Friday, January 16, 2026
Home बिज़नेस टाटा के नाम के साथ भरोसे को कायम करने वाले रतन टाटा ने बनाई थी अनूठी विरासत

टाटा के नाम के साथ भरोसे को कायम करने वाले रतन टाटा ने बनाई थी अनूठी विरासत

Ratan Tata Legacy

by KhabarDesk
0 comment
Ratan Tata

Ratan Tata Legacy: रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था। लेकिन उनका और उनके छोटे भाई जिमी का पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई आर टाटा ने मुंबई में टाटा पैलेस में किया था। संपन्न औद्योगिक घराने में जन्म लेने के कारण उन्हें शुरुआती जीवन में हर तरह की लग्जरी मिली थी ,छोटे रतन को रोल्स-रॉयस में स्कूल भेजा जाता था।  लेकिन उनकी दादी नवाजबाई, एक मजबूत और दृढ़संकल्प वाली महिला थी, जो अपने पोते पोतियो में अच्छे मूल्यों की नींव डालना चाहती थी। और इसलिए वे उन्हें जितना प्यार करती थीं, मौका पड़ने पर सख्ती से पेश भी आती थीं । रतन टाटा ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था “वह बहुत लाड़-प्यार करने वाली थीं, लेकिन अनुशासन के मामले में भी काफी सख्त थीं।”  “हम बहुत संरक्षित थे और हमारे बहुत ज़्यादा दोस्त नहीं थे। मुझे पियानो सीखना पड़ा और मैंने बहुत क्रिकेट खेला।”

उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में चले गए, एक ऐसा देश और एक ऐसी जीवन शैली और मानसिकता जिससे रतन टाटा को प्यार हो गया। कॉर्नेल में उन्होंने वास्तुकला और संरचनात्मक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, और 1955 से 1962 तक अमेरिका में बिताए गए समय ने उनके आने वाले जीवन को बहुत प्रभावित किया। यह कई मायनों में उनके निर्माण का काल था। उन्होंने लगभग पूरे अमेरिका की यात्रा की और कैलिफोर्निया और पश्चिमी तट की जीवनशैली से प्रभावित होकर वे लॉस एंजिल्स में ही बसना चाहते थे।

लेकिन लॉस एंजेलिस में उनके बसने का सपना टूट गया क्योंकि उनकी दादी नवाजबाई की तबीयत खराब हो गई, जिससे रतन टाटा को मजबूरन उस जीवन में लौटना पड़ा जिसे उन्होंने पीछे छोड़ दिया था। “मैं लॉस एंजिल्स में था और बहुत खुश था। और जब मैं वहां से चला गया तो भी मैं वहीं था, जबकि मुझे वहां से चले जाना चाहिए था,” रतन टाटा ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था।

फिर उन्होंने अपने परिवार की विरासत संभाली । 1962 में रतन टाटा को समूह की प्रवर्तक कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज में नौकरी का प्रस्ताव मिला (उन्होंने 1963 में टिस्को (अब टाटा स्टील) में शामिल होने से पहले टेल्को (अब टाटा मोटर्स) में छह महीने काम किया।

टाटा समूह में नियंत्रण और विश्वास जीतने में काम आई यह रणनीति

1993 में जेआरडी के निधन के बाद समूह पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए रतन टाटा को संघर्ष भी करना पड़ा, कई बार उनकी आलोचना हुई। लेकिन वह शांत और शालीन बने रहे। शांत रहकर उन्होंने अपने काम से ही हर आलोचना का जवाब दिया।

यह रतन टाटा की शैली थी,अपने तरीके से काम करना, शांत और शालीन बने रहना। उन्होंने कभी भी  किसी आलोचना का पलट कर जवाब नहीं दिया उनकी शालीनता ही उनकी पहचान थी।

रतन टाटा के शौक

रतन टाटा ने वास्तु कला की पढ़ाई की थी और यह उनका शौक भी था, जिसे उन्होंने समय मिलने पर पूरा भी किया। उन्होंने अपनी मां के लिए एक घर डिज़ाइन किया था, अलीबाग में एक निवास और मुंबई में समुद्र के किनारे  अपना घर भी उन्होंने खुद डिजाइन किया था।

रतन टाटा को हवा में उड़ान भरने और तेज़ कारों का शौक था, ये दोनों ही शौक कॉर्नेल  में पैदा हुए थे, उन्हें स्कूबा डाइविंग भी पसंद थी।

शराब न पीने वाले और धूम्रपान न करने वाले रतन टाटा ने जानबूझकर अविवाहित रहने का फैसला किया था। शायद वह  अपना पूरा जीवन और पूरी ऊर्जा टाटा समूह के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लगाना चाहते थे। मुंबई में अपने किताबों से भरे घर में उनके साथ उनके जर्मन शेफर्ड, टीटो और टैंगो रहते थे और उनके प्रति उनका लगाव हमेशा असीम था।

उन्हें कुत्ते पालने का भी बहुत शौक था, उन्होंने एक बार कहा था, “पालतू जानवरों के रूप में कुत्तों के लिए मेरा प्यार हमेशा मजबूत रहा है और जब तक मैं जीवित रहूंगा, तब तक यह जारी रहेगा।”

रतन टाटा के जीवन के अहम पड़ाव

1937 – रतन टाटा का जन्म सूनू और नवल टाटा के घर हुआ।
1955: 17 वर्ष की आयु में पढ़ाई के लिए कॉर्नेल विश्वविद्यालय (इथाका, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका) चले गए ; सात वर्ष की अवधि में वास्तुकला और इंजीनियरिंग का अध्ययन किया।
1962: वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्रदान की गई।
1962: टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा समूह में शामिल हुए; उसी वर्ष बाद में, टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने का प्रशिक्षण लिया।
1963: प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी या टिस्को (जिसे अब टाटा स्टील कहा जाता है) के जमशेदपुर कारखाने में स्थानांतरित हुए।
1965: टिस्को के इंजीनियरिंग प्रभाग में तकनीकी अधिकारी नियुक्त किये गये।
1969: ऑस्ट्रेलिया में टाटा समूह के स्थानीय प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया।
1970: भारत लौटकर कुछ समय के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में शामिल हुए, जो उस समय एक सॉफ्टवेयर कंपनी थी।
1971: उन्हें नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स (जिसे नेल्को के नाम से जाना जाता है) का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया।
1974: टाटा संस के बोर्ड में निदेशक के रूप में शामिल हुए।
1975: हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया।
1981: टाटा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नियुक्त किये गये; इसे उच्च प्रौद्योगिकी व्यवसायों के प्रवर्तक में बदलने की प्रक्रिया शुरू की गयी।
1983: टाटा रणनीतिक योजना का मसौदा तैयार किया गया।
1986-1989: राष्ट्रीय विमानन कम्पनी एयर इंडिया के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
25 मार्च, 1991: जेआरडी टाटा से टाटा संस के अध्यक्ष और टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष का पदभार संभाला।
1991: टाटा समूह का पुनर्गठन उस समय शुरू हुआ जब भारतीय अर्थव्यवस्था का उदारीकरण चल रहा था।
2000 के बाद: टाटा समूह के विकास और वैश्वीकरण अभियान ने उनके नेतृत्व में गति पकड़ी और  टाटा ने कई उच्च-प्रोफ़ाइल अधिग्रहण किए, जिनमें टेटली, कोरस, जगुआर लैंड रोवर, ब्रूनर मोंड, जनरल केमिकल इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और देवू शामिल हैं।
2008: टाटा नैनो की शुरुआत की , जो हर भारतीय को कार देने के उनके सपने की परियोजना का परिणाम थी। जिसका उन्होंने उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ मार्गदर्शन किया।
2008: भारत सरकार द्वारा देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
दिसंबर 2012: टाटा समूह में 50 वर्षों तक रहने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष पद से हटे; टाटा संस के मानद अध्यक्ष नियुक्त किये गये।
अक्टूबर 2024: श्री टाटा का 86 वर्ष की आयु में निधन ।

रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की, वह आजीवन अविवाहित रहे लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन टाटा समूह को उन मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने के लिए लगा दिया जिसके लिए टाटा जाना जाता है।  टाटा के नाम के साथ उस भरोसे को कायम किया जो उनकी विरासत संभालने वालों  के लिए  एक  बड़े और मजबूत आधार स्तंभ (Ratan Tata Legacy) के रूप में मौजूद रहेगा।

You may also like

Leave a Comment

About Us

We’re a media company. We promise to tell you what’s new in the parts of modern life that matter. Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo. Sed consequat, leo eget bibendum sodales, augue velit.

@2022 – All Right Reserved. Designed and Developed byu00a0PenciDesign