Monday, April 13, 2026
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नवरात्र में अष्टमी और नवमी का सही समय जान कर करें कन्या पूजन

Navratri Ashtami Navami Date and time

by KhabarDesk
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Navratri Ashtami Navami Date and time

Navratri Ashtami Navami : नवरात्रि का त्यौहार हर जगह भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिन में माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा होती है । माता के भक्त पूरे नौ दिनो तक व्रत रखते हैं और पूरे भाव के साथ माता की पूजा अर्चना करतें हैं । ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि का व्रत कन्या पूजन के बाद ही पूर्ण माना जाता हैं।

नवरात्रि में कन्या पूजन का मह्त्व:

इस बार नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर को हो हुई थी और इसका समापन 12 अक्टूबर को होगा। पूरे नौ दिनो तक माता रानी का धरती पर निवास होता है। सभी भक्त इन  दिनो माता के लिये उपवास रखते हैं और पूरे भक्तिभाव से माता रानी की पूजा अर्चना करते हैं। जो भी इन नौ  दिनो में माता का पूजा अर्चन करता हैं, मां उसके कष्टों का निवारण करती हैं। इन नौ दिनो में अष्टमी और नवमी तिथि का बहुत मह्त्व होता हैं। इन दिनो माता की पूजा के साथ कन्या पूजन का भी विधान है। इन दोनो दिनो में कन्या का पूजन करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं।आइये जानते हैं कि कन्या पूजन किस दिन किया जाता है।

Navratri Ashtami Navami कन्या पूजन की विधि:

नवरात्रि के नौ दिनो की पूजा के दौरान कन्या पूजन का विशेष मह्त्व है। ये कन्या पूजन कुछ लोग अष्टमी के दिन करते हैं तो कुछ लोग नवमी के दिन। कन्या पूजन के समय हलवा चना का भोग माता रानी को लगाया जाता हैं। सम्मान पूर्वक कन्या को घर मे बुलाया जाता है। फिर सभी कन्याओं के पैर स्वच्छ करके रोली से टीका किया जाता है और सबके हाथ मे कलावा बांधा जाता है। कन्या को हलवा चना का प्रसाद दिया जाता है। तत्पश्चात कन्या के पैर छू कर सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा दे कर विदाई की जाती है । इससे माता प्रसन्न होती है और घर में सुख समृद्धि का वास होता हैं।

Navratri Ashtami Navami अष्टमी और नवमी पूजन की तिथि:

आइये जानते हैं कि अष्टमी और नवमी का कन्या पूजन किस दिन करें। जनिये कन्या पूजन की सही तिथी।

ज्योतिषियों का कहना है इस बार शारदीय नवरात्र मे चतुर्थी तिथि में वृद्घि हो रही है, तो वही दूसरी तरफ नवमी तिथि क्षय हो रही है। अष्टमी तिथि की शुरुआत 10 अक्टूबर को 12 बजकर 31 मिनट से शुरु होकर 11 अक्टूबर को 12 बज कर 6 मिनट तक रहेगी। अष्टमी  समाप्त होने के ठीक बाद नवमी तिथि की शुरुआत हो जायेगी। नवमी तिथी का समापन 12 अक्टूबर को 10 बजकर 58 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार सप्तमी और अष्टमी का पूजन एक साथ शुभ नही माना जाता है। इसलिये उदय तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि का कन्या पूजन 11 अक्टूबर को किया जायेगा और नवमी तिथि का पूजन 12 अक्टूबर को किया जायेगा।

बबीता आर्या

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