Papmochani Ekadashi : चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है । मंगलवार 25 मार्च 2025 को पापमोचनी एकादशी का व्रत है इस दिन के व्रत का बहुत महत्व है इसमें अपने पापों की क्षमा मांगते हुये उनके प्रक्षालन के लिये यह व्रत किया जाता है। इस व्रत में दान धर्म के समय मन की पवित्रता और विचारों की शुचिता आवश्यक है। पूर्ण आस्थावान होकर श्रद्धा से दिया दान ही सच्चा दान है। इस दिन प्रात:स्नान के बाद विष्णु जी का लक्ष्मी जी सहित तुलसी दल के साथ पूजन करना चाहिये। तुलसी दल विष्णु जी को सबसे प्रिय है । इस तरह से पूजन करने के पश्चात फल या सात्विक प्रसाद ही भोग में चढ़ाना चाहिये । तभी हमें भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है ।
Papmochani Ekadashi पौराणिक कथा:-
महर्षि च्यवन के पुत्र मेधावी भी अपने ही पिता के समान तप करते हुये साधना रत रहते थे । एक बार जब वह अपने आश्रम में तप लीन थे तभी आकाश मार्ग से जाती हुई अप्सरा मंजु घोषा की उन पर दृष्टि पड़ी और वह उनके दिव्य सौंदर्य पर रीझ गए। उसने आश्रम में ही उतर कर पहले तो ऋषि मेधावी को जाग्रत कर अपने रूप का जादू चलाकर नृत्य गायन के माध्यम से उन्हें जगाना चाहा । उसके अपने इस कार्य में असफल होने पर स्वयं कामदेव ने अपने पुष्पशर चलाकर उनके मन को मथते हुये अपने मन्मथ नाम को सार्थक किया। चारों ओर सुवासित मनमोहक वातावरण कुहुकती कोयल की मधुर आवाज और मंजुघोषा के नूपुर की आवाज ने मेधावी ऋषि को मोहित कर जगा दिया । वह मंजु घोषा के रूपजाल में फंस कर मोहित हो गये और तपस्या को भूल कर मंजुघोषा के साथ आनंदित होकर रहने लगे । बहुत वर्षों बाद जब उन्हें होश आया तो वह शिव जी की अधूरी साधना छोड़ने के कारण बहुत दुखी हुये।
मंजूघोषा को मिला पिचाशिनी होने का श्राप
इसी पश्चाताप में उन्होंने अपनी तपस्या भंग का कारण मंजुघोषा को समझ कर उसे पिशाचनी होने का श्राप दे दिया। मंजुघोषा ने अपने अपराध की क्षमा मांगते हुये ऋषि से इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा । तब मेधावी ऋषि ने उसे चैत्र मास के कृष्णपक्ष की पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा । जिसके प्रभाव से अंत में मंजुघोषा अप्सरा पिशाचनी के भयंकर रूप से मुक्त होकर अप्सरा रूप को पाकर अपने स्थान स्वर्ग लोक में चली गई । इस तरह यह पापमोचनी एकादशी समस्त पापों से मुक्ति देती हुई भगवान विष्णु को लक्ष्मी जी सहित समर्पित है ।
उषा सक्सेना
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें