Friday, April 10, 2026
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सुप्रीम कोर्ट के बाद अब यूपी सरकार भी बनी आईआईटी के सफर में अतुल की मददगार

by KhabarDesk
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UP Govt Helped Atul

UP Govt Helped Atul : सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जहां अतुल को नया जीवन मिला, वहीं अब उत्तर प्रदेश सरकार ने अतुल की आई आई टी के सफर में आर्थिक मदद करने का फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट में केस जीत कर धनबाद आईआईटी में अपनी सीट वापस पाने वाले यूपी के दलित छात्र अतुल की चर्चा देश भर में हो रही है। अतुल की कहानी से हजारों गरीब संघर्षशील छात्रों को नई प्रेरणा मिली है। अतुल के संघर्ष को हर कोई सलाम कर रहा है। अब यूपी सरकार भी अतुल की मदद के लिए सामने आ गई है।

यूपी सरकार देगी अतुल को स्कॉलरशिप

अतुल की मदद के लिए अब उत्तर प्रदेश सरकार उसे स्कॉलरशिप देने जा रही है। मुजफ्फरनगर के रहने वाले अतुल को आईआईटी धनबाद में दाखिले के लिए सरकार पूरी मदद करेगी । उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग अतुल की फीस भरने के लिए उसे खास स्कॉलरशिप देने जा रहा है। अब अतुल की IIT की पूरी फीस यूपी सरकार द्वारा छात्रवृत्ति के रूप में दी जाएगी । समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अतुल की शिक्षा में कोई बाधा ना आए, इसलिए विभाग की ओर से उसकी IIT पाठ्यक्रम की पूरी फीस छात्रवृत्ति के माध्यम से अदा की जाएगी।

फीस न भर पाने से अतुल को आईआईटी में नहीं मिल पाया था दाखिला

आपको बता दें कि यूपी के मुजफ्फरनगर के खतौली तहसील के गांव टिटोड़ा में रहने वाले अतुल ने मुफ़लिसी के बाबजूद अपनी मेहनत के बल पर आईआईटी में सफलता हासिल की थी। उसे धनबाद आईआईटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में सीट भी अलॉट हुई थी। लेकिन अतुल जब तक फीस के पैसों का इंतजाम कर पाता, फीस भरने के लिए वेबसाइट ही बंद हो गई। अतुल के पिता राजेंद्र कुमार एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जिनकी एक दिन की दिहाड़ी मात्र 450 रुपए है। ऐसे में 17,500 की प्रारंभिक फीस जुटाने के लिए इस परिवार को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी और आखिरी वक्त में वेबसाइट बंद होने के कारण वह फीस जमा नहीं कर पाया था। जिस वजह से अतुल की सीट कैंसिल कर दी गई थी।

IIT सीट के लिए अतुल ने लड़ी कानूनी लड़ाई

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली के टिटोड़ा गांव के रहने वाले अतुल कुमार का जन्म एक गरीब दलित परिवार में हुआ था, लेकिन पढ़ाई में होनहार अतुल ने आईआईटी की तैयारी की और परीक्षा पास भी कर ली। आईआईटी धनबाद में दाखिले के लिए अतुल को 17,500 रूपये फीस भरनी थी, पर उसके गरीब परिवार के पास इतनी रकम नहीं थी और जब तक किसी तरह उन्होंने इस रकम का इंतजाम किया तब तक आखिरी दिन पर फीस भरने के लिए वेबसाइट ही बंद हो गई। अतुल पर मानो आसमान टूट पड़ा! पर फिर भी उसने हिम्मत जुटा कर अपने सपने को पूरा करने के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया।

अतुल को आईआईटी धनबाद में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की सीट अलॉट हुई थी। फीस भरने की आखिरी तारीख 24 जून थी। पैसे की तंगी झेल रहा अतुल का परिवार किसी तरह 24 जून की शाम तक पैसे जुटा पाया। शाम 4:45 पर अतुल ने फॉर्म भरने की कोशिश की, लेकिन वेबसाइट बंद हो गई, जबकि फॉर्म भरने की डेडलाइन 5:00 बजे की थी। फीस नहीं भर पाने की वजह से अतुल की सीट कैंसिल हो गई। इससे अतुल और उसके पिता राजेन्द्र अपने बेटे के सपने टूटता देख निराशा से घिर गया। लेकिन उसने हिम्मत नही हारी। एक मजबूर बाप अपने होनहार बेटे के सपने को बिखरते नही देख सकता। फिर शुरू हुई जीत के लिए जंग- अदालतों और कमीशन के दरवाजे खटखटाये गए। अतुल ने झारखंड हाईकोर्ट में अपना केस रखा। इसके बाद वह मद्रास हाई कोर्ट भी गया, जहां 24 सितंबर को सुनवाई हुई। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया ।

सुप्रीम कोर्ट ने खोला अतुल के लिए आईआईटी का दरवाजा।

आखिर वह घड़ी आ गई जब लगन, हिम्मत, धैर्य और न्याय के सामने गरीबी और तर्क को झुकना पड़ा। 30 सितंबर की सुबह की बेला अतुल और उसके पिता की दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी, लेकिन उन्हें न्याय पर भरोसा और विश्वास भी हो रहा था कि प्रतिभा को गरीबी के कुचक्र में यूं ही नही कुचल दिया जाएगा। आख़िरकार, 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अतुल के हक में फैसला सुनाया और कहा कि उसे आईआईटी धनबाद में एडमिशन मिलेगा। इस मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जी पादरी वाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने आईआईटी धनबाद को निर्देश दिया कि अतुल को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में दाखिला दिया जाए।

अब यूपी सरकार से छात्रवृत्ति मिलने के बाद अतुल और उसके परिवार को इत्मीनान है कि आईआईटी में आगे की पढ़ाई वह बिना फीस की चिंता के कर पाएगा।

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