Digital Arrest: साइबर अपराध की दुनिया में आजकल डिजिटल अरेस्ट ने कोहराम मचाया हुआ है। डिजिटल अरेस्ट के जरिए साइबर ठग ऐसा माया जाल रचते हैं, कि चतुर और सयाने लोग भी उनके जाल में फंस जाते हैं। डिजिटल अरेस्ट की कई घटनाएं हाल ही में सामने आई हैं, जहां बड़े-बड़े कारोबारी, उद्योगपति और कई नामचीन लोग भी इसका शिकार हुए हैं। हाल ही में डिजिटल अरेस्ट से मौत का भी पहला मामला सामने आया था।, जहां एक महिला की डिजिटल अरेस्ट के खौफ से मौत हो गई थी। साइबर ठग, इतने शातिर हो गए हैं, वे डिजिटल अरेस्ट का ऐसा माहौल बनाते हैं कि अच्छे-अच्छे पकड़ नहीं पाते और ठगी का शिकार हो जाते हैं। पीड़ित समझ नहीं पाता आखिर उसके साथ ये क्या हो गया है और जब उसे होश आता है तो वो पूरी तरह से लुट चुका होता है। लोगों के लाखों करोड़ों रुपए इस डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड में तबाह हो चुके हैं। पुलिस भी लोगों से सावधान रहने को कहती है, लेकिन बावजूद इसके साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट पर लगाम नहीं लग पा रही।
Digital Arrest पुलिस के लिए भी बना सर दर्द
आधुनिक युग की बदलती तस्वीर ने हमारे जीवन में अनेक नये परिवर्तन ला दिये है । ये परिवर्तन कहीं अच्छे हैं तो कहीं बुरे भी हैं । इस डिजिटल परिवर्तन ने हमे कई तरह की सुविधायें भी दी है तो अपराध के नये तरीके को बढ़ावा भी दिया है । इन्ही फ्रॉड मे से एक हैं डिजिटल अरेस्ट । आइये जानते हैं कि ये किस तरह का फ्रॉड होता हैं ।
डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाकर होती है लाखों करोड़ों की ठगी
आजकल देश के कई हिस्सों से साइबर फ्रॉड की खबरें आती रहती हैं । इसमें डिजिटल अरेस्ट की खबरें भी आती हैं । इसमे फंस कर कई लोग ठगी के शिकार हो गये हैं । बहुत लोगों को इसके बारें मालूमात नही है । इसमें अपराधी, लोगो को ऑनलाइन के माध्यम से ठगी का शिकार बनाते है। ऑनलाइन के माध्यम से डरा कर फिरौती मांगते हैं और ठगी का शिकार बनाते हैं । डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिये हम आपको साइबर एक्सपर्ट द्वारा बताए गए उपाय बताने जा रहे हैं । जिससे आप सावधान हो सकें और इस फ्रॉड से बच सकें।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट:
डिजिटल अरेस्ट ठगी का वो नया रूप है जो ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है । इसमें साइबर ठग विक्टिम को अरेस्ट का डर दिखाता है । साइबर ठग वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को अरेस्ट का डर दिखाते हैं, यह साइबर ठग इतने शातिर होते हैं कि वह बैकग्राउंड में इस तरह का सेटअप दिखाते हैं कि वह सचमुच का पुलिस स्टेशन, सीबीआई ऑफिस या नारकोटिक्स का ऑफिस ही नजर आता है और पीड़ित असली और नकली का फर्क नहीं कर पाता । ठग पुलिस की वर्दी में बैठकर पीड़ित को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं, कहते हैं कि उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है। उसे बचना है तो पेनाल्टी या जुर्माना देना पड़ेगा।
कानून में नहीं है डिजिटल अरेस्ट का प्रावधान
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों द्वारा ही गढा हुआ शब्द है। वास्तव में साइबर कानून में इसका कोई प्रावधान नही है । यह ठग इतने चालाक होते हैं कि पीड़ित की सभी जानकारियां हासिल कर लेते हैं और कई प्रकरणों में देखा गया है कि उनके गैंग में पढ़े लिखे इंजीनियर, बैंकर्स तक शामिल होते हैं जिन्हें टेक्निकल चीजों की भी अच्छी जानकारी होती है। डिजिटल अरेस्ट की बात करें तो दिल्ली एनसीआर में ही पिछले तीन महीनों मे कई मामलें सामने आ चुके हैं। कई ऐसे भी मामले हैं जो रिपोर्टेड नही है ।
कैसे बचे डिजिटल अरेस्ट से:
डिजिटल ठगी कई तरीकों से होती हैं । सबसे पहले फर्जी तरीके से बैंक अकाउंट खोला जाता हैं । इस अकाउंट को खोलने के लिये गलत तरीके से सिम कार्ड लिया जाता हैं । इसके बाद जिन लोगो को ठगी का शिकार बनाना है, उन लोगो का आधार नंबर, पैन नंबर और दूसरी जरुरी जानकारी गैरकानूनी तरीके से एकत्र कर ली जाती है । इसके बाद ऑनलाइन धमकाकर पैसा मांगा जाता है । इसमें ध्यान देने वाली बात है कि कभी भी कोई भी सरकारी संस्था या एंजेसी ऑनलाइन तरीके से पूछताछ नही करती । कोई भी सरकारी संस्थान आपको ऑफिस बुला कर ही पूछताछ करेगा। पुलिस या कोई भी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकती है यह बात ध्यान में रखना जरूरी है।
Digital Arrest की कैसे करें शिकायत:
अगर आप इस फ्रॉड का शिकार हो गये हैं और आपको इस फ्रॉड की रिपोर्ट करानी हैं, तो आप साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर पर काल करके या फिर ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं । इसके साथ ही आप स्थानीय पुलिस स्टेशन पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं । मदद के लिए आप cybercrime.gov.in पर ईमेल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं। पुलिस भी लगातार इन साइबर ठगों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन देखा गया है कि पुलिस की पकड़ में छोटे ठग ही आ पाते हैं । दरअसल इनके असली सरदार तो विदेश में रह कर यह खेल खेलते हैं।
बबीता आर्य