Sikkim : किसी देश के भू राजनीतिक इतिहास में ऐसे उदाहरण कम ही होते हैं जब वह खास भूभाग, संप्रभु राष्ट्र का हिस्सा बनकर तरक्की की बुलंदियों पर पहुंच जाता है। दिल्ली से तकरीबन ढेड़ हजार किलोमीटर दूर सुदूर पूर्व में बसा एक खूबसूरत सा भूभाग है, जो कभी ब्रिटिश रियासत का हिस्सा रहा था, आज अपनी आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक पहचान के कारण भारत का महत्वपूर्ण और अनोखा भूभाग है। यहां सैलानियों की मौजूदगी हमेशा बनी रहती है। इस खूबसूरत भूभाग का इतिहास बड़ा ही रोचक है। ईसा पूर्व 1500 से इसकी सभ्यता और विकास की यात्रा शुरू होती है और आज यह भारत के एक आधुनिक विकसित राज्य के तौर पर अपनी पहचान बना चुका है। आइए एक नजर डालते हैं इसके इतिहास पर।
पूर्वी हिमालय में एक संप्रभु राजशाही राज्य था। 17 वीं सदी में स्थानीय शासको के हाथों से निकल कर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया। वहां के मूल निवासी लेप्चा मुख्य रूप से उस भूभाग के शासक भी थे। जी हां हम बात कर रहे हैं सिक्किम की। 17वीं शताब्दी में चोग्याल के अधीन बौद्ध साम्राज्य की स्थापना के बाद सिक्किम में ब्रिटिश शासन आया और उसके बाद स्वतंत्रता के बाद इसे भारत के आधिकारिक राज्य के रूप में शामिल किया गया।
आज से ठीक 50 बरस पहले भारत का एक पूर्वोत्तर राज्य, भारत में शामिल हुआ था। आज यह राज्य तरक्की और आधुनिकता की नई इबारत लिख रहा है। 16 मई 1975 को पूर्वोत्तर का यह बेहद खूबसूरत पर्वतीय राज्य भारत में शामिल हुआ था। भारत के 22 वें राज्य के रूप में यह हिमालयी क्षेत्र पूरे गौरव के साथ भारत में शामिल हुआ और आज 50 साल बाद यह राज्य अपनी तरक्की के लिए जाना जाता है और विकास की नित नई कहानी कह रहा है। विकास के कई पैमानों पर यह राज्य आज भारत में नंबर एक पर है ।
प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह हिमालयी राज्य है सिक्किम। जहां पर प्रति व्यक्ति आय देश भर में सबसे अधिक है। जहां 90% से ज्यादा साक्षरता दर है। ये देश का पहला पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक फार्मिंग स्टेट है, और भी बहुत सी खासियत है इस राज्य में जो हम आपको आगे बताएंगे। पहले जानते हैं इस राज्य का इतिहास।
सिक्किम का इतिहास
सिक्किम का इतिहास बहुत पुराना है, यहाँ के लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं बहुत समृद्ध हैं। सिक्किम में सबसे पहले किरात लोगों का निवास था, जो 1500 ईसा पूर्व से इस क्षेत्र में रहते थे। बाद में लेप्चा और लिम्बू जनजातियों ने भी यहाँ बसना शुरू किया। लेप्चा लोग बोंग्थिज्म और मुनिवाद या एनिमिज़्म के अनुयायी थे, जबकि लिम्बू लोग युमसवाद या यूमा साममाङ के अनुयायी थे। एक पौराणिक कथा के अनुसार किराती लोग सिक्किम की प्राचीन जनजातीयां हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव शिकारी केरातेश्वर या कीरातों के भगवान के रूप में अर्जुन के सामने उस स्थान पर प्रकट हुए थे जहां प्राचीन केरातेश्वर मंदिर लेगशिप पश्चिम सिक्किम में स्थित है।
बौद्ध धर्म का आगमन : 8वीं शताब्दी में बौद्ध भिक्षु गुरु रिन्पोचे ने सिक्किम का दौरा किया और बौद्ध धर्म का प्रचार किया। उन्होंने सिक्किम को लेकर भविष्यवाणी की कि एक दिन यह एक शक्तिशाली राज्य बनेगा।
राजतंत्र की स्थापना : 1642 में फुन्त्सोंग नामग्याल को सिक्किम का पहला चोग्याल (राजा) घोषित किया गया। उनके वंशजों ने सिक्किम पर शासन किया। सन् 1700 में सिक्किम पर भूटान का आक्रमण हुआ, और बाद में नेपाल ने भी सिक्किम पर हमला किया। सिक्किम ने तिब्बत की मदद से इन हमलों का सामना किया। 19वीं शताब्दी में सिक्किम ने ब्रिटिश भारत के साथ संबंध स्थापित किए। 1817 में सिक्किम और ब्रिटिश भारत के बीच तितालिया संधि हुई, जिससे सिक्किम को नेपाल द्वारा अधिकृत क्षेत्र वापस मिल गया।
भारत में विलय
1975 में सिक्किम ने भारत में विलय के लिए जनमत संग्रह किया, जिसमें 97.5% लोगों ने भारत में विलय के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया।
विकास से कदमताल मिलाता आधुनिक सिक्किम
आज सिक्किम प्रगति के नित नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है, यहाँ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति बहुत विकसित है। सिक्किम ने पर्यटन और कृषि के क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। आर्थिक तरक्की की बात की जाए तो सिक्किम आर्थिक विकास और मानव विकास के लिहाज से शीर्ष पर है।
देश में सिक्किम की प्रति व्यक्ति आय सबसे अधिक 7.07 लाख रुपए है।
2011 के बाद से 13.1% जीएसडीपी वृद्धि के साथ सिक्किम देश में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
राज्य की उच्चतम श्रम शक्ति भागीदारी दर 61.7% है, जो प्रभावी डेमोग्राफिक डिविडेंड के असर को दर्शाती है।
सिक्किम राज्य साफ पानी, स्वच्छता और मौसम के लिहाज से ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है।
गरीबी उन्मूलन में शीर्ष प्रदर्शन : सिक्किम देश भर में गरीबी सूचकांक में 0.011 के साथ सबसे कम गरीबी दर वाला राज्य है। साथ ही ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में भी बेहतर प्रदर्शन करने वाला राज्य है। पूरे राज्य में विकसित, सक्षम और निशुल्क हेल्थ केयर सिस्टम है। राज्य में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 शिशु जन्म पर मात्र 4 है जो भारत में सबसे कम है।
साक्षरता में है आगे
सिक्किम में हर बच्चे के लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था है। यहां की साक्षरता दर 90.67 % है। छात्र- शिक्षक दर भी यहां श्रेष्ठ मानको के अनुरूप है।
प्रकृति के साथ सामंजस्य
सिक्किम देश का पहला ऐसा राज्य है जो पूरी तरह से ऑर्गेनिक फार्मिंग स्टेट है। सिक्किम, केमिकल फर्टिलाइजर, पेस्टिसाइड और सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला राज्य है। इसके साथ ही सिक्किम में पोर्टेबल मिनरल वाटर बोतल पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध है। अपनी जैव विविधता के लिए भी सिक्किम मशहूर है जहां 4000 से ज्यादा फूलों की प्रजातियां हैं। 574 पक्षियों की प्रजातियां निवास करती हैं। भारत की पुष्प प्रजातियों का 26 फीसदी हिस्सा सिक्किम में पाया जाता है। सिक्किम में 47.08% वन आवरण है जो इस राज्य को प्राकृतिक जैव विविधता से संपन्न रखता है। सिक्किम में कई यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी हैं। सिक्किम राज्य क्लीन, ग्रीन और सस्टेनेबल लिविंग में एक अग्रणी राज्य है, जहां स्वच्छता पेयजल और बिजली की व्यवस्था शत प्रतिशत यानी 100% है।
राज्य की हरियाली को बनाए रखने के लिए राज्य में Mero Rukh -Mero Santati अभियान चलाया जा रहा है जिसमें हर बच्चे के जन्म के साथ 108 पेड़ लगाए जाते हैं। सिक्किम के इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। COP 28, दुबई में इस इनीशिएटिव को सराहा जा चुका है।
सस्टेनेबल पर्यटन मॉडल
सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता को निहारने के लिए देश विदेश से यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। पर्यटकों की आमद के बावजूद यहां की प्राकृतिक सुंदरता से खिलवाड़ ना हो इसलिए सिक्किम ने देश में एक सस्टेनेबल पर्यटन मॉडल स्थापित किया है। जहां प्रकृति से छेड़छाड़ किए बिना ही पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें होमस्टे ,Eco – trails, और पुरानी झीलों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सिक्किम प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।
सिक्किम के प्रमुख पर्यटन स्थल:
यहां पर पर्यटक खास तौर से नाथूला दर्रा देखने के लिए आते हैं।
कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान यहां का एक प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य और पर्यटन स्थल है।
सिक्किम की राजधानी गंगटोक अपने खूबसूरत दृश्यों और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। सिक्किम की त्सोमगो झील अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती है।
सिक्किम महिला सशक्तिकरण को लेकर भी एक उदाहरण योग्य व अनुकरणीय राज्य बन गया है। जहां राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33% आरक्षण प्राप्त है। शहरी और ग्रामीण निकायों में भी महिलाओं को 50% आरक्षण हासिल है। कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी सिक्किम अग्रणी है। जहां पर कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं राज्य की जरूरतमंद महिलाओं के लिए चलाई जा रही है। जिसमें गैर कामकाजी महिलाओं को आर्थिक मदद देने के लिए Sikkim Aama योजना चलाई जाती है। Aama Sashaktikaran योजना के तहत बीपीएल श्रेणी की महिलाओं को साल में 4 मुफ्त एलपीजी गैस सिलेंडर रिफिल दिए जाते हैं।
सिक्किम राज्य ने हर क्षेत्र में राज्यवासियों के लिए खुशहाली के नए रास्ते खोले हैं। सिक्किम ने 2027 तक शून्य गरीबी (Zero Poverty),100% साक्षरता और हर परिवार के लिए आरसीसी छत वाला घर सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।