Varuthini Ekadashi Kab Hai : वैशाख माह में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। वरुथिनी एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु जी की पूजा के साथ तुलसी माता की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तुलसी पूजा करने से घर में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही घर से दुख और दरिद्रता का नाश होता है। इस दिन जो कोई भी सच्चे मन से श्री हरि विष्णु जी की पूजा और माता तुलसी की पूजा करता है, उसके सभी कष्टों का अंत हो जाता है। आईए जानते हैं एकादशी के व्रत में तुलसी पूजा के क्या नियम है।
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक माह में पड़ने वाले एकादशी तिथि पर श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। वैशाख माह मे कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी तिथि के नाम से जाना जाता है।
Varuthini Ekadashi तिथि भगवान नारायण और तुलसी जी का पूजन करके मनाई जाती है। इस दिन जो भी भक्त पूरे सच्चे मन से भगवान विष्णु तुलसी माता का पूजन करता है,उसके सभी पाप नष्ट होते हैं और माता तुलसी और विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत उपवास करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं । जीवन में आने वाले सभी बाधाएं दूर होती है । यदि किसी व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में किसी तरह की बाधाएं आ रही है,तो उसे वरुथनी एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए।
कब है वरुथिनी एकादशी:
वरुथिनी एकादशी तिथि इस वर्ष 24 अप्रैल 2025 दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का आरंभ 23 अप्रैल 2025 को शाम 4:43 पर होगा। वहीं इसका समापन 24 अप्रैल 2025 की दोपहर 2:32 पर होगा। ऐसे में एकादशी तिथि का व्रत 2025 को उदय तिथि के अनुसार गुरुवार 24 अप्रैल को रखा जाएगा।
शुभ मुहूर्त:
Varuthini Ekadashi शुभ मुहूर्त की बात की जाए तो एकादशी तिथि के शुभ मुहूर्त हैं ।
1) ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:19 से 5:03 तक रहेगा ।
2) अभिजीत मुहूर्त दोपहर की 11:53 से 12:46 तक रहेगा ।
3) विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से शाम 3:23 तक रहेगा।
4) गोधूलि मुहूर्त शाम 6:51 से 7:13 तक रहेगा।
वरुथनी एकादशी तिथि पर तुलसी माता की पूजा विधि:
• यदि आप भी वरुथनी एकादशी तिथि का व्रत रखते हैं तो आपको तुलसी पूजा को लेकर कई विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए । सबसे पहले इस दिन तुलसी माता को जल नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता श्री हरि विष्णु जी के लिए निर्जला व्रत रखती हैं । इसलिए उन्हें इस दिन जल चढ़ाना निषेध है।
• इस दिन श्री हरि विष्णु जी की पूजा के साथ माता तुलसी जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। तुलसी माता के सामने एक रंगोली बनाएं ,इसमें एक दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
• इसके बाद तुलसी माता को पुष्प सिंदूर अक्षत और वस्त्र इत्यादि चढ़ाए । इसके बाद दशाक्षरी मंत्र से तुलसी जी का आवाहन करें और तुलसी चालीसा का पाठ करें ऐसा करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
• इस दिन भगवान विष्णु जी को पीले फूल ,तुलसीदल, चंदन ,धूप और दीपक करना चाहिए।
• इसके साथ ही इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी करना चाहिए। इस दिन भागवत गीता के 11 अध्याय का पाठ करने का विशेष महत्व है।
• इस दिन मधुराष्टक और गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ भी करना शुभ माना जाता है।
Varuthini Ekadashi व्रत के पारण का समय:
एकादशी तिथि के व्रत का पारण के समय की बात की जाए तो पारण का दिन अगले दिन यानी शुक्रवार 25 अप्रैल 2025 की सुबह 5:46 से लेकर सुबह 8:23 तक रहेगा।
बबीता आर्या