Sofiya Qureshi & Vyomika Singh : ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद सभी देशवासी सेना की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं। सेना की इस कार्रवाई की जानकारी देने के लिए विदेश सचिव विक्रम मिश्री, शीर्ष सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने सरकार की ओर से मीडिया को ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी दी। मीडिया को जानकारी देते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम हमले के पीड़ितों को न्याय दिलवाने वाला ऑपरेशन बताया। पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई ये दोनों भारतीय महिलाएं कौन है ? आईए जानते हैं कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के बारे में ।
ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी :
पहलगाम में पर्यटकों पर 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने आतंक के आकओं को ठोस और निर्णायक जवाब देने के लिए नये एक्शन प्लान का फैसला लिया । इस आतंकी हमले के बाद से जम्मू कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 2,900 लोगों को हिरासत में भी लिया गया था । इसके बाद 6 मई को पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया गया। जिसे सेना के अधिकारियों ने “ऑपरेशन सिंदूर” का नाम दिया । ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देश को देने के लिए सेना ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह, इन दो महिला अफसरों को चुना।
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना के सिग्नल कोर की अधिकारी हैं। इन्होंने साल 2006 में कांगो के संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान में भी हिस्सा लिया था । कांगो अभियान में काम के दौरान उस समय दक्षिणी कमान के आर्मी कमांडर जनरल बिपिन रावत जो बाद में भारत के आर्मी चीफ और देश के पहले चीफ़ ऑफ डिफेंस बने, उन्होंने भी उनके काम की तारीफ की थी। उन्होंने सोफिया की तारीफ करते हुए कहा था “सेना में हम सामान अवसर और जिम्मेदारियां देने में यकीन करते हैं। सेना में महिला और पुरुष में कोई अंतर नहीं है, सोफिया को इस अभियान के लिए इसलिए नहीं चुना गया कि वह महिला थीं। बल्कि इसलिए चुना गया क्योंकि उनके पास काबिलियत और नेतृत्व देने की क्षमता मौजूद है और वह अपने कंधों पर इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह उठा रही हैं।” गुजरात की रहने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी ने बायोकेमेस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन तक शिक्षा हासिल की है। वहीं अगर विंग कमांडर व्योमिका सिंह की बात की जाए तो सितंबर 2017 में इन्होंने विंग कमांडर का पद संभाला था। सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की रात को एक से डेढ़ बजे तक पाकिस्तान में निशाना बनाए गए सभी ठिकानों के नाम और विवरण की जानकारी सरकार की ओर से दी।
विंग कमांडर व्योमिका सिंह:
विंग कमांडर व्योमिका सिंह हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उन्होंने साल 2004 में भारतीय वायु सेना में पदभार संभाला था। वायु सेना में भर्ती होने के लगभग 13 साल बाद व्योमिका सिंह को दिसंबर 2017 में विंग कमांडर का पद दिया गया था। विंग कमांडर व्योमिका सिंह के पास फाइटर हेलीकॉप्टर उड़ाने का एक शानदार अनुभव है। विंग कमांडर व्योमिका सिंह को चीता और चेतक जैसे लड़ाकू हेलीकॉप्टर उड़ाने में महारत हासिल है।
विंग कमांडर व्योमिका सिंह के पति भी भारतीय वायु सेना में पायलट है। व्योमिका सिंह जिनके नाम का ही अर्थ है “आकाश की बेटी” उन्होंने बताया कि जब वे कक्षा 6 में थी तभी से उनके मन में पायलट बनने का सपना था। वह पायलट बन कर आसमान में ऊंची उड़ान भरना चाहती थीं। विंग कमांडर व्योमिका सिंह के पास हजारों घंटे की उड़ान का अनुभव है। जिस समय उनका चयन वायु सेना में हुआ था उस समय बहुत कम ही महिलाएं एयरफोर्स में शामिल होती थीं। सन 2020 में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के रेस्क्यू ऑपरेशन को भी लीड किया था। वहां के नागरिकों को बचाने के लिए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी एक ऊंची उड़ान भरी थी।
कौन है कर्नल सोफिया कुरैशी:
कर्नल सोफिया कुरैशी गुजरात की रहने वाली है । कर्नल सोफिया कुरेशी भारतीय थल सेना में कर्नल के पद पर तैनात है । सोफिया कुरैशी सिग्नल कोर में है । कर्नल सोफिया कुरैशी 1999 में 17 साल की उम्र में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में शामिल हुई । जिस समय सोफिया कुरैशी सेवा में शामिल हुई थी उसे समय कारगिल का युद्ध चल रहा था। वे देश की एकमात्र महिला सैन्य अधिकारी है जिन्होंने मल्टीनेशनल सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व किया है। 2016 में 35 वर्ष की उम्र में लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उन्होंने 40 सदस्यीय कंटिजेंट का नेतृत्व किया। इस अभ्यास का नाम “फोर्स 18” था, जिसमें एसियान (ASEAN ) देशों के अलावा कई अन्य देश शामिल थे।
भारत की जमीन पर होने वाला यह उस समय का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास था। कर्नल सोफिया कुरैशी की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी सेना से जुड़ी हुई है। वह बताती है कि वह बचपन से सेना के माहौल से वाकिफ थी। वह एक फौजी के बच्चे के रूप में सेना की सभी गतिविधियों के बारे में जानकारी रखती थी। उनकी मां चाहती थी कि उनकी दोनों बेटियाँ सेना में शामिल हो । इसके बाद उन्होंने सेना में शामिल होने के लिए आवेदन किया और वह उसमें सलेक्ट हो गई। सोफिया के दादाजी भी सेना में ही कार्यरत थे । कर्नल सोफिया के पति सेना की मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री में कार्यरत है।
कर्नल सोफिया की मां का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर की तहत उनकी बेटी ने अपनी बहनों और माताओं के सिंदूर का बदला लिया है। उनके माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी सोफिया अपने दादा के पद चिन्हो पर चले । सोफिया बचपन से ही चाहती थी कि वह बड़ी होकर सेना में शामिल होकर भारत की सेवा करें।
बबीता आर्या