TATA Group Big Deal : भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में टाटा की एक बड़ी डील से इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में चीन की मोनोपोली खत्म करने में मदद मिलेगी। जिससे भारत पूरी दुनिया में एआई चिपसेट सप्लाई करने के मामले में अपनी बड़ी भूमिका निभा सकता है। आइए जानते हैं टाटा समूह के इस मेगा इन्वेस्टमेंट प्लान के बारे में।
चीन को दुनिया में सेमीकंडक्टर बनाने का हब माना जाता है। अब चीन के इस एकाधिकार को चुनौती देने के लिए टाटा समूह ने चिपसेट प्लांट लगाने के लिए मेगा इन्वेस्टमेंट प्लान तैयार कर लिया है। सेमीकंडक्टर बनाने के मामले में चीन का दुनियाभर में वर्चस्व है। सेमीकंडक्टर का उपयोग कार, मोबाइल समेत हर इलेक्ट्रॉनिक सामान में किया जाता है। इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को आगे तक ले जाने के लिए टाटा ने पूर्वोत्तर राज्य असम में सेमीकंडक्टर प्लांट को लगाने के लिए असम सरकार के साथ 60 साल के लिए एक लीज एग्रीमेंट साइन किया है। सेमीकंडक्टर प्लांट असम के मोरीगांव जिले में लगाया जाएगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए टाटा समहू ने 27,000 करोड़ रुपये निवेश करने का एलान किया है।
पूर्वोत्तर राज्य असम में लगेगा प्लांट
असम के मोरीगांव में हिंदुस्तान पेपर कारपोरेशन साइट पर सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए टाटा समूह की ओर से 27, 000 करोड़ की बड़ी रकम निवेश की जाएगी। प्लांट का पहला फेज 2025 के मध्य तक शुरू हो जाएगा। इस मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट के शुरू होने से 30 हजार लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद है।
पूरी दुनिया की जरूरत पूरा करेगा भारत
टाटा समूह के अनुसार इस प्लांट में उत्पादन शुरू होने पर पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेमीकंडक्टर की आपूर्ति में बड़ा बदलाव आयेगा, जिससे भारत को बड़ा लाभ मिल सकेगा। टाटा की इस पहल से इंडस्ट्री और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। इस प्लांट में टाटा की ओर से वायर बॉन्डिंग (एकीकृत सर्किट), फ्लिप चिप और इंटीग्रेटेड सिस्टम पैकेजिंग (ISP) टेक्नोलॉजी पर काम किया जाएगा।
क्या होता है सेमीकंडक्टर चिप
आमतौर पर सेमीकंडक्टर चिप सिलकॉन, जर्मेनियम और गैलियम आर्सेनाइड से बनती है। आसान भाषा में इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि सेमीकंडक्टर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को कार्य करने के लिए कमांड देता है यानी यह ब्रेन की तरह काम करता है। सेमीकंडक्टर चिप की वजह से ही इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में ऑटोमिटिक निर्देशों को पूरा किया जाता है। मान लीजिए, आपने रिमोट से अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एअरकंडीशनर, टीवी, वाशिंग मशीन या ऑडियो सिस्टम को कोई कमांड दिया, तो वह डिवाइस उसी निर्देश के अनुसार अपना काम करेगा। सेमीकंडक्टर चिप ही इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को कंट्रोल करती है। बदलते वक्त के साथ सेमीकंडक्टर के काम करने में भी काफी बदलाव आया है। कंप्यूटर्स से लेकर मोबाइल फ़ोन और ऑटोमेटिक कार के अलावा बहुत हदतक सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल होता है।
टाटा की इस पहल से क्या हैं फायदे
सेमीकंडक्टर चिप बनाने के लिए भारत सरकार की पहल पर टाटा ने सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली प्लांट लगाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। टाटा समूह के द्वारा सेमीकंडक्टर चिप के उत्पादन शुरू करने से न सिर्फ भारतीय कंपनियो को इसका लाभ मिलेगा, बल्कि दुनियाभर में अन्य देशों की कंपनियों की निर्भरता भी चीन पर ही नही रहेगी। सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन में प्रतिस्पर्धा का लाभ दुनियाभर के यूजर्स को मिलेगा।
भारत को मिलेगा लाभ और पहचान
भारत में सेमीकंडक्टर चिप के उत्पादन से भारतीय यूजर्स को सस्ते दाम पर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट मिलने लगेंगे। भारत में रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। सेमीकंडक्टर के निर्यात से भारत विदेशी मुद्रा की कमाई कर सकेगा, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को विकास में मदद मिलेगी।
सेमीकंडक्टर को लेकर भारत की निर्भरता अन्य देशों पर कम होने से विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। इस प्रोजेक्ट से इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल मैुन्युफैक्चरिंग में भारत को विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
कम होगी चीन की मोनोपोली
सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन को लेकर चीन पूरी दुनिया में अपनी धमक बनाए रखना चाहता है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार, वॉशिंग मशीन, एटीएम से लेकर स्पेस साइंस तक सभी तरह की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल होता है। लम्बे समय से चीन दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने के लिए और इस क्षेत्र में वर्चस्व बनाए रखने के लिए चीन उत्पादन को नियंत्रित कर पूरी दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक सामान के प्रोडक्शन को प्रभावित कर सकता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं। चीन की इस हनक को तोड़कर भारत सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी मुकाम हासिल कर न सिर्फ भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा, बल्कि दुनियाभर के यूजर्स को भी सस्ते इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मिलने में सहायक होगा।