Friday, April 17, 2026
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ऑप्शन ट्रेडिंग में खतरे कम करने के 7 नियम जान लीजिए

by Jai P Swarn
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Options Trading

Option Trading : शेयर बाजार में कम पैसे लगाकर बड़ा मुनाफा कमाने के लिए ट्रेडर्स, ऑप्शन ट्रेडिंग को चुनते हैं ।

क्या है ऑप्शन ट्रेडिंग समझें आसान भाषा में

ऑप्शन ट्रेडिंग का माहिर कोई व्यक्ति शेयर बाजार में अच्छा मुनाफा कमा सकता है । लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है । सेबी का मानना है कि ऑप्शन ट्रेडिंग में 10 में से 9 ट्रेडर्स को नुकसान होता है। लेकिन फिर भी ऑप्शन ट्रेडिंग में वॉल्यूम तेजी से बड़ा है। यानी अधिक मुनाफे का आकर्षण ही ऐसा है जो ट्रेडर्स को ऑप्शन ट्रेडिंग की तरफ खींचता है। आंकड़ों की बात करें तो BSE और NSE पर रोजाना वायदा कारोबार का ट्रेडिंग वॉल्यूम 432 लाख करोड रुपए का है । इससे आपको अनुमान लग ही गया होगा कि वायदा कारोबार में कितना भारी भरकम ट्रेड होता है।

क्या होती है ऑप्शन ट्रेडिंग

ऑप्शन ट्रेडिंग में इसके नाम के मुताबिक आपको एक ऑप्शन यानी विकल्प चुनना होता है। यह विकल्प होता है शेयर कॉन्ट्रैक्ट या Index कॉन्ट्रैक्ट खरीदने या बेचने का ।

ऑप्शन दो प्रकार के होते हैं

  • कॉल ऑप्शन (तेजी पर दांव )
  • पुट ऑप्शन (मंदी पर दांव )

अगर आपको लगता है कि कोई शेयर चढ़ेगा तो उसकी कॉल ऑप्शन खरीद सकते हैं या पुट ऑप्शन बेच सकते हैं। अगर आपको लगता है शेयर या इंडेक्स गिरेगा तो उसके पुट ऑप्शन खरीद सकते हैं या कॉल ऑप्शन बेच सकते हैं ।

ऑप्शन में कैसे बनेगा मुनाफा

ऑप्शन ट्रेडिंग में ट्रेडर्स कम पैसा लगाकर ज्यादा मुनाफा बनाते हैं।

ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करते हैं

अगर आपको किसी शेयर या इंडेक्स का ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदना है तो इसके लिए आपको प्रीमियम देना होगा । इसे ऐसे समझिए निफ्टी की 22600 की कॉल का प्रीमियम 48 रुपए है,लॉट साइज 25 का है तो ऑप्शन खरीदने के लिए आपको 48 × 25 = 1200 रूपये चुकाने होंगे। एक्सपायरी पर अगर निफ्टी 22600 से नीचे चला गया तो आपको अधिकतम 1200 का ही नुकसान होगा और अगर निफ्टी 22700 पर एक्सपायर हुआ तो 48 रुपए का प्रीमियम बढ़कर ₹100 का हो जाएगा और इससे ज्यादा तेजी पर मुनाफा बढ़ता जाएगा । लेकिन आपको यह भी बता दे की ऑप्शन सेलिंग पर मार्जिन ज्यादा लगता है और अगर आपने कॉल बेच रखी है तो बाजार जितना ऊपर जाएगा उसी अनुपात में आपका नुकसान बढ़ता जाएगा।

रिस्की होता है ऑप्शन सेलिंग

ऑप्शन सेलिंग रिस्की होता है लेकिन समय के साथ ऑप्शन के प्रीमियम घटते बढ़ते हैं तो संस्थागत निवेशक और HNI आमतौर पर ऑप्शन सेलिंग करते हैं । कॉल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की कीमत शेयर के भाव से लिंक होती है शेयर का भाव चढ़ता है तो कॉल ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट का भाव भी बढ़ता है अगर शेयर का भाव गिरता है तो कॉल ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट का भाव भी गिरता है । वहीं दूसरी तरफ Put Option में अगर शेयर का भाव गिरता है तो पुट ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट का भाव बढ़ता है और अगर शेयर का भाव चढ़ता है तो पुट ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट का भाव गिरता है।

क्या बरतें सावधानी

ऑप्शन ट्रेड उन निवेशकों को नहीं करना चाहिए जिन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है सेबी भी ऑप्शन ट्रेड पर वार्निंग दे चुका है । और दिग्गज निवेशक भी ऑप्शन ट्रेडिंग से दूर रहने की सलाह देते हैं। वार्निंग के बावजूद भी अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान हमेशा रखें ।

ऑप्शन ट्रेडिंग के 7 नियम

1 बिना सीखे ऑप्शन ट्रेडिंग कभी ना करें

मतलब शेयर मार्केट को सट्टा बाजार समझकर पैसा नहीं लगायें, पहले ऑप्शन ट्रेडिंग की बारीकियां सीखें तभी इसमें पैसा लगाए ।

2 रिस्क मैनेजमेंट

ऑप्शन ट्रेडिंग में पूरा पैसा कभी एक साथ ना लगायें । उदाहरण के तौर पर अगर आपके पास ₹100 हैं तो ₹10 ही ऑप्शन ट्रेडिंग पर लगायें ऐसा करेंगे तो आपका रिस्क मैनेज रहेगा।

3 स्टॉप लॉस ऑर्डर सिस्टम में लगायें

कई बार ऐसा होता है आप ट्रेड ले लेते हैं और सिस्टम में स्टॉप लॉस नहीं लगाते हैं।ऑप्शन ट्रेडिंग में ऐसा बिल्कुल ना करें क्योंकि अगर स्टॉप लॉस नहीं होगा और आपका अनुमान गलत चला गया तो नुकसान बढ़ सकता है।

4 इवेंट्स पर ट्रेड से बचें

किसी भी बड़े इवेंट पर ट्रेड करने से बचना चाहिए । देखा गया है कि बड़े इवेंट्स जैसे कि चुनाव या कंपनियों के नतीजे का वक्त जैसे इवेंट पर बाजार में उतार-चढ़ाव की बड़ी गुंजाइश बनी रहती है ऐसी स्थिति में ऑप्शन ट्रेड नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसे में चार्ट्स और ऑप्शन रणनीति भी फेल हो जाती है । बड़े इवेंट्स पर केवल मंजे हुए ट्रेडर्स ही जो पूरी तरह से जोखिम को समझते हैं अलग-अलग ऑप्शन रणनीति बनाते हैं। अगर आप नए हैं तो इवेंट्स पर ऑप्शन ट्रेडिंग से बचना चाहिए ।

5 लॉस कवर करने के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग ना करें

ऑप्शन ट्रेडिंग में अगर नुकसान हो जाए तो आपको ट्रेडिंग बंद कर देनी चाहिए । नुकसान कम करने के लिए बार-बार ट्रेड नहीं लेना चाहिए।

6 सही स्ट्राइक प्राइस चुने

ऑप्शन प्राइस का मूवमेंट इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने कौन सी स्ट्राइक प्राइस में ट्रेड लिया है अगर आप ऑप्शन बायर हैं और आपने Out Of The Money या At The Money स्ट्राइक प्राइस में ट्रेड लिया है तो टाइम के साथ-साथ आपके ऑप्शन प्रीमियम का decay होगा जो आपके अनुकूल नहीं होगा। ऑप्शन ट्रेडिंग में मंजे हुए ट्रेडर्स अलग-अलग स्ट्राइक के साथ रणनीति बनाते हैं जिससे जोखिम कम हो जाता है ।

7 इंडेक्स के मूव को समझे

बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग अलग-अलग इंडेक्स में होती है , जैसे निफ़्टी Nifty, बैंक निफ़्टी Bank Nifty, सेंसेक्स Sensex, स्मॉल कैप Small Cap इत्यादि । आप जिस भी इंडेक्स में ऑप्शन ट्रेडिंग कर रहे हैं उसके मूवमेंट को पहले कुछ दिन समझे । अगर आप बैंक निफ्टी और फिन निफ्टी जैसे वोलेटाइल इंडेक्स में ट्रेड करेंगे तो आप इनकी वोलैटिलिटी का शिकार भी हो सकते हैं। इसलिए आप निफ़्टी इंडेक्स से शुरुआत कर सकते हैं । अगर आप इन बातों का ख्याल रखेंगे तो ऑप्शन ट्रेड में बड़े नुकसान से बच सकते हैं । लेकिन फिर भी आमतौर पर ऑप्शन ट्रेडिंग की सलाह नहीं दी जाती । बाजार में बड़ा पैसा, लंबी अवधि के लिए निवेश करने पर ही बनता देखा गया है। कई दिग्गज निवेशको ने लंबी अवधि में अच्छे शेयरों में निवेश करके ही पैसा बनाया है ।

Disclaimer : शेयर बाजार वित्तीय जोखिमों के अधीन है । अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेकर ही किसी प्रकार का ट्रेड या निवेश करें।

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