पृथ्वी दिवस। ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जिसमें जीव है, जीवन है। जीवन में भी जीवंतता अन्यत्र कहीं नहीं है। यदि जीव और उसके जीवन को बचाना है तो हमें पृथ्वी के क्षरण और उसके अत्यधिक दोहन को रोकना होगा । इसलिये विश्व में पृथ्वी के संरक्षण के लिये पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 1970 में पहली बार मनाया गया। इसके पीछे भी कई कारण थे। पहला कारण पर्यावरण की रक्षा और इसके लिये विशेष शिक्षा का प्रावधान रखा गया ।
सन1969 में केलिफोर्निया के सांता बारबरा में तेल रिसाव के कारण हुई त्रासदी भी इसकी एक वजह थी। उस हादसे में कई लोगों के आहत होने पर अमेरिका के सीनेटर गेलाॅर्ड नेल्सन ने इस समस्या के समाधान के लिये प्रयास किया और अंत में उन्हीं के अथक प्रयास से प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिये पृथ्वी दिवस का प्रारम्भ हुआ। इसका मूल उद्देश्य अपनी धरा को संवारने ,धरती और उससे प्रदत्त सभी संसाधनों की रक्षा, सरंक्षण और संवर्द्धन के लिये सभी धरा वासियों का सहयोग अपेक्षित है।
World Earth Day: Invest In Our Planet
इस तरह पृथ्वी दिवस की नींव पड़ी जिस में हर वर्ष एक खास उद्देश्य को लेकर कार्य किया जाता है । इस वर्ष पृथ्वी दिवस की थीम “इन्वेस्ट इन अवर प्लेनेट” है। इस बार संपूर्ण विश्व के सामने जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती है। मौसम कब बदल जाये नहीं कहा जा सकता। धरती हमारी माता है यह हमारी सनातन संस्कृति में कहा गया और उसके लिये ऋषि मुनि जो कि अपने समय के बहुत बड़े वैज्ञानिक थे वह समय समय पर यज्ञ आदि के द्वारा पृथ्वी के वायुमंडल में फैले प्रदूषण को समाप्त करते रहते थे । वृक्ष कभी काटे नही जाते थे, केवल उनकी सूखी टहनियां ही उपयोग में लाई जाती थी । एक वृक्ष की तुलना दस पुत्रों से की जाती थी। जनमानस यदि अपनी आवश्यकता के लिये वृक्ष काटता भी था तो सूख रहे पुराने वृक्ष के स्थान पर नये वृक्षारोपण किये जाते। नदियों के बहाव को रोका नहीं जाता था वरन वह अपने आप ही अपनी दिशा में प्रवाहित होती। उनके जल को शुद्धि करण के लिये अलग प्रयास किये जाते ।
World Earth Day:
इसे एक महोत्सव के रूप में मना कर एक ओर जहां धरती मां के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं तो वहीं दूसरी ओर उसके संरक्षण और संवर्द्धन के लिये संकल्पित होते हैं। आईये हम सब मिलकर अपनी धरती को बचा कर आने वाली संतति को स्वच्छ एवं स्वस्थ वायुमंडल प्रदान करें। प्रदूषण से पृथ्वी की रक्षा करते हुये पर्यावरण को संरक्षित करें। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब मानव के अपने ही कृत्य इस पृथ्वी के विनाश के कारण बनें । पृथ्वी दिवस एक प्रकार से मातृभूमि की दयालुता के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है, जिसमें सभी का योगदान आवश्यक है । तभी तो हम कह सकेंगे कि :-*जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी*।
उषा सक्सेना