Shivdeep Lande Hind Sena : भारत की राजनीति में चुनावी मौसम के समय कई छोटी पार्टियां और प्रत्याशी बरसाती मेंढक की तरह निकल आते हैं। ऐसे तो वहम पैदा करने को, नाम भर के लिए राजनीतिक दलों को खड़ा करना बड़ी पार्टियों की सियासत का हिस्सा भी रहा है, लेकिन पिछले 10 सालों में इसका स्वरूप बहुत ही बदल गया है। आप उत्तर प्रदेश,हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में कई उदाहरण देख चुके हैं। बात जब बिहार की आती है, तो यहां राजनीतिक गठजोड़, उठा पटक और तिकड़मबाजी चरम पर होती है। कई बार केवल वोट काटने या राजनीतिक समीकरण को प्रभावित करने के लिए यह दल रातों-रात उभरते हैं या उभार दिए जाते हैं और फिर गायब भी हो जाते हैं। कई लोग ऐसे मौके पर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए चुनाव से ऐन पहले इस तरह के राजनीतिक कदम का ऐलान करते हैं।
देश में लोकतंत्र है, और हर किसी को चुनाव में भाग लेने की स्वतंत्रता है। खैर, यहां हम बात कर रहे हैं बिहार पॉलिटिक्स में एक धमाकेदार एंट्री की। बिहार के चर्चित पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे ने पटना में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। अपनी इस पार्टी का नाम उन्होंने “हिंद सेना” रखा है। अपनी पार्टी के जरिए वह युवाओं के सपने पूरे करने की बात कर रहे हैं।
बदलाव के लिए बनाई हिंद सेना Shivdeep Lande Hind Sena
शिवदीप लांडे लोकतांत्रिक माध्यम से युवाओं को बिहार की दशा और दिशा सुधारने के लिए जनप्रतिनिधियों के तौर पर सामने लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा “अपनी पार्टी के माध्यम से मैं उन जवानों की तलाश में हूं जो सेना में काम कर चुके हैं, वह इस पार्टी के कार्यकर्ता बने। वह देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए लड़ते हैं अब बिहार के हक के लिए भी लड़ेंगे।” अपनी इस पार्टी को इसीलिए उन्होंने हिंद सेना का नाम दिया है। पार्टी बनाने के साथ ही पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे ने राजनीति में कदम रख दिया है। राजनीतिक दल बनाने की मंशा के पीछे शिवदीप लांडे ने बताया कि “मैं समाज सेवा का काम भी कर सकता था लेकिन जो बदलाव में लाना चाहता हूं वे राजनीतिक प्रतिबद्धता से ही हो पाएगा इसलिए मैंने यहां राजनीतिक दल बनाया है। क्योंकि मैं जहां भी जाता हूं वहां युवा अपनी समस्याओं का अंबार लगा देते हैं। उन युवाओं की आंखों में बदलाव की आस दिखती है।
पर यह बदलाव लाएगा कौन? कैसे आएगा बदलाव ? समाज सेवा भी एक जरिया हो सकता था लेकिन सारे विश्लेषण के बाद मैंने पाया कि लोकतंत्र ने जो यह खूबसूरत हथियार सबको दिया है उसके माध्यम से ही बदलाव लाया जा सकता है। यह युवा जो चाहते हैं वह खुद राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर और जनता के प्रतिनिधि बनकर पूरा कर सकते हैं। जवान इस देश की लड़ाई लड़ सकता है तो वह बिहार के हक के लिए भी लड़ सकता है। पुलिस का जवान अपराध के खिलाफ लड़ता है, सेना का जवान बॉर्डर की सुरक्षा के लिए लड़ता है। इस तरह हिंद सेना का कार्यकर्ता बिहार के हक के लिए लड़ेगा।
कौन है शिवदीप लांडे
शिवदीप लांडे 2006 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। उन्होंने निजी कारणों से 2024 में इस्तीफा दे दिया था, इस्तीफा देने से पहले वह केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र पुलिस में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस- एंटी नारकोटिक्स सेल, क्राइम ब्रांच, मुंबई के रूप में सेवारत थे । इससे पहले, उन्होंने बिहार के पटना, अररिया, पूर्णिया और मुंगेर जिलों में आरक्षी अधीक्षक के रूप में काम किया है। पटना (मध्य क्षेत्र) के एसपी के रूप में वे काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने अपने कैरियर में कई अपराधियों को गिरफ्तार किया और सख्त कार्रवाई की। अपराधियों पर लगाम कसने के कारण उन्हें बिहार का सिंघम भी कहा जाने लगा था।
क्या होगा भविष्य ?
शिवदीप लांडे ने बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की बात कही है, हालांकि वह खुद कहां से चुनाव लड़ेंगे इसकी घोषणा उन्होंने अभी तक नहीं की है। गौर तलब है कि शिवदीप लांडे मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। भले ही उन्होंने बिहार में लंबे समय तक नौकरी की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि बिहार का मूल निवासी ना होना उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के आड़े आ सकता है। बिहार जैसे राज्य में जहां जातिगत समीकरण और जाति सबसे बड़ा फैक्टर है वहां पर एक गैर बिहारी को क्या जनता स्वीकार करेगी इस पर बड़ा प्रश्न चिन्ह है।
जन संपर्क करने के लिए राज्य का भ्रमण
लोगों से संपर्क करने के लिए शिवदीप लांडे ने रन फॉर स्टेट कैंपेन भी शुरू किया है,जिसके जरिए वह युवाओं से मुलाकात कर रहे हैं। आपको बता दें शिवदीप लांडे अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर अब पूरी तरह राजनीति में रम गए हैं और 2025 के चुनाव में मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार है। लेकिन विचार करने योग्य बात यह भी है कि बिहार की राजनीति में युवा नेता और कई दल खुद को युवाओं का मसीहा और मददगार बता रहे हैं। कुछ समय पहले अपनी पार्टी बनाने वाले प्रशांत किशोर भी जन सुराज के माध्यम से युवाओं की दिशा और दशा बदलने की बात कर रहे हैं। बिहार में छात्र आंदोलन में कूदते भी नजर आए थे। पुष्पम प्रिया चौधरी भी अपनी “द प्लूरल्स पार्टी” के जरिए युवाओं के सपनों की बात कर रही हैं।
फिलहाल अभी तक उन्हें वह राजनीतिक माइलेज नहीं मिल पाया है। राजद के तेजस्वी यादव भी युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता माने जाते हैं और मुख्यमंत्री रहते हुए युवाओं को रोजगार देने की मुहिम चलाकर युवाओं के बीच जगह बनाने की कोशिश भी कर चुके हैं। लोजपा (रामविलास पासवान) के चिराग पासवान भी युवा ही हैं और एनडीए की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी हैं, वे भी बिहार के युवाओं को साथ लेकर चलने का सपना रखते ही होंगे। इतना ही नहीं हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने भी जिस तरह बिहार कांग्रेस में युवा नेतृत्व राजेश राम और कन्हैया कुमार इत्यादि को मौका दिया है और राहुल गांधी भी अपने बिहार दौरे में युवाओं की जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। तो हर तरफ युवाओं की ही बातें हो रही है और इसमें हम एक नाम और शामिल करना चाहेंगे जो है पप्पू यादव का। पप्पू यादव भी अपनी जन अधिकार पार्टी के जरिए युवाओं के हक की बात करते रहे हैं।Shivdeep Lande Hind Sena
युवाओं के हक की बात या सपनों का लॉलीपॉप
तो अब ऐसे में बिहारी युवाओं के लिए उनके हक की बात करने वाले नेताओं की तो कमी नजर नहीं आती। फिर भी बिहार का युवा अक्सर नौकरी और भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा के लिए सड़कों पर आंदोलन करता ही नजर आता है। नौकरी के लिए वह राज्य से पलायन के लिए मजबूर हैं। अपनी छोटे-छोटे सपनों को पूरा करने के लिए बिहार के युवा कठिन संघर्ष करते नजर आते हैं। अब चुनाव में फिर युवाओं का वोट और उनके सपने पूरे करने के लिए हर दल लालायित दिख रहा है। अब यह तो राज्य के युवा वोटरों को ही तय करना है, कि कौन पूरी ईमानदारी से उनके साथ है और कौन अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए उनकी बात भर कर रहा है।