ISRO Venus Orbiter Mission (Shukrayaan) : चंद्रयान की सफलता के बाद भारत अब शुक्रयान भेजने की तैयारी में है। शुक्र ग्रह का अध्ययन पृथ्वी के भविष्य को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा। भारत अपने प्रस्तावित वीनस ऑर्बिटर मिशन के साथ एक नए अंतरिक्ष अभियान के लिए तैयार हो रहा है। मंगल ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) और चंद्रयान चंद्र मिशन की सफलता के बाद, भारत अब शुक्र ग्रह का अन्वेषण करना चाहता है, जिसे अक्सर पृथ्वी का “जुड़वां” कहा जाता है। ISRO Venus Orbiter Mission यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित किया जा रहा है और वर्ष 2028 में लॉन्च होने की उम्मीद है। भारत शुक्र ग्रह का अन्वेषण क्यों करना चाहता है, आइए समझते हैं।
भारत का शुक्र मिशन, जिसे इसरो द्वारा वर्ष 2028 में लॉन्च करने की योजना है, देश के अंतरिक्ष अभियानो में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है। चंद्रमा और मंगल मिशन की सफलता के बाद, शुक्र मिशन, ग्रहों के ज्वालामुखी, सतह और भूवैज्ञानिक अध्ययन पर केंद्रित है। शुक्र ग्रह का अध्ययन करने से पृथ्वी के भविष्य को समझने का एक अनूठा अवसर मिलेगा। शुक्र ग्रह, जिसके बारे में कभी माना जाता था कि उस पर महासागर हैं, अब एक गर्म ग्रीनहाउस बन गया है, जिसकी सतह का तापमान 470 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। शुक्र ग्रह की जलवायु की पृथ्वी के साथ तुलना करके, वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन, वायुमंडलीय गतिशीलता और ग्रहों के विकास के बारे में सुराग खोजने की उम्मीद है। शुक्र ग्रह का अध्ययन करने से पृथ्वी के संभावित भविष्य और ग्रह को रहने योग्य बनाने वाले कारकों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
भारत का शुक्र मिशन 2013 में मंगल ऑर्बिटर मिशन के बाद भारत का दूसरा अंतर्ग्रहीय अभियान है।
इस मिशन में 17 भारतीय और 7 अंतर्राष्ट्रीय पेलोड शामिल हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक थर्मल कैमरा विकसित किया है, जो ग्रह की सतह पर सबसे अधिक तापमान का अध्ययन करता है। इसरो का लक्ष्य शुक्र ग्रह का अध्ययन करना है, जिसमें इसके बादलों की संरचना और उच्च ऊर्जा शामिल है, ये भारत द्वारा इस दिशा में पहला ऐसा प्रयास है। ये मिशन जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकारी दे सकता है। शुक्र ग्रह की सतह का दबाव पृथ्वी के दबाव से 90 गुना अधिक है, जिसके लिए विशेष अंतरिक्ष यान सामग्री की आवश्यकता होगी।
पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन को समझने में मिलेगी मदद
शुक्र ग्रह का चरम जलवायु प्रभाव, जलवायु परिवर्तन का एक वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे पृथ्वी पर इसी तरह के खतरों को समझने में मदद मिलेगी। शुक्र ग्रह ने अपना जल कैसे खोया, इसका अध्ययन करने से पृथ्वी पर वैश्विक तापमान के प्रभावों पर महत्वपूर्ण डेटा मिल सकता है। शुक्र ग्रह पर बादल निर्माण का विश्लेषण पृथ्वी के साइंटिफिक अध्ययन में सहायता कर सकता है। शुक्र ग्रह में प्रारंभिक समय में जल रहा होगा , जिससे यह संभावना बढ़ गई है कि यहां कभी जीवन रहा होगा।
शुक्र को कहा जाता है पृथ्वी का जुड़वा ग्रह
शुक्र ग्रह को अक्सर ‘ पृथ्वी का जुड़वां ग्रह’ कहा जाता है, जिससे पृथ्वी के अतीत और भविष्य को समझने के लिए इसका अध्ययन करना महत्वपूर्ण हो जाता है। शुक्र ग्रह पर वैज्ञानिकों के अध्ययन से यह जानकारी मिल सकती है कि सौर पवनें और अंतरिक्ष मौसम से ग्रह कैसे प्रभावित होते हैं। सौर पवन के साथ शुक्र की अंतर्क्रिया से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर अंतरिक्ष पर मौसम के प्रभाव को समझा जा सकता है।
पृथ्वी के विकास को समझने के लिए यह मिशन काफी सहायक हो सकता है है, पृथ्वी के नीचे कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ते स्तर पर , शुक्र ग्रह पर ऐसे ही प्रभावों का अध्ययन करने से महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं। शुक्र के जलवायु का इतिहास पृथ्वी के लिए शुष्क जलवायु परिवर्तन के संबंध में चेतावनी देता है। शुक्र के कार्बन डाइऑक्साइड-प्रधान मिश्रण को पृथ्वी पर देखकर पुर्वानुमान के उपयोग में मदद मिल सकती है।
शुक्र ग्रह का अध्ययन पृथ्वी की सतह पर समान घटनाओं का अध्ययन करने के लिए एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। शुक्र पर जल की कमी से पृथ्वी पर जल की स्थिति इसके कम होने की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है। शुक्र का जल-समृद्ध ग्रह से वर्तमान शुष्क अवस्था में परिवर्तन, जल प्रतिधारण का अध्ययन महत्वपूर्ण हो सकता है। शुक्र ग्रह में वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र का अभाव है , इसका अध्ययन हमें सौर विकिरण से बचाने वाले चुंबकीय क्षेत्र की भूमिका को समझने में मदद करेगा। शुक्र ग्रह के भूविज्ञान और जलवायु की तुलना करके , भारत के मिशन को काफी कुछ समझने में मदद मिल सकती है कि ग्रहों का वातावरण कैसे विकसित होता है और पृथ्वी के भविष्य के सामने क्या हो सकता है। शुक्र ग्रह का अध्ययन करना अपने अत्यधिक तापमान के कारण बेहद मुश्किल है। इसरो के लिए, यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं में एक और छलांग साबित होगा।
–प्रियंका सौरभ