Aatal Bihari Vajpayee Anniversary : लोकतंत्र में कुटिल राजनीति के षड़यंत्र का शिकार हुये मात्र 13 दिन के प्रधानमंत्री की अपने सिद्धांतों पर अटलता ने ही उन्हें महान बनाया । इसीलिए देश आज भी उनके आगे नतमस्तक है । मान्यवर अटल बिहारी वाजपेई जी की सशक्त नेतृत्व क्षमता और उनकी व्यवहार कुशलता ने ही उन्हें एक दिन इस राष्ट्र का प्रधानमंत्री बनाया । उनके विराट व्यक्तित्व के आगे सभी छोटे हो जाते हैं । वह सूर्य का वह प्रकाश थे जिसके आगे सभी का प्रकाश मंद हो जाता है।
उन्हीं के अपने ही शब्दों में:-
“छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता ,
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता ।”
वह भारतमाता के सच्चे सपूत थे। बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न उनका व्यक्तित्व और केवल व्यक्तित्व ही नहीं वरन कृतित्व भी उन्हीं के समान उदात्त मानवीय मूल्यों को स्थापित करने वाला था। एक ओजस्वी कवि और संसद में गरीबों की आवाज थे। बहुआयामी समन्वयवादी विचार धारा के पोषक होने के कारण पक्ष और विपक्ष दोनों ही उनकी बात को गंभीरता से सुनते थे।
एक मुखर प्रवक्ता के रूप में वह जब विदेश मंत्री थे तो संयुक्त राष्ट्र संघ में अपना भाषण हिन्दी में देकर उन्होंने अपने देश का मान बढ़ाया था।
स्वतंत्रता संग्राम में वह भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गये तब उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय से हुई। उन्हीं के संपर्क में आकर उन्होंने राजनीति सीखी। 1980 में लालकृष्ण अडवाणी और भैरों सिंह शेखावत के साथ मिल कर जनता पार्टी बनाई और उसके पहले अध्यक्ष बने।
वर्ष 1996 के चुनाव में जनता दलकी जीत हुई और वह प्रधानमंत्री मत्री बने किंतु अन्य पार्टियों का सपोर्ट न मिलने से मात्र एक वोट से उनकी सरकार गिर गई । इसके बाद पुन: 1996 से 1998 तक वह फिर प्रधानमंत्री रहे। एनडीए का गठन करते हुये फिर सत्ता में आये। 1999 का कारगिल युद्ध जीता। इस विजय ने उनके हौसले बुलंद किये और वह 2004 तक सत्ता में प्रधानमंत्री पद पर बने रहे । उनके कारण देश, विश्व में सशक्त होकर उभरा। उन्होंने अमेरिका के विरोध के बावजूद भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाया। पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल करते हुये पाकिस्तान की यात्रा की। यह एक महत्वपूर्ण पहल थी जिसनै पाकिस्तान की ओर मैत्री का हाथ बढ़ाया था। सर्वशिक्षा अभियान, ग्राम सड़क योजना उन्हीं के अभियान थे।
पुरुस्कार;-1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरुस्कार से नवाजा गया।
लोकमान्य तिलक पुरुस्कार।
2015 में फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश
लिबरेशन वार एवार्ड तथा भारत रत्न सम्मान मिला।
अंत में उन्हीं की कलम से :-
मैं जी भर जिया,मै मन से मरूं लौटकर आऊंगा ,कूच से क्यों डरूं , अंत में 16 अगस्त की तारीख 15 अगस्त के झंडा वंदन के पश्चात ही तो उन्हें जाना था। एक लम्बी बीमारी और अस्वस्थता के बाद एक इतिहास के युग का अवसान हो गया।
ठन गई, मौत से ठन गई
जूझने का मेरा इरादा न था
मोड़ पर मिलेंगे यह वादा न था
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई
यूँ लगा जिंदगी से बड़ी हो गई।
कितना कटु सत्य झलकता है उनकी कविताओं में बहुत कुछ कह देती हैं संदेश में। उनकी वाणी में मुखरता थी जो भी कहते सत्य कहते। अपनी बात पर अटल होकर अटल रहते इसीलिए वह अटल थे।
Aatal Bihari Vajpayee Anniversary
16 अगस्त 2018 का वह दिन आया जब एक जलता हुआ दीपक बुझ गया। लम्बी बीमारी से जूझते हुये भी अपने सिद्धांतों और विचारधारा की सनातन धरोहर देश को सौंप कर गये। आज उन्हें श्रद्धांजलि देते हुये उनके विचार और विचार धारा हमें प्रेरित करती दिशा निर्देश देती है।
उषा सक्सेना