Friday, April 17, 2026
Home धर्म कर्म कौन हैं पंच दिव्य कन्यायें ? पंच कन्या महारत्ने। महापातकनाशनम् ।।

कौन हैं पंच दिव्य कन्यायें ? पंच कन्या महारत्ने। महापातकनाशनम् ।।

Story of Panch Kanya

by KhabarDesk
0 comment

Panch Kanya : पौराणिक काल की पंच कन्याओं का रहस्य बहुत ही अद्भुत है। ये वे पंच दिव्य कन्यायें हैं जिनके साथ कुछ न कुछ कहानियां जुड़ी हैं। जिनका नाम ही महापातक को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है । यह पंच कन्याएं कौन हैं आइए जानते हैं।

Story of Panch Kanya

(1) अहिल्या

अहिल्या ब्रह्माजी की मानस पुत्री थी,जिस पर मोहित होकर देवराज इन्द्र ने ब्रह्मा से उसे पाने की याचना की थी किंतु ब्रह्मा जी ने यह कहा कि वह जिसे पसंद करेगी उसी के साथ उसका विवाह होगा, इंद्रदेव को विवाह के लिए मना कर दिया। सत्य तो यह था कि ब्रह्मा जी स्वयं देवराज को अपनी पुत्री देना नहीं चाहते थे। बाद में गौतम ऋषि से उनका विवाह हुआ। इन्द्र ने गौतम ऋषी का रूप धारण कर उन्हें छला। बाद में गौतम ऋषि के शाप से मुक्त होने के लिये अहिल्या ने स्त्री होकर भी पत्थर बन कर तपस्या की और श्री राम के पाद स्पर्श से वह पावन हुई। देव कन्या होने से वह अन्य स्त्रियों से पृथक थी ।

2) तारा

तारा समुद्र मंथन से उत्पन्न‌ हुई अति सुंदर अप्सरा थी। बालि और सुषेण वैद्य ने भी उस समय समुद्र मंथन में भाग लिया था।  तारा पर दोनों की ही दृष्टि थी । विष्णु जी के कहने पर तारा को पाने के लिये बालि उसकी दाहिनी ओर एवं सुषेण बाईं ओर खड़े हो गये । विष्णु जी ने दोनों को समझाते हुये कहा दाहिनी ओर का स्थान पति एवं बाई ओर पिता का स्थान है अत: तारा सुषेण वैद्य की पुत्री होकर बालि की पत्नी बनी । अप्सरायें सदा ही चिर यौवना और अति सुन्दर होती हैं।  तारा भी एक दिव्य कन्या थी।

) मंदोदरी

इसी प्रकार से मंदोदरी अप्सरा हेमा और असुर मय की अनिंद्य सुन्दरी पुत्री थी जिस पर मोहित हो कर रावण ने उसके साथ विवाह किया। भगवान शिव के वरदान के कारण ही मंदोदरी का विवाह रावण से हुआ था। मंदोदरी ने भगवान शंकर से वरदान मांगा था कि उनका पति धरती पर सबसे विद्वान ओर शक्तिशाली हो। मंदोदरी ने श्री बिल्वेश्वर नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना की थी, यह मंदिर मेरठ में है जहां रावण और मंदोदरी की मुलाकात हुई थी। रावण की कई रानियां थी, लेकिन लंका की रानी सिर्फ मंदोदरी को ही माना जाता था। पंच कन्याओं में से एक मंदोदरी को चिर कुमारी के नाम से भी जाना जाता है। अपने पति रावण के मनोरंजन के लिए  मंदोदरी ने ही शतरंज के खेल का प्रारंभ किया था।

4) कुंती

द्वापर युग में कुंती ने दुर्वासा ऋषि की सेवा करके उन्हें प्रसन्न किया था। दुर्वासा जी ने उनके भविष्य को देखते हुये उन्हें किसी भी देवता का ध्यान करके उसे आहूत करने का मंत्र दिया था जिससे उन्हें संतान की प्राप्ति हो। पांडु जन्म से ही पांडु रोग से पीड़ित थे । इसीलिए कुंती ने धर्मराज, देवराज इन्द्र और पवन देव के द्वारा संतान प्राप्त की । माद्री ने कुंती के सहयोग से अश्विनी कुमारों से नकुल और सहदेव पाये ।

5) द्रौपदी

पंचकन्या में द्रौपदी को तो स्वयं काली का अवतार माना जाता है। वह महाराज द्रुपद के द्वारा यज्ञ से उत्पन्ं हुई याज्ञसेनी थी । स्वयंवर में स्वयं उसे अर्जुन ने जीता था पर कुंती के द्वारा यह कहने पर कि जो भी मिला है आपस में बांट लो उसे पांचों पांडवों से विवाह करना पड़ा । इस तरह अन्य नारियों से भिन्न इनकी कथायें हैं। जिनमें इतनी शक्ति थी कि वह कुछ भी कर सकती थी पर मर्यादा में रह कर परिस्थितियों वश उन्हें वह सब करना पड़ा जिसके लिये वह दोषी नहीं थी । इसीलिए उन्हें दिव्य कन्या कहा जाता है । इसीलिये उन्हें प्रात: स्मरणीय, सभी प्रकार के पापों को नाश करने वाली दिव्य कन्यायें कह कर सम्मानित किया जाता है ।
उषा सक्सेना-

You may also like

Leave a Comment

About Us

We’re a media company. We promise to tell you what’s new in the parts of modern life that matter. Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo. Sed consequat, leo eget bibendum sodales, augue velit.

@2022 – All Right Reserved. Designed and Developed byu00a0PenciDesign