Friday, January 16, 2026
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Gupt Navratri : दस महाविद्याओं में तीसरा स्थान है कामदेव की भस्म से उत्पन त्रिपुर सुंदरी महाविद्या का

by KhabarDesk
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Gupt Navratri : गुप्त नवरात्रि की दस महाविद्याओं में तीसरा स्थान त्रिपुर सुंदरी महाविद्या का है। माता पार्वती के प्रथम काली रूप दूसरे तारा रूप के पश्चात कामदेव की भस्म से उत्पन भाण्डासुर के वध के लिये देवताओं की प्रार्थना पर जिनकी उत्पत्ति हुई और उन्होंने त्रिपुर सुंदरी के रूप में अवतरित होकर उसका वध किया‌। षोडशी त्रिपुर सुंदरी त्रैलोक्य में सबसे सुंदर अपूर्व अप्रतिम सुंदर त्रिपुरेश्वरी त्रिपुरेश शिव की अर्धांगिनी हैं।

त्रिपुरा में है मां का शक्तिपीठ

इनका शक्ति पीठ स्थान राधाकिशोर गांव त्रिपुरा में कूर्म पीठ है। दूसरा राजस्थान के बांसवाड़ा में भव्य परा शक्ति का प्राचीन मंदिर जिसकी गणना 52 शक्ति पीठ के रूप में होती है। कहते हैं यहां देवी के तीन रूप के दर्शन होते हैं। प्रात:काल में एक कुमारी कन्या, दोपहर में षोडशी युवती तथा अंत में संध्याकाल में प्रौढ़ावस्था के रूप मे दर्शन होते हैं।  त्रिपुरसुंदरी का यह मंदिर अति प्राचीन है। अरावली की पहाड़ियों के बीच अपने निर्माण में शिल्प कला और भव्यता के लिये संपूर्ण देश में प्रसिद्ध है। अजस्र सलिला माही नदी के पावन तट पर अपनी गाथा गाता यह मंदिर आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र है,मंदिर के पीछे एक खदान है जिसमें पहले लोहा निकलता था । ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियों का स्त्रोत यह दस महा विद्यायें ही हैं जिनके दो कुल हैं:-

1.उग्र काली कुल 2.श्री कुल ।

उग्र काली कुल की अधिष्ठात्री काली देवी हैं :  महाकाली छिन्नमस्ता , धूमावती , बगलामुखी । श्रीकुल की अधिष्ठात्री त्रिपुर सुंदरी के साथ : त्रिपुर सुंदरी , भुवनेश्वरी,मातंगी और कमला है। इसके अतिरिक्त एक तीसरा कुल भी है जो सौम्य उग्र के नाम से जाना जाता है इसमें :तारा,त्रिपु भैरवी हैं । यह कभी सौम्य और आवश्यकतानुसार रौद्र रूप धारण करलेती हैं। शाक्त सम्प्रदाय में इनका विशेष महत्व है। शक्ति के पुजारी शाक्त सम्प्रदाय में शक्ति की ही पूजा का विधान है।

श्री यंत्र की अधिष्ठात्री देवी है त्रिपुर सुंदरी

सोलह कलाओं से सम्पन्न षोडशु त्रिपुर सुंदरी का अपना अलग महत्व है सभी का कल्याण करने वाली श्री यंत्र की अधिष्ठात्री देवी, शिव और विष्णु दोनों को ही शक्ति प्रदान कर उन्हें शव से शिव बनाती हैं।  इनके देव स्वयं कामेश्वर हैं। असम में कामाख्या देवी का शक्ति पीठ सती की योनि पर स्थित है। कहते हैं यहां सती की योनि गिरी थी। इसलिये इसका नाम कामख्या देवी है। यह मनुष्यों की सभी मनोकामनायें पूर्ण करती हुई उसे भुक्ति से मुक्ति की ओर ले जाती हैं । सभी को ऐश्वरय प्रदान करने वाली इनका दूसरा नाम राज राजेश्वरी है । जै माता त्रिपुर सुंदरी की
उषा सक्सेना-

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें।

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