Cyber Crime : साइबर क्राइम से बचने के लिए पुलिस, प्रशासन, बैंक, आरबीआई और कई संस्थाएं हमेशा लोगों को सावधान करते रहते हैं और साइबर ठगों से सतर्क रहने को कहते हैं। अब लोग भी साइबर क्राइम को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं। अपनी बैंक डिटेल या ओटीपी को लेकर सतर्क रहते हैं, लेकिन साइबर ठग भी ठगी के नए-नए तरीके ईजाद करते रहते हैं और लोगों को किसी न किसी तरह अपने चंगुल में फंसा ही लेते हैं। आम लोगों के साथ आए दिन इस तरह के साइबर फ्रॉड की खबरें आप अखबारों में पढ़ते रहते होंगे। यहां हम आपको साइबर ठगी का एक ऐसा कारनामा बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। यहां पर साइबर ठगों ने किसी आम आदमी को नहीं बल्कि एक दिग्गज कारोबारी को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
वर्धमान ग्रुप के मालिक को लगाया 7 करोड़ का चूना
साइबर ठगों ने वर्धमान ग्रुप के मालिक एस पी ओसवाल (S P Oswal) को फर्जी अरेस्ट वारंट का डर दिखा कर लूट लिया । आपको पूरा मामला बताते हैं।
कारोबारी को किया डिजिटल अरेस्ट
एस पी ओसवाल को साइबर ठगों ने फेक सीबीआई अधिकारी बनकर लूट लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वर्धमान ग्रुप के मालिक एस पी ओसवाल को साइबर ठगों ने फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर फोन कॉल किया, आरोपी ने वीडियो कॉल पर सीबीआई अधिकारी बनने का पूरा नाटक किया। उसने वर्दी भी पहनी थी और खुद को एक ऑफिस में बैठा हुआ दिखाया, जहां सीबीआई का लोगो लगा हुआ था। बात करने के बाद आरोपी ने उन्हें व्हाट्सएप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेज दिया और ऐसा दिखाया गया कि इसे सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया है। साइबर ठग ने एस पी ओसवाल को जेल जाने का डर दिखाकर उन्हें जमानत दिलाने के लिए 7 करोड़ रुपए दो खातों में ट्रांसफर भी करा लिए। आरोपी ने एस पी ओसवाल से कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट में है। जमानत के रुपए देने पर ही उन्हें रिलीज किया जाएगा। ठगों के झांसे में आकर एसपी ओसवाल ने जमानत के नाम पर 7 करोड़ की रकम दो खातों में ट्रांसफर भी करवा दी।
पुलिस ने किया साइबर गैंग का भंडाफोड़
घटना के बाद एस पी ओसवाल को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वह दोनों खाते फ्रीज करवा दिए जिनमे रकम ट्रांसफर करवाई गई थी। इतना ही नहीं पुलिस ने 48 घंटे के भीतर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया। पंजाब पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो पहले भी कई लोगों को चूना लगा चुका है।
लुधियाना के पुलिस कमिश्नर कुलदीप सिंह चहल ने बताया कि इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके पास से 5 करोड़ 25 लाख रुपए बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि इस गैंग के साथ अन्य सदस्य भी हैं, जिन्हें जल्द पकड़ लिया जाएगा। इस गैंग में कुल 9 सदस्य हैं, जो असम और पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। पकड़े गए आरोपियों ने सीबीआई ऑफिसर बनने की ऐसी एक्टिंग की कि वर्धमान ग्रुप के मलिक एस पी ओसवाल भी गच्चा खा गए और उनके फर्जीवाड़े को पकड़ नहीं पाए और ठगी का शिकार हो गए।
पकड़े गये आरोपियों का नाम अतानु चौधरी और आनंद कुमार चौधरी है। दोनों ही गुवाहाटी के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर आरोपियों ने एक खाते में तीन करोड़ और दूसरे खाते में 4 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए थे। जब तक पुलिस ने यह खाते फ्रीज किए आरोपी एक करोड़ 70 लाख रुपए की रकम निकल चुके थे। पुलिस ने बाकी बचे हुए रुपये एस पी ओसवाल को लौटा दिए हैं। साइबर फ्रॉड की इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। इससे पहले भी एक बिजनेसमैन को साइबर ठगों ने एक करोड़ एक लाख रुपए का चूना लगा दिया था। इसमें भी वीडियो कॉल द्वारा पीड़ित को फेक अरेस्ट वारंट दिखाया गया था।
साइबर क्राइम (Cyber Crime) के मामले दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। कभी फर्जी सीबीआई, इनकम टैक्स या नारकोटिक्स अधिकारी बनकर वीडियो कॉल द्वारा या फिर फेक पार्सल के नाम पर ड्रग्स या संदिग्ध वस्तु बरामद होने का डर दिखाकर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट और जमानत के नाम पर लूट लिया जाता है। हैरत की बात तो यह है कि यह ठग बड़े-बड़े कारोबारी और दिग्गज उद्योगपतियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं ।