Khasi Jaintia Tribe : शादी करके लड़की अपने ससुराल जाती है ये तो सभी जानते है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि शादी होने के बाद एक लड़का अपने ससुराल जा कर रहने लगता है। यानी की लड़की के घर उसका पति रहने जाता है। जी हां ऐसा होता है भारत के एक राज्य है में जंहा पहाड़ों पर रहने वाली खासी जनजाति बसती है। जहां पर एक विशेष परंपरा निभायी जाती है। यहां पर आदिवासी परिवार का वंश महिला के माध्यम से चलता हैं । आइये जानते हैं इस जनजाति की परंपरा के बारे में ।
चेरापूंजी की जनजाति है खासी:
भारत के मेघालय राज्य में पहाड़ों पर रहने वाली खासी और जैंतिया जनजाति का निवास है । चेरापूंजी जिसे सोहरा नाम से भी जाना जाता है । यहां खासी जनजाति का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। खासी जनजाति मेघालय की एक बड़ी जनजाति है। उनकी अपनी एक सम्रद्ध संसकृति है। ये जनजाति पारंपरिक रूप से छोटे-छोटे कबीलों में रहती है। यह भारत के सबसे पुराने जातियों समूहो में से एक माना जाता है। इस जनजाति की अपनी एक खासियत है। उनकी संस्कृति और सामजिक व्यवस्था मातृसत्तात्मक हैं । यह अद्वितीय संस्कृति चेरापूंजी की पहचान और यहां का महत्वपूर्ण हिस्सा है ।
खासी की वंशावली माता की तरफ से होती है:
खासी जनजाति की एक उल्लेखनीय विशेषता है कि उनका वंश माता की तरफ से चलता है यानी की उनके यहां मातृवंशीय वंशावली प्रणाली चलती है।इनके परिवार का वंश मां की ओर से लिया जाता है। यहां पर दूल्हा शादी के बाद अपनी दुल्हन के साथ उसके घर रहने जाता है। यदि दुल्हन अपने परिवार की आखरी बेटी है तो ये जरुरी होता है। ऐसे में माता पिता की देखभाल की जिम्मेदारी छोटी बेटी पर आ जाती हैं । सारी पैतृक संपत्ति छोटी बेटी को दे दी जाती है। बच्चे अपने पिता के उपनाम के बजाय अपनी माता का उपनाम लगाते है ।
इसके पीछे है सामाजिक कारण:
ऐसा माना जाता है कि इन उद्देश्यों के पीछे सामजिक और संस्कृतिक कारण हो सकते हैं । जैसे की महिलाओं को समान अधिकार देना । परिवार में बेटियों को अधिक मह्त्व देना। यहां पर लडकियों को अपनी पसंद से शादी करने की इजाजत भी होती है । यहां पर वंश माता के परिवार से चलता हैं यानि की मातृवंशावली चलती है । यहां पर परिवार की मुखिया महिला होती है। हालांकि कुछ समय बाद अलग होकर लड़का अपना घर खुद बनाता है ।
बबीता आर्या