BluSmart EV : बढ़ते प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन और गर्म होती पृथ्वी से प्रदूषण के खतरों को कम करने के लिए परिवहन व्यवस्था में नित नए परिवर्तन हो रहे हैं। इस दिशा में ग्रीन एनर्जी की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। इसके लिए इलेक्ट्रिकल वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में भी EV वाहनों को बढ़ावा देने के उपायों के तहत ब्लू स्मार्ट टैक्सी की शुरुआत की गई थी, लेकिन आंतरिक कारणो की वजह से ब्लू स्मार्ट के ऑपरेशन को बंद कर देना पड़ा है। इससे न केवल 10,000 वाहन चालकों पर बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है। बल्कि क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी के भविष्य को भी गहरा आघात पहुंचा है। फिलहाल दिल्ली उच्च न्यायालय ने ब्लू स्मार्ट द्वारा संचालित 95 इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रभार संभालने के लिए रिसीवर नियुक्त कर दिया है। यह आदेश क्लाइम फाइनेंस द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया, जिसमें कहा गया था कि 2022 में ब्लूस्मार्ट को पट्टे पर दिए गए 95 टाटा ईवी पर उसका पूर्ण अधिकार है।
क्या है EV ब्लू स्मार्ट टैक्सी सेवा
ब्लूस्मार्ट एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) राइड-हेलिंग सेवा है, जो भारत में संचालित है। इसकी स्थापना अनमोल सिंह जग्गी, पुनीत के गोयल और पुनीत सिंह जग्गी ने 2019 में की थी। ब्लूस्मार्ट का फ्लीट पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों से बना है, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना और ग्रीन परिवहन को बढ़ावा देना है। ब्लूस्मार्ट राइड-हेलिंग सेवाएं प्रदान करती है, जिससे उपयोगकर्ता अपने ऐप के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन की सवारी बुक कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करके, ब्लूस्मार्ट शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में योगदान करती है। ये सेवा एक प्रौद्योगिकी प्लेटफ़ॉर्म पर बनाई गई है जो कुशल राइड बुकिंग, ट्रैकिंग और प्रबंधन को सक्षम बनाती है। ब्लूस्मार्ट, दिल्ली एनसीआर मुंबई बेंगलुरु और दुबई के कुछ हिस्सों में काम करता है।
क्यों बंद हुई BluSmart सेवा
एवी ब्लू स्मार्ट टैक्सी सेवा के संस्थापकों पर वित्तीय अनियमिता और कंपनी के फंड को अपने निजी लाभ के लिए उपयोग करने के आरोप के चलते कंपनी की सेवाओं को दिल्ली एनसीआर मुंबई और बेंगलुरु में समाप्त कर देना पड़ा है। इससे न केवल ब्लू स्मार्ट के कर्मचारी और ड्राइवरों पर बेरोजगारी का संकट छा गया है, अपितु इस सेवा से संतुष्ट ग्राहकों और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर संवेदनशील लोगों में भी निराशा है। कंपनी के प्रमोटर्स पर कंपनी के फंड को अपने निजी इस्तेमाल के लिए गलत रूप से प्रयोग करने की आरोप लगे थे। अब ब्लू स्मार्ट सेवा का क्या होगा यह एक बड़ा सवाल है। एक भविष्य उन्मुख अच्छी क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी टैक्सी सेवा का यूं इस तरह दम तोड़ देना हताशा जनक है। ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है इसके लिए सरकार को कोई रास्ता निकाल कर इस सेवा को बहाल करने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे न केवल क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी का विकल्प बरकरार रहे बल्कि इससे जुड़े लोगों के रोजगार को भी बचाया जा सके।
कम ही समय में लोकप्रिय बन गई थी ब्लू स्मार्ट सर्विस
8000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक व्हीकल के साथ काम करने वाली ब्लू स्मार्ट सर्विस ने जल्द ही ग्राहकों के बीच लोकप्रियता हासिल कर ली थी। यह सेवा पर्यावरण के लिहाज से तो बेहतरीन थी ही, साथ ही अपने पारदर्शी और वाजिब किराए के कारण भी यह जल्द ही ग्राहकों की पहली पसंद बन गई थी। ब्लू स्मार्ट में किराया फिक्स रहता था, जिसमें किसी तरह की कोई फेर बदल नहीं होता था। और साथ ही इसकी जीरो कैंसिलेशन पॉलिसी भी ग्राहकों को बहुत पसंद थी। इसके तमाम फीचर ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखकर ही बनाए गए थे। यही वजह थी कि यह दूसरी ऐप बेस्ड कैब सर्विसेज की तुलना में ज्यादा पारदर्शी और बेहतर सेवा देने वाली साबित हो रही थी। ब्लू स्मार्ट ने निवेशकों से प्राप्त 500 करोड़ रूपयों से वाहन निर्माता और रियल एस्टेट फर्म्स के साथ चार्जिंग हब्स बनाने की योजना बनाई थी। इसकी लोकप्रियता इसी से पता चलती है की ब्लू स्मार्ट ऐप के एक मिलियन से ज्यादा डाउनलोड्स हो चुके थे।
खतरे में ब्लू स्मार्ट सेवा
लेकिन अब प्रमोटर्स द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के चलते इस सेवा के बंद हो जाने से 10,000 ड्राइवर अचानक ही बेरोजगार हो गए हैं। ब्लू स्मार्ट के अधिकतर ड्राइवर के पास EV गाड़ियां नहीं थी ऐसे में वे दूसरी सर्विस के लिए भी गाड़ी नहीं चला पा रहे हैं। कई ड्राइवर या तो शहर से वापस लौट रहे हैं या फिर कोई और रोजगार तलाश रहे हैं।
कैसे बचेगी ब्लू स्मार्ट सर्विस
ऐसे समय में जब सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही हैं और भारत के जलवायु लक्ष्यों में 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी का लक्ष्य रखा गया है। ग्रीन एनर्जी के लिए इस बदलाव में शहरी परिवहन एक प्रमुख क्षेत्र है। ब्लू स्मार्ट फ्लीट जिसने महानगरों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उसे बंद होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और विनिर्माण के साथ चरण 2 योजना अपने अंत के करीब है, मौजूदा ईवी बुनियादी ढांचे को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
ब्लू स्मार्ट का सबसे बड़ा यूएसपी उसकी सर्विस की विश्वसनीयता थी। अन्य कैब सर्विसेज कैंसिलेशन, देरी लगाना, डिमांड देखकर किराए में बढ़ोतरी करने की शिकायतें आम हैं, जबकि ब्लू स्मार्ट में ऐसी कोई परेशानी नहीं थी। इस तरह का कोई कैंसिलेशन नहीं, रियल टाइम कैब ट्रैकिंग और एक निश्चित किराया चाहे कोई भी वक्त हो या गाड़ी की कितनी भी डिमांड हो फिर भी किराए में कोई बदलाव नहीं आता है। साथ ही सुरक्षा का भी खास ध्यान ब्लू स्मार्ट सर्विस में रखा जाता था। जानकारों का मानना है कि इतनी बेहतर, पर्यावरण के अनुकूल EV कैब सर्विस को चलाए रखने की कोशिश की जानी चाहिए और इसके लिए इसे “सहकार टैक्सी” के अंतर्गत लाया जा सकता है।
क्या है सहकार टैक्सी
कॉमर्शियल ऑटो, टैक्सी की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने नई कॉपरेटिव टैक्सी सर्विस ‘सहकार टैक्सी’ को लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य बाइक, कैब और ऑटो सर्विस उपलब्ध कराना है। इस कॉपरेटिव टैक्सी सर्विस के लॉन्च से ऑनलाइन टैक्सी बाजार में प्रभुत्व रखने वाली कंपनियों को चुनौती मिलेगी। इस कदम का उद्देश्य एक वैकल्पिक ट्रांसपोर्ट सर्विस उपलब्ध कराना है, जहां चालक बड़ी कंपनियों के साथ लाभ साझा किए बिना सीधे कमाई कर सकेगें। सहकार टैक्सी देशभर में दोपहिया टैक्सियों, ऑटो-रिक्शा और चार पहिया टैक्सियों का पंजीकरण करेगी। निजी कंपनियों के विपरीत, यह सरकार समर्थित सेवा यह सुनिश्चित करेगी कि सारी कमाई ड्राइवरों के पास ही रहे, जिससे उन्हें अधिक वित्तीय लाभ मिलेगा। इस नई पहल का उद्देश्य ड्राइवरों को सशक्त बनाना है। साथ ही यात्रियों को विश्वसनीय और लागत प्रभावी परिवहन विकल्प प्रदान करना है। बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में “यात्री साथी” नाम से एक ऐसा ही सर्विस पहले से ही चल रही है, जो पहले सिर्फ कोलकाता में उपलब्ध थी। अब इसका विस्तार सिलीगुड़ी, आसनसोल और दुर्गापुर जैसे शहरों में भी हो गया है।
2025 में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकार टैक्सी स्कीम की शुरुआत पूरे देश भर में करने की योजना रखी है। सहकार टैक्सी, टैक्सी चालकों का एक कोऑपरेटिव है। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव के अंतर्गत ड्राइवर को किराए का 40% शेयर मिलता है, यह ड्राइवर इस सरकारी टैक्सी कोऑपरेटिव के सदस्य होते हैं। यह एक प्राइमरी ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव है जिसमें सर्विस का लाभ, ट्रेनिंग और ड्राइवर के कल्याण के लिए चलाए जा रहा है। इस योजना को नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा सपोर्ट किया जाता है। इसके लिए सरकार स्टार्टअप के लिए पूंजी भी प्रदान करती है जो सहकारिता मंत्रालय द्वारा प्रदान की जाती है। इस योजना के लिए पहले फेज में सरकार 20,000 चालकों को इस योजना का हिस्सा बनाएगी। ऐसे में ब्लू स्मार्ट सेवा और उसके कर्मचारियों को सहकार टैक्सी में शामिल करना एक सकारात्मक कदम हो सकता है। इससे न केवल कुशल प्रशिक्षित ड्राइवरों को वापस उनका रोजगार मिल जाएगा बल्कि ग्राहकों को एक बेहतर सेवा फिर से मिल पाएगी।
व्यावसायिक जवाब देही के आभाव में ब्लूस्टार्ट जैसे स्टार्टअप का बंद हो जाना निराशाजनक है । ऐसे में जब, भारत अपने शहरों को पर्यावरण के लिहाज से अधिक समावेशी, क्लीन और ग्रीन बना रहा है, ब्लूस्मार्ट को सहकार टैक्सी में एकीकृत करना एक सकारात्मक कदम होगा।
अंशु नैथानी