Saturday, April 18, 2026
Home धर्म कर्म हनुमान जयंती वर्ष में दो बार क्यों मनायी जाती है, जाने हनुमान जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त

हनुमान जयंती वर्ष में दो बार क्यों मनायी जाती है, जाने हनुमान जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त

Hanuman Jayanti 2025

by KhabarDesk
0 comment

Hanuman Jayanti 2025  :  वीर बजरंगी पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म उत्सव साल में दो बार मनाया जाता है। उनका पहला जन्मोत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है और वही दूसरा जन्मोत्सव कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। जिस दिन उन्हें अमरता का वरदान मिला था। भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को संकट मोचन भी कहा जाता है। यह व्यक्ति के सभी दुख दर्द को दूर करते हैं। इस वर्ष चैत्र माह के हनुमान उत्सव का पर्व 12 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा। क्या आप जानते हैं कि वर्ष में दो बार जन्मोत्सव का पर्व क्यों मनाया जाता है। चलिए आज इसके बारे में जानकारी देते हैं।

कलयुग के देवता हैं हनुमान:

सनातन धर्म में कलयुग के देवता हनुमान जी को माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज भी पवन पुत्र हनुमान इस धरती पर उपस्थित हैं और वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। माता अंजनी के पुत्र पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म उत्सव वर्ष में दो बार मनाने की परंपरा है। इनका पहला जन्मोत्सव चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वहीं अगर उनके दूसरे जन्मउत्सव की बात की जाए तो वह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है । सभी भक्तगण उनके दोनों ही जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम के साथ पूरे विधि विधान से मनाते हैं। इस वर्ष चैत्र माह की हनुमान जयंती का पर्व 12 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार:

पुरानी मान्यता के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को स्वाति नक्षत्र में हुआ था। वही दूसरी तरफ चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाए जाने वाली हनुमान जयंती के पीछे की पौराणिक मान्यताएं कुछ और कहती है। एक तिथि को हनुमान जी के विजय अभिनंदन के रूप में मनाया जाता है। जबकि दूसरी तिथि को हुई हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

जन्म उत्सव की कथानुसार:

ऐसा कहा जाता है कि जब बाल रूप में हनुमान जी ने सूर्य को फल समझ कर खाने की कोशिश की थी। तो देवराज इंद्र ने उन्हें रोकने के लिए उन पर प्रहार किया था। जिसकी वजह से बाल हनुमान जी मूर्छित हो गए थे। हनुमान जी की माता अंजनी और वायु देव अपने पुत्र हनुमान को मूर्छित देखकर क्रोधित हो गए । क्रोध मे आकर पवन देव ने ब्रह्मांड से वायु का प्रभाव रोक दिया। जिसकी वजह से पूरे ब्रह्मांड पर संकट आन पड़ा और चारों ओर हाहाकार मच गया था । देवताओं के प्रार्थना करने के बाद ब्रह्मा जी ने हनुमान जी को दूसरा जीवन दिया। इसके साथ ही सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां हनुमान जी को दी थी। वह दिन चैत्र माह की पूर्णिमा की तिथि थी।  इसी कारण चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान हनुमान जी को नया जीवन प्राप्त हुआ था।

दूसरे जन्म उत्सव की कहानी:

वहीं अगर दूसरी हनुमान जयंती की बात की जाए। तो वाल्मीकि की रामायण के अनुसार हनुमान जी माता सीता से जब मिलने के लिए गए थे, तब माता सीता ने हनुमान जी के भक्ति और समर्पण की भावना को देखकर उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान दिया था । वह तिथि कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि का दिन था। इस दिन को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। हनुमान जी को शिव जी का 11वां रुद्र अवतार भी माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने से हमें राहु और शनि से जनित दोष से भी मुक्ति मिलती है।

12 अप्रैल हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त:

वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2025 को प्रातः 3:20 पर होगी इसके साथ ही अगले दिन 13 अप्रैल 2025 को सुबह 5:52 पर इसका समापन होगा इसलिए हनुमान जयंती का पर्व 12 अप्रैल को मनाया जाएगा

हनुमान जयंती पर पूजन करने के शुभ मुहूर्त कि यदि बात की जाए तो पहला शुभ मुहूर्त 12 अप्रैल को सुबह 7:34 से लेकर सुबह 9:12 तक रहेगा वहीं दूसरा शुभ मुहूर्त शाम को 6:46 से लेकर रहा था 8:08 तक रहेगा।

बबीता आर्या

You may also like

Leave a Comment

About Us

We’re a media company. We promise to tell you what’s new in the parts of modern life that matter. Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo. Sed consequat, leo eget bibendum sodales, augue velit.

@2022 – All Right Reserved. Designed and Developed byu00a0PenciDesign