहीं कंपनी के माइक्रोफाइनेंस बुक में खराब लोन की संख्या भी बढ़ गई है। यानी एनपीए की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
रिटर्न में हुआ तगड़ा नुकसान
अगर शेयर की गिरावट की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में ही यह शेयर 29 % गिर चुका है। एक महीने में यह शेयर 33 % गिरा है और 3 महीने में इसमें 28 % की गिरावट दर्ज की गई है। बात करें एक साल की तो एक साल में इस शेयर में 54% की गिरावट आई है। पिछले वर्ष ही प्रमोटर को शेयर में अपना हिस्सा 26 प्रतिशत तक ले जाना था लेकिन स्टेक बढ़ाने के लिए आरबीआई की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। कंपनी के CFO गोविंद जैन ने 19 जनवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया था इससे लगने लगा था कि कहीं कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस वर्ष जनवरी के अंत में माइक्रोफाइनेंस कारोबार में भी घाटा दिखाया गया। जहां एनपीए की संख्या काफी बढ़ गई है। Q4 FY 24 में ग्रॉस एनपीए 4.69 प्रतिशत था जो Q3 FY 25 में बढ़कर 7.47 % हो चुका है। सबसे बड़ी बात MTM लॉस छुपाने की वजह से कंपनी की साख पर भी सवाल उठने लगे थे।
IndusInd Bank Share निवेशकों की बढ़ी चिंता
इंडसइंड बैंक का 16 % हिस्सा प्रमोटर्स के पास है जबकि लगभग 83% हिस्सा पब्लिक के पास है। अगर पब्लिक के हिस्से की बात की जाए तो इसमें म्युचुअल फंड के पास 30% की होल्डिंग है। FPI के पास 23% की होल्डिंग और एलआईसी के पास लगभग 5.3 प्रतिशत होल्डिंग है। IndusInd Bank में रिटेल का हिस्सा भी लगातार बढ़ रहा था।
जानकारो के मुताबिक IndusInd Bank Share में, वित्तीय कुप्रबंधन के कारण आई गिरावट को ठीक करने में लंबा समय लग सकता है। लेकिन इस मुद्दे ने बैंक की साख को लेकर विशेष चिंता पैदा कर दी है। किसी भी निवेश को लेकर भरोसा सबसे बड़ी बात होती है। वर्तमान हालात को देखते हुए लगता है की इंडसइंड बैंक के वित्तीय हालात के सुधार में लंबा समय लग सकता है।
Disclaimer : शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।