Wednesday, April 15, 2026
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ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर तर्पण का है विशेष महत्व, जाने पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त

Jyeshtha Amavasya

by KhabarDesk
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Jyeshtha Amavasya

Jyeshtha Amavasya : प्रत्येक माह पड़ने वाली अमावस्या तिथि का अपना धार्मिक महत्व होता है। परंतु ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि कुछ खास होती है। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत दोनों ही है। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या तिथि पर गंगा नदी में स्नान दान करने , पितरों की पूजा करने व उनका तर्पण करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है । इस दिन पूजा करने से शनि देव के कष्टों से मुक्ति मिलती है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जातक के जीवन में सुख शांति बनी रहती है । आईए जानते हैं कि इस बार जेष्ठ माह में पढ़ने वाली शनि अमावस्या कब है और उसका शुभ मुहूर्त क्या है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथी के दिन न्याय के देवता शनि देव का जन्म हुआ था। इसलिए ज्येष्ठ की अमावस्या को शनि जयंती के नाम से भी जाना जाता है । हर माह की अमावस्या तिथि के दिन गंगा नदी में स्नान दान की विशेष परंपरा है। इसके साथ ही पितरों का तर्पण, उनकी पूरे मनोभाव के साथ पूजा भी की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितरों की पूजा करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं और हमारे जीवन में सुख शांति आती है ।

ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथी को शनि देव का जन्म दिन मनाया जाता है । इसलिए इसे शनि जयंती या शनि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। जेष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री का व्रत भी रखा जाता है । ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत भी रखा जाता है। इस बार यह अमावस्या 26 और 27 मई 2 दिन पड़ रही है। आईए जानते हैं कि किस दिन वट सावित्री का व्रत रखना हैं और किस दिन अमावस्या तिथि  पूजन करने का विशेष लाभ मिलेगा।

कब पड़ेगी ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि:

ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 26 मई की दोपहर 12:12 मिनट से शुरू होकर 27 मई की सुबह 8:32 तक रहेगा। इस प्रकार से माना जाए तो शनि अमावस्या 26 मई को मान्य होगी। सोमवार होने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या तिथि के तौर भी मनाया जाएगा । 26 मई को शनि जयंती के साथ-साथ वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा। देखा जाए तो अमावस्या तिथि का मान्य सूर्योदय के समय से होगा । ऐसे मे अमावस्या तिथि का प्रारंभ सूर्योदय के अनुसार 27 मई को होगा।

ब्रह्म मुहूर्त का समय: सुबह 4:03 पर शुरू होकर सुबह 4:44 तक रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त : अभिजीत मुहूर्त का समय सुबह 11:51 से शुरू होकर दोपहर 12:46 तक रहेगा।

गोधूलि मुहूर्त: गोधूलि मुहूर्त का समय रात 7:11 से लेकर रात 7:31 तक रहेगा।

अमावस्या तिथि की पूजन विधि:

1)  ज्येष्ठ  माह की अमावस्या तिथि पर गंगा नदी में स्नान करने के बाद दान की परंपरा होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितरों का पिंडदान और तर्पण करना शुभ होता है। इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए पिंडदान , श्राद्ध कर्म,ब्राह्मण भोज इत्यादि करना चाहिए।

2) शनि जयंती होने के कारण स्नान के बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए और शाम के समय शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दिया जलाना चाहिए । पीपल के पेड़ की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया के प्रभाव में कमी आती है।

3) किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि के साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव हो तो उसे कम करने के लिए शनि जयंती वाले दिन हवन और यज्ञ इत्यादि करना चाहिए। इस दिन शनि देव को काले तिल और तेल अर्पण करने चाहिए । इसके साथ की एक सरसों के तेल का दिया जलाने का भी विधान मिलता है।

4) कुंडली में शनि देव के कष्टों से छुटकारा पाने के लिए शनि जयंती वाले दिन हनुमान जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है । इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि जनित कष्टों से छुटकारा मिलता है।

बबीता आर्या

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