Book on Prime Minister Office : प्रधानमंत्री का पद भारतीय राजनीति और संसदीय शासन व्यवस्था की धुरी कहा जा सकता है। शक्ति और सत्ता के इस सर्वोच्च शिखर से पिछले 78 वर्षों में भारतीय गणराज्य कई मुकाम तय करता हुआ अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को संजोकर, संघर्ष और अंतर्विरोधों से उभरकर निरंतर प्रगति करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रख कर भारतीय शासन व्यवस्था को संचालित करता रहा है। और इस यात्रा के शीर्ष किरदार, भारत के सभी प्रधानमंत्रियों ने समय और परिस्थितिजन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री के पद पर रहे सभी नेताओं ने देशकाल और परिस्थिति के अनुरूप राजनीतिक फैसले लिए जिस वजह से भारत के परिपक्व लोकतंत्र को बनाने की यात्रा आज भी अग्रसर है।
देश के 14 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल का आकलन करते हुए किताब ” The Prime Minister : Discourses in Indian Polity'” का 3 अप्रैल की शाम को दिल्ली के तीन मूर्ति भवन स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय के सभागार में विमोचन किया गया। डॉक्टर अनिल सिंह द्वारा लिखित इस किताब के विमोचन के मौके पर देश की कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां, मंत्री, सांसद, पत्रकार, शिक्षा विद, कानूनविद, व समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने पुस्तक का विमोचन किया।
PMO पर लिखी किताब
डॉ अनिल सिंह द्वारा देश के 14 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल पर लिखी गई पुस्तक न सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों और देश की राजनीतिक व्यवस्था पर असर डालने वाले फैसलों का अहम दस्तावेज है, बल्कि अकादमिक रूप से राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए भी यह किताब काफी महत्वपूर्ण है। डॉ अनिल सिंह ने इस किताब में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की इतने सालों में हुई सतत विकास प्रक्रिया और भारतीय राजनीति में उनके योगदान को रेखांकित किया है।
किताब के विषय में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान का जिक्र करते हुए प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पीएम की राजनीतिक यात्रा को देश के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत के एक मजबूत वैश्विक ताकत के रूप में उभरने की बात कही। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने डॉक्टर अनिल सिंह को उनकी पुस्तक के लिए बधाई देते हुए इस किताब को शैक्षणिक जगत के लिए असाधारण योगदान बताया। उन्होंने कहा यह पुस्तक न सिर्फ राजनीति विज्ञान और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण रिसोर्स साबित होगी वरन भारतीय राजनीति के विकास में रुचि रखने वाले बौद्धिक लोगों के लिए भी यह पुस्तक भारतीय शासन तंत्र की बारीकियां समझने में मदद करेगी।
78 साल, नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक 14 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल का विश्लेषण
प्रोफेसर बघेल ने भी डॉक्टर अनिल सिंह के लेखन की तारीफ करते हुए कहा कि काफी गहन शोध और लगन के साथ इस किताब को लिखा गया है। यह किताब भारतीय राजनीति को रेखांकित करने में अहम भूमिका निभाएगी। पुस्तक के विमोचन के मौके पर सभागार में देश के जाने-माने शिक्षाविद, कानून और न्याय विद, अधिकारी, न्यायपालिका के सदस्य, दिल्ली विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रेखा सक्सेना व गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति भी मौजूद थे।
प्रोफेसर रेखा सक्सेना ने भी किताब की खूबियों की चर्चा करते हुए बताया की किताब में 7 अध्यायों में प्रधानमंत्री पद व उसके क्रमिक विकास का गहराई के साथ विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा यूनियन एग्जीक्यूटिव पर यह शोध परक पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी। जिसमें पिछले कई दशकों के दौरान प्रधानमंत्री पद व कार्यालय के महत्व, बदलती भूमिका और योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई है। आईपी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर महेश वर्मा ने भी किताब की उपयोगिता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह किताब समकालीन भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को उसके विकास क्रम की श्रृंखला के साथ समझने के लिए एक उपयुक्त माध्यम साबित होगी।
कार्यक्रम में लोकसभा के सदस्य तारिक अनवर और बीजेपी के नेता शाहनवाज हुसैन भी मौजूद थे। कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने किताब को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारतीय राजनीति के विकास में सभी प्रधानमंत्रियों का योगदान रहा है। उन्होंने कहा देश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में एक मजबूत भारत की बुनियाद बनाने में पं. जवाहरलाल नेहरू का योगदान अभूतपूर्व है और बाद में आने वाले प्रधानमंत्रियो ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में किताब के लेखक डॉक्टर अनिल सिंह ने अपने लेखन पर बोलते हुए कहा कि किताब लिखना और खास कर अकादमिक पुस्तक का लेखन एक कठिन प्रक्रिया है, इसमें गहन शोध करना पड़ता है और सालों की कड़ी मेहनत के बाद एक किताब तैयार होती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह किताब राजनीति के छात्रों, नीति निर्माताओं और भारतीय लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण संकलन का कार्य करेगी। डॉ अनिल सिंह भारतीय राजनीति पर कई किताबें लिख चुके हैं। बिहार के सिवान जिले के रहने वाले डॉक्टर अनिल सिंह ने एक पत्रकार के रूप में भी भारतीय राजनीति और नेताओं की कार्यशैली को काफी करीब से देखा है। वे दूरदर्शन, स्टार न्यूज़ और आज तक जैसे मीडिया संस्थानों में काम चुके हैं। पत्रकारिता के साथ उनकी शैक्षणिक यात्रा भी चलती रही। दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए, एमफिल और पीएचडी की डिग्री हासिल करने के साथ राजनीति के विभिन्न पहलुओं पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिख चुके हैं।
अंशु नैथानी