Forest man of Telangana: लोग जब भी पर्यावरण के संरक्षण करने की बात करते हैं या फिर पेड़ों और जंगलों को बचाने की बात करते हैं तो ज्यादातर लोगों का यही मानना होता है कि किसी बड़े संगठन या सरकारी मदद के बिना इतने बड़े काम को करना मुमकिन नही है या फिर लोग इस काम के लिए सरकारों का मुंह देखते हैं या राजनेताओं को दोष देते हैं। लेकिन दिल में इच्छा हो, प्रकृति से प्यार हो, पर्यावरण की परवाह हो तो एक अकेला इंसान भी दुनिया को बदलने की ताकत रखता है। और यही करके दिखाया है तेलंगाना के 70 वर्षीय दुर्शाला सत्यनारायण ने जिन्होंने अपने अकेले दम पर 70 एकड़ जमीन में जंगल उगा डाला है। कैसे किया उन्होंने यह चमत्कार आपको बताते हैं। दुर्शाला सत्यनारायण की यह साहस भरी प्रकृति से प्यार की कहानी।
तेलंगाना के सूर्यपेट जिले के राघवपुरा गांव में रहने वाले 70 वर्षीय दुशार्ला सत्यनारायण ने अपनी 70 एकड़ पुश्तैनी जमीन को एक खूबसूरत जंगल में तब्दील कर दिया। हैरत की बात यह है कि उन्होंने बिना किसी मदद के इतना बड़ा काम किया है। उन्होंने वर्षों तक इस जंगल में हजारों पेड़ लगाए और अब यह क्षेत्र सैकड़ों पक्षियों और वन्यजीवों का घर बन गया है।
forest man of Telangana: दुर्शाला का प्रयास बना पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण
आज इस जंगल में लाखों फलदार और औषधीय पेड़ हैं, 32 पक्षी प्रजातियाँ, सात तालाब, और बोर-वेल्स हैं। यह इकोसिस्टम पक्षियों और जानवरों के लिए एक खूबसूरत बसेरा बन चुका है। एक जमींदार परिवार में जन्मे दुशार्ला सत्यनारायण बचपन से ही प्रकृति के साथ रहने का सपना देखते थे। अपनी पढ़ाई खत्म कर उन्होंने एक बैंक में नौकरी की लेकिन 27 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने गांव में वापस आ गए। यहां आकर वह अपनी पुश्तैनी जमीन को प्रकृति का स्वर्ग बनाने में लग गए। उन्हें पेड़ पौधे उगाना और उनकी देखभाल करना बचपन से ही पसंद था और अब वह पूरी तरह इसी काम में रम गए थे।
Forest man of Telangana जंगल उगाने के लिए की 50 साल की साधना
पिछले 50 सालों में उन्होंने 5 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए, जिसमें आम, जामुन अमरूद बेल जैसे के फलदार पेड़ हैं। इनमें कुछ पेड़ 50 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। उनका बसाया यह जंगल सैकड़ों पक्षियों और वन्यजीवों का घर भी है, जिनमें कई दुर्लभ पक्षी और जीव हैं, इस जंगल का अपना पारिस्थितिक तंत्र है, जहां हर पेड़, हर जीव-जन्तु प्रकृति का संतुलन बना कर रखता है।
उन्होंने सिर्फ जंगल ही नहीं उगाया, बंजर जमीन तक पानी पहुंचाने के लिए भी काम किया। उन्होंने खुद से अपने इस जंगल के लिए एक नहर सिस्टम भी बनाया है, जिसके जरिए सभी पेड़-पौधों को पानी मिलता है। इसके अलावा सात छोटे तालाब भी बनाए जिनमें हमेशा पानी भरा रहता है। इन तालाबों तथा पूरे जंगल में पानी की व्यवस्था करने के लिए एक बोरवेल भी है जिसकी सहायता से इन तालाबों में हमेशा पानी भरा रहता है। यह तालाब देखने में भी बड़े सुंदर लगते हैं क्योंकि इसमें कमल और कई तरह के फूल खिले रहते हैं।
जो प्रकृति से पाया प्रकृति को लौटाया
इस जंगल में डेविल्स हॉर्सव्हिप, स्पैनिश जैस्मीन, जामुन, बाबुल, बांस, वूमैन्स टंग ट्री, आम व कई अन्य प्रकार के पेड़-पौधे उगे हुए हैं। इनके अलावा यहां पर कई प्रकार के औषधीय पौधे भी हैं। उन्होंने अपने जंगल का निर्माण किसी भी तरह का पैसा कमाने के लिए नहीं किया है क्योंकि यहां जो कुछ भी उगता है वे किसी को नहीं बेचते। ये फल फूल पेड़ से नीचे गिर कर मिट्टी में ही मिल जाते हैं और उसे उपजाऊ बना देते हैं।
इस जंगल के तालाबों में मेंढ़क, मछलियां, कछुएं तथा अन्य कई जानवर रहते हैं। इस जंगल में खरगोश, बंदर, मोर, गिलहरियां, सांप, जंगली सुअर, जंगली बिल्लियां, नेवले, कुत्ते जैसे कई जंगली जानवर रहते हैं। दुर्शाला सत्यनारायण भी अपने इस प्यारे से जंगल में एक झोपड़ी बना कर रहते हैं। वे जानते हैं उन्होंने इस जंगल को इतना विस्तार दिया है और इसके इकोसिस्टम को इतना मजबूत कर दिया है कि उनके जाने के बाद भी प्रकृति खुद-ब-खुद इस जंगल को संभाल लेगी। उनके बसाए जंगल की कीमत आज करोड़ों में आंकी जाती है, लेकिन उन्हें पैसे से कोई लेना-देना नहीं है ।
सत्यनारायण इस जंगल को ही अपनी सच्ची दौलत मानते हैं। उनके इस जंगल की बदौलत ही यह क्षेत्र इतना हरा भरा बन गया है और यहां के लोग ताजी हवा में सांस लेते हैं। अब उनका बेटा भी अब इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है। सत्यनारायण बस यही चाहते हैं कि लोग हरियाली और पेड़ पौधों की असली कीमत को समझें, उनसे प्यार करें। उन्हें उगाएं, उनकी देखभाल करें क्योंकि यही हरियाली है जो इस पृथ्वी पर जीवन बचा कर रखेगी।