JSW Steel Share : एक बेटे ने यह कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि अचानक एक सुबह घर के कबाड़ से उसकी किस्मत का ताला खुलने वाला है। घर के कबाड़ से बेटे की लॉटरी लग गई और लॉटरी भी कोई छोटी-मोटी नहीं, रातो – रात बेटा करोड़ो का मालिक बन गया। यह ना तो यह कोई फिल्मी कहानी है और ना ही कोई सपना।
बेटा घर की साफ सफाई कर रहा था और इस दौरान उसे साफ-सफाई में कुछ पुराने कागज मिले। कागज फेंकने से पहले वह उन्हें गौर से देखने लगा, यह कागज और कुछ नहीं एक कंपनी के शेयर थे, जो 1990 के दशक में खरीदे गए थे। 90 के दशक में इस युवक के पिता ने एक कंपनी के शेयर में 1 लाख रुपए का निवेश किया था। जब बेटे ने ध्यान से उसे पढ़ा तो उसके होश उड़ गए। यह 1 लाख का निवेश 80 करोड़ से ज्यादा का बन चुका था। बाप के छोड़े गए इन कागजों से बेटा एक ही दिन में 80 करोड़ का मालिक बन गया था। क्या है पूरी कहानी आपको बताते हैं। सौरव दत्ता नाम के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा की है।
घर के कबाड़ में मिले करोड़ों के शेयर सर्टिफिकेट
1990 के दशक में सौरव दत्ता के पिता ने जिंदल विजय नगर स्टील लिमिटेड के 5000 शेयर खरीदे थे, उसे समय इन शेयरों की कीमत 1 लाख रुपए थी। पिता ने इन शेयर सर्टिफिकेट को लेकर रख दिया समय बीतता गया और कुछ समय बाद वह अपने इस निवेश के बारे में भूल भी गए और यह सर्टिफिकेट घर के किसी कोने में यूं ही पड़े रहे। शेयर को खरीदे हुए 30 साल से अधिक का समय बीत चुका था । एक दिन अचानक सौरव दत्ता को घर की सफाई करते हुए यह कागज मिल गए पहले तो उन्होंने इन कागजों को बेकार समझा लेकिन फिर उन्होंने इन्हें गौर से देखा तो समझ आया कि यह शेयर सर्टिफिकेट है, फिर उन्होंने कुछ छानबीन की तो उन्हें पता चला कि यह शेयर जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel Share) के शेयर हैं और जो आज की तारीख में 80 करोड रुपए के हो चुके हैं। यानी 30 साल पहले किया गया एक लाख का निवेश अब 80 करोड़ का बन चुका है।
30 साल में 1 लाख का निवेश बना 80 करोड़
आप सोच रहे होंगे कि 30 साल में 1 लाख की रकम आखिर 80 करोड़ में कैसे बदल गई। इसका जवाब है शेयर मार्केट में कंपाउंडिंग की वजह से पैसा कई गुना बढ़ जाता है। और शेयर में कई बार स्प्लिट और विलय होने की वजह से भी पैसा तेज रफ्तार से बढ़ता है। इस शेयर में भी कुछ ऐसा ही हुआ। 2005 में जिंदल विजयनगर स्टील का विलय जेएसडब्ल्यू स्टील JSW Steel में हो गया था। उस समय विलय का अनुपात था 1:16 था। यानी जिंदल विजयनगर स्टील के एक शेयर के बदले जेएसडब्ल्यू स्टील के 16 शेयर प्राप्त हुए। इस तरह विलय के बाद 5000 शेयर 80000 शेयर हो गए।
30 साल में एक लाख पर 85 करोड़ से ज्यादा का फायदा
इसके बाद फिर 2017 में जेएसडब्ल्यू स्टील ने अपने शेयर में स्प्लिट किया । ये स्प्लिट 1: 10 के अनुपात में था यानी एक शेयर के बदले 10 से शेयर। अब सौरव दत्ता के पिता के पास 80000 से बढ़कर 8 लाख शेयर हो चुके थे। आज की तारीख में जेएसडब्ल्यू स्टील का एक शेयर लगभग 1 हजार रुपए का है तो उस हिसाब से 8 लाख शेयर की कीमत लगभग 80 करोड़ बन चुकी है। यानी की 30 साल में निवेश 800 गुना बढ़ गया। सौरव दत्ता को केवल शेयरों की बढ़ी कीमत ही नहीं मिली बल्कि उन्हें कंपनी द्वारा मिलने वाले डिविडेंड यानी लाभांश का भी फायदा मिला है। कंपनी समय-समय पर शेयरधारकों को अपने लाभ में से कुछ हिस्सा देती है और इसे ही डिविडेंड कहा जाता है। और इस डिविडेंड से मिली रकम भी करोड़ों में थी। अगर 1995 से लेकर अब तक मिले डिविडेंड की गणना की जाए तो इस शेयर में सौरव दत्ता को लगभग 5 करोड़ रुपए डिविडेंड के रूप में प्राप्त हो चुके हैं।
तो आप समझ सकते हैं कि शेयर में निवेश किसी की पूरी जिंदगी भी बदल सकता है। हो सकता है कि आपका आज का किया निवेश आपके बच्चों के लिए भी कल अकूत संपत्ति का खजाना खड़ा कर दे।
Disclaimer: शेयर मार्केट में किसी भी तरह का निवेश अपने विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।