Thursday, April 9, 2026
Home धर्म कर्म 21 बार धरती को क्षत्रियों से विहीन करने वाले-भगवान परशुराम के जन्म की कहानी

21 बार धरती को क्षत्रियों से विहीन करने वाले-भगवान परशुराम के जन्म की कहानी

by Jai P Swarn
0 comment
parshuram jayanti 2024

परशुराम जयंती (parshuram jayanti 2024): वैशाख मास शुक्ल पक्ष के प्रदोष काल अर्थात द्वितीया और तृतीया के संधि काल में अक्षय तृतीया के दिन भृगुवंशीय ऋचीक के पुत्र जमदग्नि के यहां माता रेणुका की कोख से चतुर्थ पुत्र के रूप में भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। उन्हें भगवान विष्णु का छठवां अवतार कहा जाता है । परशुराम को शौर्य एवं वीरता का प्रतीक माना जाता है । आज भी हनुमान जी के समान ही उनको भी जीवित माना‌ जाता है। वह शिव जी के परम भक्त और प्रिय शिष्य थे ।

ऐसे ब्राह्मण जिनमें क्षत्रियों के गुण समाहित थे

यद्यपि उनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था किंतु उनके अंदर क्षत्रियों के गुण थे। उनके जन्म के विषय में कहा जाता है कि राजा गाधि ने अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह ऋचीक ऋषि के साथ किया था। गाधी राज की पुत्री सत्यवती चूंकी अपने पिता की इकलौती संतान थी इसलिए वह एक भाई पाने की भी प्रबल इच्छा रखती थी। सत्यवती की माता ने भी उससे आग्रह किया कि तुम्हारे पति ऋचीक ऋषि सिद्ध तपस्वी हैं। उनकी कृपा से मुझे भी पुत्र प्राप्त हो सकता है । सत्यवती ने अपने मन की इच्छा अपने पति ऋचीक ऋषि को बताई। तब ऋचीक मुनि‌ ने अपने तपोबल से दो कमंडलो में औषधीय जल तैयार किया जिसमें विशेष गुण थे। एक क्षत्रिय गुण वाला जल जो सत्यवती की माता के लिए था दूसरा ब्राह्मण गुण वाला जल जो सत्यवती के लिए था। लेकिन सत्यवती की माता ने सत्यवती के लिए बनाया गया ब्राह्मण गुण वाला जल पी लिया। बेटी ने तब माता के लिये रखा गया क्षत्रिय गुण वाला जल पिया।

जब ऋचीक ऋषि को यह पता चला तो उन्होंने सत्यवती से कहा तुम्हारा पुत्र अत्यंत क्रोधी और क्षत्रियगुण वाला होगा और तुम्हारी माता का पुत्र ज्ञानवान तपस्वी ब्राह्मण के गुण से युक्त । तब सत्यवती ने क्षमा मांगते हुये कहा मुझे तो ब्राह्मण गुण वाला ही पुत्र चाहिये। तब ऋचीक ऋषि ने चिंतन करते हुये कहा भाग्य को मैं बदल नही सकता पर इतना अवश्य कर सकता हूं कि पुत्र के स्थान पर पौत्र क्षत्रिय गुण वाला हो सकता है ।

अर्थात तुम्हारा पुत्र तो शांत चित वाला ही होगा लेकिन तुम्हारा पौत्र क्षत्रिय के समान उग्र स्वभाव वाला होगा। इस प्रकार परिणाम स्वरूप सत्यवती की माता को पुत्र के रूप में विश्वामित्र की प्राप्ति हुई और सत्यवती को भी शांतचित्त पुत्र जमदग्नि की प्राप्ति हुई। जमदग्नि और उनकी पत्नी रेणुका को पुत्र रूप में परशुराम प्राप्त हुए जो सत्यवती और ऋचीक ऋषि के पौत्र हुए । परशुराम में क्षत्रिय के उग्र गुण समाहित हुए । इस प्रकार से परशुराम जी का जन्म हुआ ‌। क्षत्रियों के बढ़ते हुये अत्याचार को रोकने के लिये उन्होंने इक्कीस बार क्षत्रियों से युद्ध करते हुये उनका विनाश किया।

राम से बने परशुराम

जन्म से उनका नाम राम था परंतु शिव जी के द्वारा परशु हथियार दिये जाने पर परशु को धारण करने से उनका नाम परशुराम हुआ ।

उषा सक्सेना

You may also like

Leave a Comment

About Us

We’re a media company. We promise to tell you what’s new in the parts of modern life that matter. Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo. Sed consequat, leo eget bibendum sodales, augue velit.

@2022 – All Right Reserved. Designed and Developed byu00a0PenciDesign