Monday, March 2, 2026
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नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर जताया बांग्लादेश ने भरोसा, देश से मिटाया था गरीबी का दंश

by Jai P Swarn
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Bangladesh

Bangladesh: पिछले दिनों भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में चल रहे छात्र आंदोलन के हिंसक रूप लेने के कारण वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा । किसी देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसी घटनाएं कम ही होती हैं जब लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के विरुद्ध लोगों का गुस्सा इतना तीव्र हो जाता है कि सरकार के मुखिया को अपना ही देश छोड़कर भाग जाना पड़ता है। बांग्लादेश में उग्र छात्र आंदोलन के हिंसक रूप लेने के कारण वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देकर अपने पड़ोसी मुल्क भारत में आकर पनाह लेनी पड़ी। हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद वहां की सेना ने शासन की कमान अपने हाथों में ले ली और बांग्लादेश के राष्ट्रपति से मिलकर अंतरिम सरकार बनाने की पेशकश की। अंतरिम सरकार बनाने के लिए सेना ने शेख हसीना की पार्टी को छोड़कर बाकी सभी विपक्षी दलों से सहयोग मांगा था। लेकिन बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र संगठनों ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाने की मांग की। कौन है मोहम्मद यूनुस जिन्हें अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा गया है

कौन है मोहम्मद यूनुस

84 वर्षीय अर्थशास्त्री,नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का प्रमुख सलाहकार नियुक्त किया गया है और उनकी अगुवाई में 8 अगस्त को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शपथ ली है । मोहम्मद यूनुस का जन्म 28 जून 1940 को बांग्लादेश चटगांव के बथुआ गांव में हुआ था। उस समय चटगांव भारत की बंगाल प्रेसीडेंसी में हुआ करता था। उनके पिता एक जौहरी थे। उनका बचपन गांव में ही बीता। चटगांव में कॉलेजिएट स्कूल से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की और 1957 में ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए और एम ए की परीक्षा पास की । उन्होंने चटगांव में कॉलेज में अर्थशास्त्र व्याख्याता के रूप में काम करते हुए एक पैकेजिंग फैक्ट्री स्थापित की। कुछ साल अमेरिका की मिडिल टेनेंसी स्टेट यूनिवर्सिटी में भी अध्यापन कार्य किया।

बांग्लादेश में गरीबी दूर करने की लड़ी जंग

1971 में बांग्लादेश बनने के बाद वे स्वदेश लौट आए और बांग्लादेश के योजना आयोग में नियुक्त हो गए। लेकिन 1974 का भीषण अकाल देखने के बाद उन्होंने देश से भूख और गरीबी मिटाने का संकल्प लिया और शोध परियोजना के रूप में एक ग्रामीण आर्थिक कार्यक्रम की स्थापना की। उन्होंने बांग्लादेश में गांवो का दौरा शुरू किया और पाया कि गरीब लोग कर्ज के मकड़जाल जाल में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं और बैंक गरीबों को उचित ब्याज पर छोटे ऋण देने में रुचि नहीं रखते। यूनुस ने गरीब ग्रामीणों के लिए माइक्रो क्रेडिट व्यवसाय मॉडल शुरू किया और जोबरा गांव की 42 महिलाओं को 27 डॉलर उधार दिए जिससे महिलाओं ने अपना काम शुरू कर लाभ कमाया। यूनुस ने अपनी संस्था के माध्यम से बैंकों से ऋण प्राप्त करना शुरू किया। 1982 तक संस्था के 28000 सदस्य बन गए और अक्टूबर 1983 को इस पायलट प्रोजेक्ट ने गरीब बांग्लादेशियों के लिए एक पूर्ण बैंक के रूप में काम करना शुरू किया इसका नाम रखा गया ग्रामीण बैंक या ग्राम बैंक। इन बैंकों से लोन ले कर बांग्लादेश के गरीब नागरिकों ने अपने परिश्रम से कामयाबी का सिलसिला शुरू किया। 2007 तक लगभग 80 लाख लोगों को 6.38 बिलियन डॉलर उधार दिए गए । 90 के दशक तक ग्रामीणों ने समूह बनाकर अलग-अलग संगठन विकसित किए जिनमें ग्रामीण ट्रस्ट और ग्रामीण फंड जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल थी जो ग्रामीण सॉफ्टवेयर लिमिटेड, ग्रामीण साइबर नेट लिमिटेड और ग्रामीण नेटवर्क लिमिटेड जैसी इक्विटी परियोजनाएं चलाती हैं।

मोहम्मद यूनुस को मिला नोबेल पुरस्कार

बांग्लादेश के ग्रामीण माइक्रो फाइनेंस मॉडल की सफलता ने भारत समेत विकासशील देशों के अलावा अमेरिका जैसे विकसित देश को भी प्रेरित किया। उनके काम को देखकर 1984 में उन्हें रैमन मैगसेसे पुरस्कार और 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया ।

जब विवादों में घिरे यूनुस

यूनुस ने साल 2007 में नागेरिक शक्ति (नागरिकों की शक्ति) नाम से राजनीतिक संगठन भी बनाया पर जल्द ही उनका राजनीति से मोह भंग हो गया और यह प्रयास छोड़ दिया। फिर भी वे सार्वजनिक तौर पर सरकार के कार्यों की आलोचना करते रहे और सरकार की आंख की किरकिरी बन गए। साल 2008 में शेख हसीना सरकार ने यूनुस पर अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों का आरोप लगाकर जांच शुरू कर दी। 2011 में शेख हसीना की सरकार ने एक बार फिर ग्रामीण बैंक की समीक्षा की घोषणा की । यूनुस को ग्रामीण बैंकों से दूर रहने को कहा गया, लेकिन हजारों लोगों ने यूनुस को समर्थन देते हुए मानव श्रृंखला बनाकर उनके साथ दिया और कहा कि यह सब राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है । यूनुस को यूएन हाई कमिशन फॉर ह्यूमन राइट्स से भी समर्थन मिला। लेकिन बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 की जनवरी में यूनुस समेत ग्रामीण बैंक के तीन कर्मचारियों को श्रम कानून के उल्लंघन के मामले में 6 महीने की सजा सुनाई। फिलहाल वे जमानत पर थे । बांग्लादेश में छात्रों के आंदोलन के बाद शेख हसीना के पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ने के बाद आंदोलनकारी छात्र मोहम्मद यूनुस को ही अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाए जाने की मांग कर रहे थे। देश के आर्थिक उत्थान के लिए उनके कार्यों को देखते हुए छात्र उनकी अगुवाई में ही यह सरकार चाहते थे। 6 अगस्त 2024 को संसद भंग करने के बाद बांग्लादेशी राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने छात्रों की मांग मानते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में मोहम्मद यूनुस को नामित किया।

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