Nautapa : नौ दिन तपाने वाली गर्मी । क्या होता है इन 9 दिनों में खास। इन दिनों पूरे उत्तर भारत में भीषण जला देने वाली गर्मी का प्रकोप है। धरती मानो आग उगल रही है।
क्या है नौतपा (Nautapa)
भारतीय पारंपरिक मिथ के अनुसार गर्मी के महीने के वह सर्वाधिक नौ गर्म दिन जब तापमान सबसे प्रचंड होता है, उन्हें नौतपा कहा जाता है। इन दिनों पारा 45 डिग्री को पार कर जाता है ।
भारतीय ज्योतिष में नौतपा का अर्थ
Nautapa ज्योतिष के हिसाब से नौतपा के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और लगातार नौ दिनों तक भीषण गर्मी पड़ती है। गर्मी का प्रकोप कितना भयंकर होता है कि झेलना मुश्किल हो जाता है। नौतपा के दौरान सूर्य और धरती के बीच की दूरी सबसे कम होती है। जिस वजह से सूर्य की कठोर किरणे सीधा पृथ्वी पर पड़ती हैं।
नौ तपा :-
जेठ मास कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि एवं वृष राशि के कृतिका नक्षत्र को पार करते ही जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो उनकी सौर ऊर्जा और बढ़ जाती है। मौसम का फेर बदल, आँधी तूफान इन्हीं दिनों मे सबसे अधिक आते हैं । चक्रवात ,बवंडर आदि से सभी कुछ धूल धूसरित हो जाता है ।
कहते हैं कि अपने परम मित्र चंद्रदेव के प्रिय नक्षत्र रूपी प्रियतमा रोहिणी उनके स्वागत में कोई कोर कसर न रह जाये इसके लिये विशेष ध्यान उनकी आव भगत में रखती हैं । चंद्रदेव भी उनके साथ अपनी शीतलता का परित्याग कर अपनी सारी शक्ति उनके तेजस्वी प्रभाव को बढ़ाने में लगा देते हैं । इस समय विषुवत् रेखा पर सूर्य कीकिरणें सीधी पड़ती हैं जिससे धरती पर ऐसा लगता है जैसे आग बरस रही हो। यह ग्रीष्म ऋतु के सबसे अधिक कष्टदायी दिन होते हैं। नौ दिन धरती की तपस्या के माने गये हैं, जिसमें पानी की बूंद भी नहीं गिरनी चाहिये यदि यह तपस्या पूर्ण हो गई तो नौतपा के बाद की बरखा सुखदायी होगी । उसके गर्भ धारण की शक्ति बढ़ जायेगी और फसलें अच्छी होंगी । भारतवर्ष कृषि प्रधान देश होने से इसमें वर्षा का अधिक महत्व है । कृषक ऋतुओं के मौसम के अनुसार भी शकुन अपशकुन की गणना पहले से ही कर लेता है । उसके लिये इस नौतपा का बहुत महत्व है । यदि इस के बीच में पानी बरस गया तो बाद में बारिश अच्छी नही होगी ऐसा अनुमान लगाया जाता है । इसलिये सभीप्राणी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि :-
“हे प्रभो! धरती के तप को पूर्ण होने दो तभी उसकी आस पूर्ण होगी । उसकी फसलों को अपने गर्भ में धारण करने की क्षमता बढ़ेगी और तब फसलें खेतों में हरिया कर लहरायेंगी तभी तो किसान की भी अभिलाषा पूरी होगी जो संपूर्ण जग का अन्नदाता है । यदि अन्नदाता ही दुखी तो फिर सुखी कौन होगा ।
कब तक रहेगा नौतपा
इस बार नौतपा की शुरुआत 25 मई 2025 से हुई है जो 2 जून 2025 तक रहेगी । हिंदू ज्योतिष के अनुसार नौतपा को भीषण गर्मी का प्रतीक माना जाता है।
कृषि के लिए मुफीद
नौतपा के 9 दिनों में सूरज का सितम जीव जंतुओं और लोगों को झुलसा कर रख देता है लेकिन यह 9 दिन खेती के लिहाज से बहुत अहम होते हैं। माना जाता है कि इन नौ दिनों में जितनी तेज गर्मी पड़ती है बाद में उतनी ही जमकर बारिश भी होती है। हालांकि वैज्ञानिक इस गणना को नहीं मानते । किसान इन नौ दिनों को फसल के लिए मिट्टी तैयार करने का बेहतरीन समय मानते हैं । किसान खेती की मिट्टी पलट कर खेत को उपज के लिए तैयार करते हैं।
कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि नौतपा में जब भीषण गर्मी पड़ती है तो खेती की जमीन रोगाणुओं से मुक्त हो जाती है। भीषण गर्मी से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहे, व कई कीटाणु स्वत ही नष्ट हो जाते हैं। जमीन के तपने से पैदावार में भी फायदा होता है। गर्मी में खेतों की जुताई करने से बिना कीटनाशक दवा के ही कीटाणु और खरपतवार खत्म हो जाते हैं। मिट्टी के तपने से चौमासा की सभी फसलें जैसे बाजरा, ग्वार, मूंग, तिल, मूंगफली इत्यादि की अच्छी पैदावार होती है।