Friday, April 10, 2026
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Depression सर्दियों में होने वाले डिप्रेशन को कैसे करें दूर

क्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर ?

by KhabarDesk
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Depression

Depression : सर्दियो का मौसम किसी के लिये मजा, तो किसी के लिये सजा बन जाता है । जहां एक ओर तीखी ठंड के तेवर बढ़ जाते हैं, वही दूसरी तरफ सूर्य देवता के दर्शन भी बड़ी मुश्किल से होते हैं । सूर्य की किरणों का असर हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता हैं । ऐसे में सूर्य के दर्शन ना होने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है । जहां एक तरफ रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है तो दूसरी तरफ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता हैं । सर्दियों के मौसम में कम रोशनी के कारण कुछ लोगो को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (seasonal affective disorder) की समस्या का सामना करना पड़ता है । जिसे आम बोलचाल की भाषा मे SAD कहतें हैं । ये डिसऑर्डर सर्दियों में होता है । आइये जानते हैं कि सर्दियों में मेंटल हेल्थ इशूज़ क्यों होते हैं ।

सर्दियों में होने वाला डिप्रेशन:

बदलते मौसम का प्रभाव हमारे शरीर के साथ-साथ हमारे मन पर भी पड़ता है । बदलते मौसम के साथ हमारे मन और मस्तिष्क के हार्मोन भी बदलते हैं। जिस कारण व्यक्ति में आलस, तनाव और चिड़चिड़ापन के लक्षण नजर आने लगते हैं । यह असर ठंड के शुरुआती महीने से दिखाई देने लगते हैं। ठंड के मौसम में ज्यादातर लोग लो फील करते है । ऐसा सूर्य की कम रोशनी के कारण होता हैं । इसे विंटर डिप्रेशन भी कहा जाता है । इसके लक्षण भी आमतौर पर होने वाले डिप्रेशन से मिलते जुलते हैं । सर्दियों मे हमारी नींद का पैटर्न बदल जाता है । जिसकी वजह से हमारा लाईफ स्टाईल डिस्टर्ब हो जाता है और हमारे अंदर चिड़चिड़ापन पैदा होता हैं । सूर्य की रोशनी से मिलने वाला विटामिन डी हमे पर्याप्त मात्रा में नही मिल पाता है । जो हमारे अंदर हैप्पी हार्मोन रिलीज करता है ।

सूर्य की रोशनी का हमारे मन से है गहरा नाता।

डॉक्टरों का भी कहना है : सूरज का मन से है गहरा नाता:

डॉक्टरों का मानना है कि डिप्रेशन उन देशों में ज्यादा देखने को मिलता है ,जहां  सूर्य की रोशनी कम और सर्दियां ज्यादा दिनों तक रहती हैं । सर्दियों में डिप्रेशन इसलिए होता है क्यों कि सूर्य की रोशनी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती है। आधुनिक जीवन के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है,लोग घरों में ज्यादा बंद रह जाते हैं । सूर्य की रोशनी पर्याप्त मात्रा में ना मिलने के कारण डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा देखने को मिलते हैं । यह सर्दियों में  सूर्य की रोशनी कम होने के कारण होता है। आसमान में छाने वाले काले बादल दिमाग में बनने वाले सेराटोनिन नामक केमिकल कम कर देते हैं । जिसकी वजह से हमारा मूड डिस्टर्ब होता हैं, और मूड स्विंग्स होते हैं । कुछ लोगो पर इसका असर ज्यादा होता हैं तो कुछ लोगो पर बिल्कुल नही होता हैं ।

सर्दियों में होने वाले डिप्रेशन के लक्षण:

सर्दियों में होने वाले डिप्रेशन के कारण व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, आलस, तनाव जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। यह लक्षण सर्दियों की शुरुआत से लेकर सर्दियां खत्म होने तक रहते हैं । ज्यादातर लोगों को बेचैनी, अकेलापन, काम में मन ना लगना की अधिक शिकायत होती है । मन में नकारात्मक ख्याल आना, सुस्ती महसूस होना, आत्मविश्वास में कमी होना । यह सभी मौसम के अनुसार होने वाले डिप्रेशन के लक्षण है।

सर्दियों में होने वाले डिप्रेशन से कैसे बचें:

आमतौर पर सर्दी में होने वाले डिप्रेशन से बचने के लिए विटामिन डी की कमी को पूरा करना सबसे ज्यादा आवश्यक है । विटामिन डी हमारे शरीर में सेरोटोनिन नामक केमिकल को बढ़ाता है । इसे हैप्पी हार्मोन नाम से भी जाना जाता है । यह व्यक्ति के मूड को भी संतुलित रखता है। ब्रेन के लिए न्यूरोट्रांसमीटर की तरह काम करता है और हमारे मूड को सीधे इफेक्ट करता है । इसके लिए आप सूर्य की रोशनी में रोजाना 15 से 20 मिनट बैठे । इसके साथ-साथ आप डॉक्टर की सलाह अनुसार विटामिन डी के सप्लीमेंट्स का भी उपयोग कर सकते हैं । आपको अपनी रोज की दिनचर्या में योग और व्यायाम को भी शामिल करना चाहिए । अपने आसपास की सोशल एक्टिविटी में भी शामिल होना चाहिए । अपने परिवार के सदस्यों के साथ बैठना  बात करना चाहिए।

खाने पीने की चीजों से कम होता हैं डिप्रेशन :

सर्दियों के मौसम मे हमे फूड क्रेविंग भी बहुत होती हैं । जंक फूड खाने से हमारी शरीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता हैं । रिसर्च के अनुसार पता चला हैं कि फल सब्जी खाने वालो का मानसिक स्वास्थ्य जंक फूड खाने वालो के मुकाबले ज्यादा बेहतर होता हैं । हमे अपनी डेली डाइट मे साबुत अनाज, हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स, नट्स,हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध और अंडो को जरुर शामिल करना चाहिए ।

इसके साथ हमे अच्छा संगीत सुनना चाहिये,किताबे पढ़ने की आदत डालनी चाहिए । रोजाना प्राणायाम और योगा करना चाहिये । सुबह टहलने से भी हमारे मूड पर बेहतर असर पड़ता हैं । हमें खुद भी एक कोशिश करनी चाहिए कि अपने मन में नकारात्मक विचारों को जगह ना दें

बबीता आर्या।

Disclaimer: ये लेख  केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है, यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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