Wednesday, January 14, 2026
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खाड़ी और यूरोपीय देशों तक फैली मनेर के लड्डुओं की मिठास

by KhabarDesk
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Maner Laddu

Maner Laddu :   जब किसी जश्न,खुशखबरी या त्यौहार की बात हो तो मुंह मीठा करने के लिये किसी खास मिठाई की बात होती है । मीठे में लड्डु की मिठास ना हो ऐसा हो नही सकता है। कुछ खास तरह के लड्डुओं की बात की जाये तो बिहार के मनेर का लड्डू काफी प्रसिद्ध है। बिहार की राजधानी पटना का एक छोटा सा कस्बा जिसे मनेर के नाम से जाना जाता है । यंहा के लड्डुओं का अपना एक अलग स्वाद और मिठास है । इतिहासकारों का कहना है कि यहा की मिट्टी और भूगर्भ जल ही इस मिठाई के स्वाद और मिठास का असली कारण है । तो चलिये आज जानते है कि मनेर के इस स्वादिष्ट लड्डुओं के बारे में ।

मनेर के खास लड्डू :

बिहार के मनेर नगर की प्रसिद्ध ऐतिहासिक मिठाई जो शुद्ध देशी घी और चने के दाल के बेसन से बनती है। आज हम इस खास मिठाई के बारे में आपको बताएंगे। बिहार की राजधानी पटना के पास बसा एक छोटा सा कस्बा अपनी खास मिठास के लिए जाना जाता है। यहां पर गंगा और सोन नदी के संगम पर बसे मनेर की विशिष्ट भौगोलिक पहचान इन लड्डुओं को अन्य मिठाई से अलग बनाती है। इन लड्डुओं को बनाने में आज भी एक पारंपरिक विधि का इस्तेमाल किया जाता है । अपनी महीन बूंदी, खास स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए जाना जाने वाला मनेर का यह लड्डू अपने आप में एक अलग ही मिठास सजोंए हुए हैं । बड़े-बड़े नेताओं और राजनेताओं द्वारा पसंद किए जाने वाले इस लड्डू को आज जीआई टैग भी मिल चुका है ।

मनेर की खास पहचान:

ऐसा कहा जाता है कि मनेर दो चीजों के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। पहले तो यहां के सूफी संत मखदूम दौलत जिन्होंने सन 1608 में यह समाधि ली थी। जिनकी दरगाह पर आज भी देश भर के लोग सजदा करने आते हैं । मनेर की दूसरी खासियत यहां के फेमस लड्डू है। मनेर के लड्डू का स्वाद एक बार अगर मुंह में घुल जाता है, तो फिर अन्य लड्डुओं का स्वाद समझ में नहीं आता है । फिर वह कोई चुनावी दंगल की जीत हो या फिर किसी के घर की खास खुशियां हो। सभी लोगो के यहां खास अवसरों पर यह लड्डू अपनी खास भूमिका निभाता है।

लड्डू का इतिहास:

मनेर के लड्डू का अपना अलग इतिहास है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार मुगल बादशाह शाह आलम मनेर शरीफ इबादत करने आए थे। वह अपने साथ कुछ खास खानसामे और मिठाई के कारीगर भी साथ में लेकर आए थे। वह अपने साथ दो तरह की मिठाइयां बूंदी के लड्डू और ताजखानी साथ लेकर आए थे। यहां पर आकर उन्होंने सूफी संतों को यह भेंट किया था । संतो द्वारा इस लड्डू की प्रशंसा होने के बाद उन्होंने अपने खास खानसामो को बुलाकर वहां के स्थानीय मिठाई बनाने वालों को यह मिठाई बनाना सिखाया । फिर धीरे-धीरे यह व्यापार का हिस्सा भी बनता चला गया और बाद मे मनेर का लड्डू काफी प्रसिद्ध हुआ ।

किस तरह से बनता है मनेर का यह खास लड्डू:

गंगा और सोन नदी के संगम पर बसा यह छोटा सा कस्बा अपनी भौगोलिक स्थिति के लिए भी अलग पहचान बनाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां का भूगर्भ जल और यहां की मिट्टी इस मिठाई को एक अनोखा और असाधारण  स्वाद देती है। इस मिठाई को बनाने में शुद्ध देसी घी, बेसन ,चीनी, ड्राई फ्रूट्स, कन्नौज का इत्र और हरसिंगार के फूल के डंठल से तैयार किये गये चंपई रंग का इस्तेमाल किया जाता है। इस मिठाई को बनाने के लिए सबसे पहले बेसन और पानी का एक पतला घोल तैयार किया जाता है । इसके बाद गरम घी के कढ़ाहे में महीन छन्नी लगाकर छोटी बूंदी या नुक्ती तैयार की जाती है। इसके पश्चात इस बूंदी में चीनी की चाशनी मिलाकर गोल दाना तैयार किया जाता है । फिर विशेष कारीगरों द्वारा लड्डुओं को गोल आकार दिया जाता है। कारीगरों की निपुणता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके हाथों से बने लड्डुओं का आकार एक समान और एक वजन का होता है। इन लड्डुओं में मिलाये जाने वाले केवड़े का इत्र दुनिया भर के मशहूर इत्रों में से एक होता है। जो इन लड्डुओं को एक अलग सुगंध देता है।

लड्डुओं के मिठास की वजह:

ऐसा कहा जाता है कि लड्डुओं के अनोखे मिठास की एक अलग ही वजह है । जिसका रहस्य यहां के सोन नदी के पानी में छिपा है। जो यहां के लड्डू में एक खास मिठास देता है । मनेर के मिठाई कारीगर  मनोज बताते हैं कि उनकी चार पीढ़ियां इस व्यवसाय से जुड़ी हुई है। उनका कहना है कि मनेर का जो जल है वह मनेर के लड्डुओं को एक बेजोड़ स्वाद देता है। यही वजह है कि अन्य स्थानों पर इस प्रकार का लड्डू बनाने की कोशिश होने के बावजूद यह स्वाद नहीं मिल पाया।

The sweetness of Maner laddus reached Gulf and European countries.

नेता और अभिनेता सभी पसंद करते हैं मनेर के लड्डू

मनेर के लड्डुओं का स्वाद मुंबई के फिल्म कलाकारों से भी अछूता नहीं है। फिल्म जगत के जाने माने कलाकार जितेंद्र, शत्रुघ्न सिन्हा ,कुमकुम, पद्मा खन्ना, अनीता चंद्र और आमिर खान तक यहां के लड्डुओं का स्वाद चख चुके है और इन लड्डुओं के दीवाने हुए हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी के समय में इन लड्डुओं को वर्ल्ड फेम का दर्जा मिला और बड़ी मात्रा में इन लड्डुओं को इंग्लैंड भेजा गया। जहां इसे वहां के राजा रानियों ने खूब सराहा ।

राजनीतिक गलियारा भी इन लड्डुओं के स्वाद से अछुता नहीं है । देश के तीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई, चंद्रशेखर और वीपी सिंह भी मनेर के लड्डू का स्वाद ले चुके हैं । लालू प्रसाद यादव तो मनेर के लड्डुओं के एक लंबे अरसे से ग्राहक है ।आज भी राजनीतिक आयोजनों में इन लड्डूओं की मांग होती है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में चुनाव सभा के दौरान मंनेर के लड्डू का जिक्र किया था ।

लड्डुओं की कीमत:

मनेर के लड्डू दो तरह से बनाए जाते हैं । एक शुद्ध देशी घी में और दूसरा रिफाइंड आयल में भी बनते हैं। शुद्ध देसी घी से बने लड्डुओं की कीमत 740 रुपए प्रति किलो है। वही रिफाइंड तेल से बने लड्डुओं की कीमत 540 रुपए प्रति किलो है।

आज भी मनेर का लड्डू अपनी परंपरा, शुद्धता और बेजोड़ स्वाद के लिए जाना जाता है । ऐसा कहा जाता है कि यह मनेर की सिर्फ एक मिठाई ही नहीं बल्की वहां की एक विरासत है। मुगलों से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य तक ने इस मनेर के लड्डू की मिठास चखी है। मनेर के लड्डू की देश ही नही यूरोपीय और खाड़ी दशों मे भी इनकी पहचान, सुगंध और मिठास पहुच चुकी हैं ।

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