Thursday, March 5, 2026
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Jitiya Vrat : भगवान जीमूतवाहन को समर्पित है, लोक पर्व जिउतिया

Jitiya Vrat

by KhabarDesk
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Jitiya Vrat

Jitiya Vrat : जिउतिया या जितिया अर्थात‌ जीवित्पुत्रिका व्रत, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में मांए अपनी संतान के लिए करती हैं। एक माँ अपनी संतान के लिये क्या नही करती । उसके लिए संतान से बढ़कर अन्य कोई सुख नहीं होता , इसीलिए संतान के लिये उसका स्थान भगवान से भी ऊपर है ।

 Jitiya Vrat  : तीन दिन का कठिन व्रत

तीन दिन का कठिन व्रत सप्तमी को नहा धोकर सूर्य देव को जल का अर्ध्य देने एवं पूजा के बाद सात्विक भोजन करने के बाद प्रारम्भ होता है। सप्तमी को सूर्यास्त के पूर्व मध्यान्ह में भोजन करने के बाद अष्टमी को निराहार रह कर माताएं भगवान जीमुतवाहन का पूजन करते हुये अपनी संतान की लम्बीआयु का वरदान मांगती है । यह व्रत कार्तिक मास में धूमधाम से किये जाने वाले छठ के ही समान कठिन होता है। व्रत में तीसरे दिन नहा धोकर पूजन के पश्चात मध्यान्ह में पारण कर एक ही समय सात्विक भोजन जिस में नौनी की भाजी अवश्य खाई जाती है ।

जिउतिया Jitiya Vrat कथा : महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों के कुल का नाश करने के लिये अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ को नष्ट करने के लिये ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिससे अभिमन्यु का पुत्र उत्तरा के गर्भ में ही मृत हो गया । श्री कृष्ण की बहिन सुभद्रा ने अपने भाई से उसे बचाने की प्रार्थना की जिससे पांडवों के वंश की रक्षा हो सके । श्री कृष्ण ने पांडवों के वंश की रक्षा के लिये अपने जीवन में किये सारे पुण्य कर्मों का दान करते हुये उस मृत पुत्र की रक्षा के लिये उत्तरा के गर्भ में सूक्ष्म रूप से प्रवेश कर उसकी रक्षा की जिससे उनका नाम जीमूतवाहन पड़ा । अर्थात मृत को भी जीवित करने वाले इस व्रत को जीवित्पुत्रिका कहा गया । इसे जिउतिया भी कहते हैं । जिन महिलाओं को संतान नहीं होती वह भी संतान प्राप्ति के लिये इस कठिन व्रत (Jitiya Vrat) को करती हैं। पौराणिक आख्यानों में यह मान्यता है, कि ऐसी शक्ति केवल श्री कृष्ण के ही पास थी । संदीपनि मुनि ने ही इसका ज्ञान कृष्ण को दिया था ।

उषा सक्सेना

डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त विचार पूरी तरह से लेखिका के व्यक्तिगत विचार हैं। इनमें दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें।

 

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