Punjab Farmer using solar technology reduces electricity bills : आजकल टेक्नालॉजी से भरी जिन्दगीं में घर में हर समान का यूज बिजली के माध्यम से होता है, फिर चाहे वो पंखा हो, एसी हो, कूलर हो या फिर पानी की मोटर । सभी चीजें बिजली से चलती हैं। इतने सारे उपकरण बिजली से चलने के कारण बिजली के बिल आसमान को छूते हैं। आज हम कुछ ऐसे खास लोगो के बारे मे बताने जा रहें हैं जो सभी उपकरण का प्रयोग करने के बाद भी अपने घर का बिजली का बिल जीरो कर चुके हैं । जी हाँ आपको जान कर हैरानी होगी की इतना सब इस्तेमाल होने के बाद भी बिजली का बिल जीरो कैसे हो सकता है । तो आइये जानते हैं कैसे ऐसा मुमकिन है ।
खुशविंदर सिंह ने अपने घर का बिजली का बिल किया जीरो :
पंजाब के छोटे से गाव मे रहने वाले खुशविंदर सिंह ने नई सोलर टेक्नालॉजी से अपने घर का बिजली का बिल जीरो कर दिया है । इनके घर से लेकर खेतों तक इस्तेमाल होने वाली बिजली सौर्य उर्जा से चलती है। जिस तरह से देश में बिजली की दर लगातार बढ़ती जा रही है उसकी वजह से महीने का बिजली का बिल भरना काफी मुश्किल होता जा रहा है। इस परेशानी को देखते हुए सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाना काफी फायदेमंद हो सकता है । आप इसको घर या ऑफ़िस किसी भी जगह लगवा सकते हैं। आप इसको 1 लाख से कम के खर्च में अपने घर या ऑफिस में लगवा सकते हैं । इसके बाद आने वाले महीने के बिजली के बिल को जीरो कर सकतें हैं ।
जंगल बसाने के साथ सोलर बिजनेस भी करते है:
किसान खुशविंदर सिंह 50 एकड़ की जमीन में खेती करतें हैं । इनका अपना एक सोलर बिजनेस भी। उन्होने यह बिजनेस पैसे कमाने के लिये नही किया है बल्कि इसलिये शुरु किया क्योंकि उनको प्रकृति और पर्यावरण से बहुत प्रेम है। उनका पर्यावरण से यह लगाव उनको प्रकृति के नजदीक ले आया और कुछ नया करने के लिये प्रेरित करने लगा। साल 2014 में जब उन्हे सहजन के फायदे के बारें मे पता चला तो उन्होंने इसके पौधे लगाने शुरु किये और देखते-देखते एक जंगल खड़ा कर दिया। इसमें और भी कई प्रकार के पौधे लगाये।आम, नीम, पीपल, बरगद,आदि कई वृक्ष जो घने और छायादार होते हैं । तब से लेकर अब तक खुशविंदर अब तक 50,000 पौधे लगाकर बांट चुके हैं । ये घना जंगल पंछियों का घर बन चुका है ।
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी हैं:
खुशविंदर सिंह ने घर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को भी तैयार किया है। ये सिस्टम इस प्रकार बना हुआ है कि कैसा भी पानी हो वह फ़िल्टर हो कर जमीन में चला जाता है । उनकी इस पहल से आसपास रहने वाले लोगों को पूरे साल पानी की कमी नही रहती है। यह सारा पानी 4 तरह के कैनाल से होकर फ़िल्टर होता है और फिर जमीन में चला जाता है । वह अपने यहां निकलने वाले एसी के पानी को भी बरबाद नही होने देते हैं। वह इस पानी को इकट्टा करके पोछे के लिये इस्तेमाल करते हैं। घर से निकलने वाले गीले कूड़े से वह बायोगैस बनाने का काम करते हैं। घर के बगीचे में खाने के लिये हर प्रकार की सब्जी ऊगाई जाती है ।
खेती में करते है DSR तकनीक का इस्तेमाल:
खेती में भी वह ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान ना हो। वह धान की फसल रोपने में डीएसआर (DSR Direct sowing of rice) की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। जिसमे 25% तक पानी की बचत होती है। इसके साथ ही पराली जलाने के बदले उससे बायोमास बनाते हैं। उनके खेत में 3 सोलर उपकरण लगे हुए हैं। खेत में पानी भी सोलर की मदद से चलाते हैं। इसकी वजह से डीजल में होने वाला खर्चा भी बच जाता है । इसके साथ ही प्रदूषण भी कम हो गया है । खुशविंदर का ये मानना है कि पर्यावरण को बचाने के साथ वह अपनी आने वाली पीढ़ी के लिये साफ और स्वच्छ वातावरण छोड़ कर जायेंगे।
बबीता आर्या