Mukhyamantri Dugdh Uphar Yojana : ओलंपिक में कमाल दिखाने वाले खिलाड़ियों में अधिकतर का नाता हरियाणा से है। देश को कामयाब एथलीट देने के मामले में हरियाणा देश में नंबर वन है। हरियाणा के ज्यादातर खिलाड़ी दूध,घी,मक्खन की खुराक को अपनी तंदुरूस्ती का राज बताते हैं। और जब भी हरियाणा के खाने की बात होती है तो लोग यही कहते हैं हरियाणा यानी दूध दही का खाना। दूध के पोषक तत्वों से कोई इनकार नहीं कर सकता। शायद यही वजह है कि हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना की शुरुआत की थी।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिल रहा मुफ्त दूध
हरियाणा के मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर चिन्हित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए दूध पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इन केंद्रो में साल में 300 दिन गर्भवती महिलाओं और बच्चों को दूध उपलब्ध करवाया जाता है।
सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को मिलेगा दूध
मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना के तहत इसके दायरे को बढ़ाते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 14 से 18 वर्ष के बच्चों को साल में 150 दिन मुफ्त दूध देने का ऐलान किया है।
कैसे ले योजना का लाभ
गर्भवती महिलाओं और 6 महीने से 6 साल तक के चिन्हित बच्चों में विटामिन ए व डी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा साल में 300 दिन स्किम्ड दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है। यह योजना अगस्त 2020 से चल रही है। इस योजना की वजह से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार भी आया है। राज्य में 6 महीने से 6 साल तक के 9 लाख से अधिक बच्चों और लगभग 3 लाख गर्भवती महिलाओं को हफ्ते में 6 दिन अलग-अलग फ्लेवर का दूध उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के परिणाम स्वरुप प्रदेश में पोषण के मामले में सामान्य श्रेणी के बच्चों की संख्या में 3.67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मध्यम रूप से कम वजन वाले बच्चों में 3.66% की कमी दर्ज की गई है ।
घर बैठे ही मिल जाता है दूध
मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर दूध प्रदान करते हैं । दूध देने से पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जरूरी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं उसके बाद लाभार्थी को दूध प्रदान किया जाता है। हरियाणा राज्य की गर्भवती महिलाएं व बच्चे इस योजना का लाभ ले सकते हैं । इस योजना की सफलता को देखते हुए अब सरकारी स्कूलों में भी 14 से 18 साल तक के छात्रों को साल में 150 दिन फोर्टीफाइड दूध उपलब्ध करवाया जाएगा। कुपोषण को दूर करने की दिशा में राज्य सरकार का यह एक सकारात्मक कदम है।