Anti Aging Tips : उम्र के बढ़ने के साथ-साथ चेहरा, त्वचा, बाल,शारीरिक बनावट सभी पर इसका असर दिखाई देने लगता है। बढ़ती उम्र को रोका तो नहीं जा सकता लेकिन एजिंग की इस प्रक्रिया को धीमा जरूर किया जा सकता है। यानी अगर हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो उम्र बढ़ने के साथ दिखने वाली ये शारीरिक तब्दीलियां थोड़ी कम जरूर की जा सकती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे 5 एंटी एजिंग टिप्स Anti Aging Tips जिन्हें अपना कर आप बढ़ती उम्र को थाम कर रख सकते हैं।
कौन बूढ़ा होना चाहता है ! हर किसी की यही चाहत होती है कि वह सदा जवान दिखें और खासतौर पर महिलाओं में तो सुंदर और जवान दिखने की चाहत हमेशा होती है। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ जब बुढ़ापे के चिन्ह नजर आने लगते हैं तो लोग परेशान होकर कई तरह के प्रोडक्ट्स आजमाते हैं। बाजार में कई तरह के एंटी एजिंग प्रोडक्ट्स मिलते हैं, इसमें विशेष रूप से एंटी एजिंग क्रीम या सीरम लोग काफी इस्तेमाल करते हैं। यह प्रोडक्ट्स कुछ समय के लिए तो असर दिखा सकते हैं, लेकिन इनका असर लॉंग लास्टिंग नहीं होता। क्योंकि यह प्राकृतिक नहीं होते। यदि एंटी एजिंग के प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपाय अपनाएं जाएं तो आप बेहतर रिजल्ट पा सकते हैं।
Anti Aging Tips :
1 प्राणायाम : हमारी जिंदगी हमारी सांसों पर निर्भर करती है। तो हमे इन सांसों को खर्च करने का तरीका भी आना चाहिए। हम अपनी सांसों को जितना लंबा और गहरा बनाएंगे उतना ही लंबा जीवन हम जी सकते हैं। आपने कभी गौर किया हो तो कछुआ लंबी आयु जीता है, वह 1 मिनट में दो या तीन सांसे लेता है, जबकि छोटा जीवन जीने वाला बंदर या कुत्ता एक मिनट में 38 से 50 बार तक सांस लेता है। यानी हमें लंबा और स्वस्थ जीने के लिए सांसो पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। प्राणायाम इसके लिए एक बेहतर तरीका है, जिसमें लंबी गहरी सांस लेकर छोड़ी जाती है। जब हम गहरी सांस लेते हैं तो अधिक ऑक्सीजन हमारे खून में जाती है, और ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ने से बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है। यह शरीर को स्वस्थ और जवां बनाए रखने में भी मदद करता है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण भी कई तरह के रोग हो जाते हैं। इसीलिए प्राणायाम का अभ्यास करने से कई बीमारियों को दूर रखा जाता जा सकता है या फिर उन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इसलिए लंबी और स्वस्थ उम्र पाने और स्वस्थ त्वचा और शरीर पाने के लिए रोज प्राणायाम का अभ्यास करें।
प्राणायाम करने का सबसे अच्छा समय सुबह 6 बजे से 10 बजे के बीच होता है। कोई भी फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज सुबह के समय ही करना सबसे अच्छा होता है। आयुर्वेद में भी सुबह का समय शारीरिक व्यायाम के लिए अच्छा माना जाता है। यूं तो जब भी आपको मौका मिले आप गहरी सांस लेने का अभ्यास कर सकते हैं। गहरी सांस लेने से आपको जल्दी-जल्दी सांस लेने की आदत कम होगी, आप अधिक स्वस्थ महसूस करेंगे और इसका असर आपके चेहरे पर भी दिखाई देगा।
2 व्रत या फास्टिंग
आयुर्वेद में कहा गया है लंघन परम औषधम , यानी व्रत से बढ़कर कोई औषधि नहीं है। यदि हम हफ्ते में एक दिन व्रत रखते हैं तो इससे हमारे शरीर के सभी ऑर्गन्स को आराम मिलता है और बेहतर काम करने की ऊर्जा भी मिलती है। एक दिन न खाकर हम अपनी पाचन क्रिया, अपने पेट, लिवर, किडनी, गॉलब्रेडर इन सभी अंगों को आराम दे सकते हैं व उन्हें आंतरिक मरम्मत करने का समय भी मिल जाता है। व्रत की प्रक्रिया से हमारे शरीर के अंदर के टूटे-फूटे सेल्स और टिशूज खत्म होते हैं और उनकी जगह नए सेल्स को बनने में मदद मिलती है। यानी एक तरह से यह शरीर के अंदर से मरम्मत का कार्य करता है। जापानी चिकित्सा वैज्ञानिक योशिनोरी ने भी ऑटोफेजी का सिद्धांत प्रतिपादित किया था और इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार भी मिला था। यह भी कुछ ऐसा ही सिद्धांत है जिसमें शरीर अंदर से स्वयं अपनी सफाई करता है।
क्या है ऑटोफेजी
ऑटोफैजी (Autophagy) एक कोशिकीय प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएं अपने अवांछित या क्षतिग्रस्त सेल्स और टिशूज को तोड़कर और पुनर्चक्रित करके अपनी सफाई और रखरखाव करती हैं। ऑटोफैगी के जनक योशिनोरी ओसुमी (Yoshinori Ohsumi) जो जापानी कोशिका जीवविज्ञानी हैं। उन्हें 2016 में ऑटोफैगी पर उनके शोध के लिए चिकित्सा विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ओसुमी के शोध ने ऑटोफैजी की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और इसके महत्व को विभिन्न बीमारियों के संदर्भ में उजागर किया था। पश्चिमी और एशियाई देशों के समक्ष ये शोध इतनी बाद में आया जबकि हमारे देश का आयुर्वेद बहुत पहले से ही इसके गुण और फायदे बता चुका है।
आयुर्वेद के अनुसार “लंघनं परम औषधम्” का अर्थ है, उपवास सर्वोत्तम और सर्वोच्च औषधि है। आयुर्वेद में, लंघन (उपवास) को शरीर को शुद्ध करने, पाचन को बेहतर बनाने, और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार माना जाता है। लंघन का अर्थ है हल्कापन या उपवास। यह शरीर को हल्का करने और पाचन को ठीक करने की प्रक्रिया है। आयुर्वेद में, उपवास को शरीर को शुद्ध करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार माना जाता है। लंघन से पाचन में सुधार होता है, शरीर में जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के लंघन (उपवास) बताए गए हैं, जैसे कि एक दिन का उपवास, कुछ समय के लिए उपवास, या कुछ खाद्य पदार्थों को कम करना। भारत में पहले से ही कई व्रत और उपवास रखने का रिवाज रहा है और देखा गया है की व्रत और उपवास से शरीर का स्वास्थ्य बेहतर होता है, पाचन क्रिया सुधरती है और काया भी निरोगी होती है। एक शोध के अनुसार यदि आप अपने रोज के आहार में 30% कैलोरी को कम करते हैं तो आप अपनी एजिंग को 30 फीसदी तक रिवर्स कर सकते हैं।
Anti Aging Tips :
3 काया कल्प करने वाले खाद्य पदार्थ Rejuvenator Food
ऐसे खाद्य पदार्थ जो शरीर में कोशिकाओं की टूट-फूट को ठीक कर उसे जवां बनाएं रखते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें जैसे आंवला, त्रिफला जिसमें तीन फल शामिल होते हैं (आंवला हरड़ और बहेड़ा) त्रिफला में आक्सीजन बढ़ाने वाले तत्व पाए जाते हैं। अच्छी फार्मेसी का च्यवनप्राश मिले तो उसे भी आप अपने आहार में शामिल कर सकते हैं, ध्यान रहे उसमें चीनी की मात्रा अधिक ना हो। आयुर्वेद में बहुत ऐसी औषधियां व जड़ी बूटियां हैं जो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाती हैं। जिसमें ब्राह्मी, शतावरी, अश्वगंधा इत्यादि शामिल हैं। आप अपने शरीर के हिसाब से किसी आयुर्वेदाचार्य से संपर्क कर अपने लिए इनमें से बेहतर विकल्प का चुनाव कर सकते हैं।
4 सर्केडियन रिदम का पालन करें : Anti Aging Tips
आयुर्वेद के अनुसार शरीर की सर्केडियन रिदम को सूर्य के उगने और डूबने के साथ जोड़ा गया है। जब सूर्य उगता है तो ऐसे में शरीर की जठराग्नि यानी शरीर में खाना पचाने के तत्व क्रियान्वित होते हैं और जैसे ही सूरज डूबता है तो यह तत्व भी शांत हो जाते हैं। यानी हमें आयुर्वेद के हिसाब से सूरज ढलने से पहले ही अपने भोजन की प्रक्रिया को पूरा कर लेना चाहिए। यह बहुत ही अच्छी एंटी एजिंग तकनीक मानी जाती है। क्योंकि जब आपका पाचन सबसे तीव्र होता है तभी आपको भोजन करना चाहिए और जब पाचन क्रिया कम हो जाती है तब आपको भोजन नहीं करना चाहिए। इस नियम को अपनाकर आप न केवल वेट लॉस कर सकते हैं बल्कि एजिंग प्रक्रिया को भी धीमा कर सकते हैं। सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) हमारे शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो लगभग 24 घंटे के चक्र में चलती है। यह हमारे शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करती है, जैसे ,नींद और जागने का चक्र,हार्मोन का स्राव, पाचन और चयापचय,शरीर का तापमान, रक्तचाप और हृदय गति।
सर्केडियन रिदम हमारे शरीर को दिन और रात के अनुसार अपने कार्यों को समायोजित करने में मदद करती है। यह हमारे शरीर की एक प्राकृतिक घड़ी है जो हमें स्वस्थ और सक्रिय रहने में मदद करती है।
सर्केडियन रिदम के अनियमित होने से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे नींद की समस्या, थकान और कमजोरी,पाचन समस्या, मूड स्विंग, अवसाद,वजन बढ़ना और मधुमेह इसलिए, सर्केडियन रिदम को बनाए रखने के लिए नियमित दिनचर्या, स्वस्थ आहार, और पर्याप्त नींद लेना महत्वपूर्ण है।
5 ब्रह्मचर्य का पालन
ब्रह्मचर्य का पालन करने के नियम का सबसे अच्छा उदाहरण सबसे अधिक जीवन जीने वाले स्वामी शिवानंद के जीवन से मिलता है। उन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन कर लंबी आयु पाई। यहां तक की शादीशुदा लोग भी कुछ हद तक ब्रह्मचर्य का पालन कर अपनी आयु को बढ़ा सकते हैं और अपने शरीर के स्वास्थ्य और यौवन को भी बरकरार रख सकते हैं। इसमें शारीरिक जरूरत और शारीरिक लालसा (Lust) को अलग करके देखने की आवश्यकता है। यानी संयम से आप अपने जीवन को ज्यादा सुंदर, स्वस्थ व निरोगी बना सकते हैं। ब्रह्मचर्य का स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर हो सकता है, ब्रह्मचर्य का पालन करने से मानसिक शांति और स्थिरता मिल सकती है, जिससे तनाव और चिंता कम हो सकती है। ब्रह्मचर्य के माध्यम से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को संरक्षित करने का प्रयास किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति अधिक सक्रिय और उत्पादक हो सकता है। ब्रह्मचर्य शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जैसे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और बीमारियों से बचाव। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ब्रह्मचर्य का पालन करने से पहले व्यक्तिगत परिस्थितियों और आवश्यकताओं पर विचार किया जाए। एक संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली के लिए व्यक्तिगत जरूरतों और लक्ष्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
तो आप भी आयुर्वेद पर आधारित इन नियमों का पालन करके न सिर्फ अपनी शारीरिक समस्याओं को ठीक कर सकते हैं, बल्कि अपनी जवानी को भी देर तक बरकरार रख सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। अपने आहार में बदलाव से पहले अपने विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।