Kartik Snan pachnada bundelkhand : बुंदेलखंड में स्थित पचनदा अपने आप में अद्भुत और अद्वितीय है, कार्तिक पूर्णिमा पर इसमें स्नान दान का अपना महत्व । इस समय यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है।
पांच नदियों का संगम है पचनदा
इतिहास के पन्नों में सदा से उपेक्षित बुंदेलखंड की अंतिम सरहद पचनदा अर्थात वह पवित्र स्थान जहां पांच नदियों का संगम एक साथ होता हो। दो नदियों का संगम प्रयाग कहलाता है और तीन नदियों का संगम त्रिवेणी प्रयागराज। जब की विश्व में किसी भी स्थान पर पांच नदियों के संगम का वर्णन नही मिलता तो यह है नजारा आप बुंदेलखंड में देख सकते हैं। यह बुंदेलखंड के अंतिम छोर का वह हिस्सा है जहां मुरैना से आकर चम्बल, काली सिंध ,क्वांरी नदी पहूज भिंड से बीस किलोमीटर दूर औरैया से आगे जाकर इटावा के पास चकरनगर तहसील के क्षेत्र में महाकालेश्वर मंदिर के पास यमुना नदी में मिलती हैं । इसलिये इस स्थान को किसी और नाम से न जान कर पंचनदा के नाम से ही जाना जाता है।
कार्तिक मास में लगता है मेला
कार्तिक मास के महीने में यहां काफी बड़ा मेला लगता है । लोग इस संगम में स्नान कर पुण्य कमाने आते हैं। पशुओं का भी यहां काफी बड़ा मेला लगता है जिसमें आस पास के गांव के लोग पशुओं का क्रय -विक्रय करने आते हैं। विंध्याचल का बीहड़ निर्जन क्षेत्र होने के कारण यह पहले डाकुओं की शरणस्थली रहा । डाकुओं से इस क्षेत्र के घिरा होने के कारण लोग यहां आने में डरते थे। आवागमन के साधनो के अभाव के कारण भी यह क्षेत्र उपेक्षित रहा जब कि प्रकृति ने अपनी सुन्दरता का भरपूर खजाना यहां लुटाया है। यह ऋषि मुनियों की तपस्थली रहा। पाराशर मुनि ने यहीं तपस्या की थी और सत्यवती से संयोग कर यमुना के द्वीप पर उसे उस पार ले गये थे। जहां उनके पुत्र वेद व्यास कृष्ण द्वैपायन का जन्म हुआ। शापित चम्बल भी आकर यहां यमुना में मिलकर पवित्र हो गई।
पचनदा में कार्तिक स्नान का विशेष महत्व
पचनदा में कार्तिक मास में स्नान करने से अकाल मृत्यु नही होती । उज्जैन के महाकाल के बाद महाकालेश्वर के मंदिर का भी संगम में स्थित होने के कारण अपना ही महत्व है।
ऊषा सक्सेना
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें।