Mahakumbh 2025: आधिकारिक रूप से महाकुंभ शुरू होने में अब कुछ ही दिनों की देरी है और इससे पहले विभिन्न अखाड़ों का संगम नगरी प्रयागराज में आगमन भी शुरू हो चुका है ।
श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े का कुंभ क्षेत्र में प्रवेश
विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम महाकुंभ 2025 प्रयागराज में अखाड़ों के शाही प्रवेश का सिलसिला शनिवार 14 दिसंबर को श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की भव्य पेशवाई से शुरू हुआ। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के हजारों साधु-संतों ने संगम किनारे बसे कुंभनगर में शाही अंदाज में प्रवेश किया। पेशवाई पूरी भव्यता के साथ यमुना किनारे स्थित श्री मौज गिरि आश्रम से शुरू हुई। अगुवाई अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, अंतरराष्ट्रीय संरक्षक स्वामी हरि गिरि जी महाराज, सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरि जी महाराज, प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज आदि संतों ने की। पेशवाई विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए कुंभनगर स्थित जूना अखाड़े की छावनी में समाप्त हुई। इसमें बड़ी संख्या में अखाड़े के महामंडलेश्वर भी अपने-अपने शाही रथ पर विराजमान थे। पेशवाई में सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती भी शामिल थे। इस दौरान नागा साधु-संत अपना-अपना युद्ध कौशल दिखाते चल रहे थे। साधु-संतों की एक झलक पाने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े थे।
नागा साधु संतों ने दिखाया अपना युद्ध कौशल
पेशवाई शुभ मुहूर्त में दोपहर करीब बारह बजे यमुना किनारे स्थित श्री मौज गिरि आश्रम से शुरू हुई। पेशवाई में सबसे आगे देवता सूर्य प्रकाश थे। उनके पीछे घोड़े पर निशान था। फिर भगवान की चरण पादुका एवं पालकी थी। यह यमुना मार्ग, इलाहाबाद डिग्री कालेज, परेड ग्राउंड, त्रिवेणी बांध होते हुए दत्तात्रेय मंदिर पहुंची। वहां से गंगा पर बने पुल को पार करते हुए श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की छावनी में जाकर समाप्त हुई। वहां भगवान दत्तात्रेय की चरण पादुका स्थापित की गयी।
इसके पूर्व श्रीराम मंदिर के पास प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी ने पेशवाई में शामिल साधु-संतों का स्वागत किया। वहीं मेला क्षेत्र में पहुंचने पर तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने सबका स्वागत किया। पेशवाई में नागा साधु-संतों के करतब को देखकर श्रद्धालु अभिभूत थे। मार्ग में सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गयी थी। कहीं से भी अन्य लोगों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था ताकि साधु-संतों को किसी तरह की परेशानी न हो। मार्ग से बिजली के पोल पहले ही स्थानांनतरित कर दिये गये थे। सफाई करवा दी गयी थी।
किन्नर अखाड़े ने भी किया छावनी में प्रवेश
इसी के साथ किन्नर अखाड़े ने भी पेशवाई के साथ अपनी छावनी में प्रवेश किया। किन्नर अखाड़े की अगुवाई अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की। इसमें बड़ी संख्या में किन्नर अखाड़े से जुड़े लोग शामिल थे।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने किया संगम का अभिषेक
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रयागराज के संगम में पूजा-अर्चना कर 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक होने वाले महाकुंभ के सफल आयोजन की कामना की। उन्होंने इस अवसर पर गंगा, यमुना और अंतःसलिला सरस्वती की त्रिवेणी की आरती कर वैश्विक कल्याण का भी संकल्प लिया। तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रों के बीच कार्यक्रम संपन्न कराया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिवेणी में अक्षत, चंदन, रोली, पुष्प और वस्त्र भी अर्पित किए। इससे प्रमुख साधु-संतों का आशीर्वाद भी लिया। इस अवसर पर उनके साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी मौजूद रहे।

Mahakumbh 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निषादराज क्रूज पर सवार होकर संगम नोज पर पहुंचे। किला घाट पर फ्लोटिंग जेटी से होते हुए वे क्रूज पर सवार हुए। क्रूज पर सवार होने के बाद डेक पर खड़े होकर यमुना के शांत जल को निहारा। वह घूम-घूमकर पूरे क्षेत्र का अवलोकन भी करते रहे। संगम नोज पर मुख्यमंत्री योगी और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने एक बार फिर उनका स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने साधु-संतों से मुलाकात की और उनका अभिवादन किया।
वहां से प्रधानमंत्री सीधे संगम नोज पर बने पंडाल में पहुंचे। यहां उपस्थित तीर्थ पुरोहितों ने उन्हें आसन ग्रहण कराया। तीर्थ पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने पूजा-अर्चना की। उन्होंने खड़े होकर त्रिवेणी का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। इसके बाद संगम आरती भी की। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने पूजन-अर्चन के बाद अक्षयवट, बड़े हनुमान जी एवं सरस्वती कूप का दर्शन एवं पूजन किया। साथ ही इनसे जुड़े कोरिडोर का निरीक्षण एवं लोकार्पण किया। इस दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को महाकुंभ से जुड़ी तमाम तैयारियों की जानकारी दी। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए किये जा रहे तमाम उपायों को बताया। अधिकारियों ने स्वच्छता एवं डिजिटल महाकुंभ के विषय में भी उन्हें विस्तार से बताया। एडीजी प्रयागराज भानु भास्कर ने आपात स्थिति में सुरक्षा के उपायों के बारे में जानकारी दी।
भौगोलिक भूखंड ही नहीं, आध्यात्मिक अनुभव का क्षेत्र भी है प्रयागराज: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में 5500 करोड़ की 167 परियोजनाओं को लोकार्पण किया तथा कहा कि परियोजनाएं प्रयागराज को प्रगति की नई दिशा दिखायेगी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महाकुंभ (Mahakumbh 2025) का आयोजन देश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को नए शिखर पर स्थापित करेगा। प्रयागराज की इस धरती पर नया इतिहास रचा जा रहा है। इसकी चर्चा पूरी दुनिया में होगी। उन्होंने कहा कि हमारा भारत पवित्र स्थलों एवं तीर्थों का देश है। संत महात्माओं ने देश से जुड़े कई निर्णय कुंभ जैसे आयोजन स्थल पर ही लिये हैं। इसने कई बार बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार तैयार किया था। प्रयागराज केवल एक भौगोलिक भूखंड ही नहीं है, यह एक आध्यात्मिक अनुभव का क्षेत्र भी है।
वरिष्ठ पत्रकार,अमर नाथ झा