Friday, January 16, 2026
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National Rural Livelihood Mission: क्यों चर्चा में है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जो संगठन से पहुंचा रहा समृद्धि तक

National Rural Livelihood Mission: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक महत्‍वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्‍य गरीबों के लिए सामुदायिक संस्था‍नों की स्‍थापना करना और इसके विस्तार से ग्रामीण गरीबी को समाप्त करना  है।

by Khabar Talli
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National Rural Livelihood Mission

National Rural Livelihood Mission : देश भर में गाँव देहात स्तर पर , नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ,केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) इन दिनो ख़ासी चर्चा में है। यूं तो इस योजना की शुरुआत जून 2011 में ही भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा कर दी गई थी। और उसके बाद चरण बद्ध तरीक़े से इस योजना में साल दर साल नए नए आयामो को जोड़ कर इसे और प्रभावी बनाया जा रहा है। सबसे नई कड़ी में सीमांत ग्रामीण महिलाओं के लिए  “संगठन से समृद्धि” अभियान की शुरुआत की गई  है। इस अभियान का शुभारंभ केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने इसी वर्ष अप्रेल 2023 में कर दिया था जिसके परिणाम अब दिखाई देने लगें हैं।

क्या है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना (DAY-National Rural Livelihood Mission) ?

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक महत्‍वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्‍य गरीबों के लिए सामुदायिक संस्था‍नों की स्‍थापना करना और इसके विस्तार से ग्रामीण गरीबी को समाप्त करना  है।  इस योजना का मुख्य मकसद किसी प्रकार के सरकारी भत्ते पर निर्भरता के बजाय आजीविका के विविध स्रोतों को प्रोत्‍साहन देना है। केन्‍द्र द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम को राज्‍यों के सहयोग से लागू किया गया है। इस मिशन को 2011 में लॉंच किया गया था। पिछले तीन वर्षों में इस मिशन का तेजी से विस्‍तार हुआ है। वित्‍त वर्ष 2017-18 के दौरान 820 अतिरिक्‍त प्रखंडों को इस योजना से जोड़ा गया है। यह मिशन 29 राज्‍यों और 5 केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 586 जिलों के अंतर्गत 4,459 प्रखंडों में लागू किया गया है।

2018 से दिखने लगे परिणाम

वित्‍त वर्ष 2017-18 के दौरान पूरे देश में 6.96 लाख स्‍वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्‍यम से 82 लाख परिवारों को जोड़ा गया। 40 लाख स्‍वयं-सहायता समूहों के माध्‍यम से 4.75 करोड़ महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा गया। इन सामुदायिक संस्‍थानों को 4,444 करोड़ रुपये की धनराशि भी आवंटित की गई।

2023 में शुरू हुआ  “संगठन से समृद्धि-अभियान

केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ने “संगठन से समृद्धि- किसी ग्रामीण महिला को पीछे नहीं छोड़ना अभियान की शुरुआत की गई है। इस योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह द्वारा सभी दूर दराज के ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करना है.

संगठन से समृद्धि अभियान क्या है

इस अभियान का मकसद ग्रामीण इलाकों की 10 करोड़ महिलाओं को संगठित करना है।  इस योजना का उद्देश्य सेल्फ हेल्प ग्रुप द्वारा सभी दूर दराज के ग्रामीण परिवारों को एकत्रित करना है।  इस योजना का लक्ष्य 1 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाने का है जो सभी राज्यों में चलाया जा रहा है । इस योजना द्वारा ग्राम संगठनों को आपस में जोड़कर अपने सफल अनुभव बताते हुए परिवारों को इस योजना में शामिल करने के लिए प्रेरित करना भी है।  इस अभियान के जरिए स्वयं सहायता समूह के बैंक खाता खोले जाते हैं और अन्‍य हितधारकों द्वारा संवर्द्धित SHG का सामान्‍य का डेटाबेस तैयार किया जाता है ।

महिलाओं के लिए योजनाएं (Govt. Scheme for Women)

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना :  इसका मकसद ऐसे कृषि योजनाओं को बढ़ावा देना है जो महिला किसानों की आय में बढ़ोतरी करें और साथ ही उनमें लागत भी कम आए और जोखिम भी कम रहे ।

स्टार्टअप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP) : इसका उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को लगाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमियों को मदद पहुंचाना है ।

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY) :  यह योजना अगस्त 2017 में शुरू की गई थी जिसके तहत दूर दराज के ग्रामीण गांव को जोड़ने के लिए कम कीमत की सुरक्षित और सामुदायिक निगरानी वाली ग्रामीण परिवहन सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDUGKY) : इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को प्लेसमेंट से जुड़े कौशल प्रदान करना है ताकि वे अपनी आय बढ़ा सके तथा अच्छी आय वाले रोजगार हासिल कर सकें।

ग्रामीण स्वरोजगार संस्थान (RSETIs) : iइसके तहत  31 बैंकों और राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में ग्रामीण युवाओं को लाभकारी स्वरोज़गार स्थापित करने हेतु कुशल बनाने के लिये ग्रामीण स्वरोज़गार संस्थानों (RSETIs) को सहायता प्रदान की जा रही है।

आखिर अभियान की जरूरत क्यों पड़ी

यह हम सभी जानते हैं कि भारत की कुल आबादी का 65 फ़ीसदी अभी भी गांव में रहता है और जिसमें महिलाओं की भागीदारी बहुत ज्यादा है।  एक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाएं अपनी बड़ी भूमिका निभाती हैं।  ऐसे में जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूह का हिस्सा बनेंगी तो ये न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी ऊंचाई पर ले जाएगा।

किस तरह मदद करती है यह योजना

यह योजना स्वयं सहायता समूह में महिला उद्यमियों को छोटे व्यवसाय करने के लिए, छोटे ऋण उपलब्ध कराती हैं।  साथ ही उनके लिए उनके गांव या रहने के स्थान के आसपास ही कौशल विकसित करने के लिए उन्हें मदद भी पहुंचाई जाती है जिसमें उनके लिए ट्रेनिंग और अन्य सहायता प्रदान की जाती है । आपको बता दें कि अकेले सिर्फ महाराष्ट्र में ही 527000 स्वयं सहायता समूह है जहां महिलाएं कुशल नेतृत्व कर रही हैं और छोटे पैमाने में औद्योगिक इकाइयों में अपना योगदान दे रही है।  स्वयं सहायता समूह अपने सदस्यों को प्रशिक्षण दे कर  उन्हें तैयार करते हैं ,यहाँ महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प या खेती की तकनीक जैसे कौशल भी सिखाए जाते हैं।  इससे न केवल वह अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं बल्कि उनके आत्मविश्वास और आत्म सम्मान में भी बढ़ोतरी होती है और साथ ही  महिलाओं में एकजुटता की भावना भी बढ़ती हैं और वह अपने समुदाय या घरेलू स्तर पर निर्णय लेने में भी अधिक सक्षम होती हैं।

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