Indonesia bullet train Whoosh: रफ्तार की दौड़ में एक और एशियाई देश ने लंबी छलांग लगाई है। कभी जापान की USP रही बुलेट ट्रेन, अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया में एक मॉडल के रूप में अपनाई जा रही है। तेज रफ्तार की दौड़ में पश्चिमी देशों के साथ चीन भी बहुत पहले बुलेट ट्रेन लाकर अपने आप को विकसित यातायात के साधनों की पहली पंक्ति में ले आया है। अब एशिया के दूसरी पंक्ति के देश इंडोनेशिया ने भी बुलेट ट्रेन की रफ्तार हासिल कर ली है।
दरअसल भारत और इंडोनेशिया ने बुलेट ट्रेन लाने का सपना लगभग साथ-साथ, 2015 में देखा था। भारत में पहली बुलेट ट्रेन वर्ष 2028 या 29 में दौड़ेगी, जबकि इंडोनेशिया में 2023 में ही बुलेट ट्रेन की शुरुआत हो चुकी है।
इंडोनेशिया में दौड़ रही है बुलेट ट्रेन Whoosh
इंडोनेशिया में साल 2023 में ही बुलेट ट्रेन का परिचालन शुरू हो गया था। सितंबर 2023 से इंडोनेशिया की बुलेट ट्रेन वूश (Indonesia bullet train Whoosh) 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ती है। इंडोनेशिया में नागरिक तेज रफ्तार बुलेट ट्रेन में यात्रा का आनंद उठाने के साथ अपना समय भी बचा रहे हैं। जबकि भारत में बुलेट ट्रेन 2028 या 29 में ही ट्रैक पर दौड़ पाएगी। आखिर, इंडोनेशिया ने बुलेट ट्रेन के सपने को पटरी पर लाने का मुकाम कैसे हासिल किया । आइए आपको बताते हैं
इंडोनेशिया ने बुलेट ट्रेन के निर्माण और परिचालन में चीन की मदद ली। और 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए 142 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन तैयार की। Whoosh नाम की यह ट्रेन इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से बोंडुग शहर को जोड़ती है। इस प्रोजेक्ट पर 7.3 बिलियन डॉलर यानी 6000 करोड़ से भी ज्यादा का खर्च आया। 2019 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को चीन की मदद से पूरा किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको वीडोडो ने कोविड और आर्थिक परेशानियों के बावजूद इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाया। दरअसल यह बुलेट ट्रेन चीन के बेल्ट एंड रोड(Belt and Road Project) परियोजना का भी एक अहम हिस्सा है। जहां इंडोनेशिया को बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट पूरा करने में चीन की मदद मिली तो भारत इसके लिए जापान की मदद ले रहा है। इस ट्रेन का नाम Whoosh रखने के पीछे की एक वजह यह भी है कि इसके चलने पर Whoosh की आवाज आती है। हालांकि, Whoosh का फुल फॉर्म है Waktu Hemat Operasi Optimal Sistyem Handal यानी टाइम सेविंग ऑप्टिमल ऑपरेशन रिलायबल सिस्टम। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल है और बिजली से भी चलती है।
भारत में कब चलेगी बुलेट ट्रेन ?
जहां इंडोनेशिया ने बुलेट ट्रेन के परिचालन का सपना पूरा कर लिया, वहीं भारत में अभी भी इसमें 4 वर्ष की देरी है। हालांकि सरकार ने 2022 में ही अहमदाबाद- मुंबई बुलेट ट्रेन शुरू करने का लक्ष्य रखा था।
भारत में बुलेट ट्रेन में देरी की वजह
जानकारी के मुताबिक बुलेट ट्रेन के लिए 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण कर रही NHSRCL ने बताया कि टेंडर ना मिलने के कारण परियोजना का काम लटका हुआ है। मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना के पूरा होने की तारीख का आकलन, सभी टेंडर /पैकेज के अवार्ड होने के बाद ही किया जा सकता है। कहां जा रहा है कि करोना महामारी के बाद इसके काम की गति में अवरोध आया है। फिलहाल इस ट्रेन के 2027 के बाद ही चालू होने की उम्मीद है।
इंडोनेशिया ने लगाई बड़ी छलांग
पिछले 10 वर्षों में राष्ट्रपति जोको वीडोडो के नेतृत्व में इंडोनेशिया ने बड़ी आर्थिक छलांग लगाई है। इंडोनेशिया तेजी से तरक्की करने वाली अर्थव्यवस्था में शुमार हो गया है। जनसंख्या के मामले में इंडोनेशिया 28 करोड़ की जनसंख्या के साथ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है। अनुमान है कि कुछ ही वर्षों में यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इंडोनेशिया को विकसित देश बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। अरबो डॉलर के निवेश के साथ नई राजधानी नुसनतारा को तैयार किया जा रहा है।
विकास की नई इबारत लिखता इंडोनेशिया
देश में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर किया जा रहा है। वीडोडो सरकार ने शुरुआत से ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया । सड़को, बंदरगाहों और रेलवे जैसे ढांचों पर खर्च को तिगुना किया गया।
इंडोनेशिया के लिए वरदान बना निकल
दरअसल, इंडोनेशिया में निकल धातु का भंडार है। निकल का इस्तेमाल स्टेनलेस स्टील और बैट्री बनाने में बहुत अहम होता है। लिथियम-आयन बैट्री, मोबाइल फोन और लैपटॉप में इसका इस्तेमाल होता है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में भी निकल इस्तेमाल किया जाता है। आने वाले समय में विश्व स्तर पर इसकी मांग और भी बढ़ने वाली है। इंडोनेशिया निकल उत्पादन में शीर्ष पर है। 2018 से ही सबसे ज्यादा निकल उत्पादन करने वाला देश बना हुआ है। और अब इंडोनेशिया अपने देश में ही बैटरी उत्पादन पर जोर दे रहा है । चीन और अमेरिका ने भी इंडोनेशिया में भरपूर निवेश किया है। इंडोनेशिया की विदेश नीति दोनों ही देशो के साथ दोस्ती की है। और इंडोनेशिया को इसका भरपूर आर्थिक फायदा भी मिल रहा है। इसमें कोई शक नहीं, इंडोनेशिया तेजी से दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल होने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है।