Guru Purnima :
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े,
काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपने,
गोविन्द दियो बताय ।।
गुरु पर्व पर गुरु की महिमा जानने के लिये हम पहले उसके अर्थ को समझे ।” गु “शब्द का अर्थ है अंधकार और “रु”शब्द का है प्रकाश। इस प्रकार से हमें अज्ञान के अंधकार से बाहर निकाल कर ज्ञान का प्रकाश दे वही गुरु है । गुरु अपने शिष्य के उद्धार के लिये ही गुरुता का भार वहन करता है । गुरु का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। गुरु के बिन ज्ञान नही होता वह हमारे जीवन का सच्चा पथप्रदर्शक होता है । मनुष्य के लिये गुरु का महत्व ईश्वर से भी बड़ा है क्यों कि ईश्वर तो केवल हमारा जन्मदाता ही है किंतु गुरु हमें जीवन को जीने की कला सिखाता है संस्कार वान बनाता है । वह अपने शिष्य के सभी दोषों का परिहार करता है।
गुरु सिखाता है जीवन जीने की कला
गुरु पूर्णिमा का अपना महत्व है । आज के दिन ही श्री कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था । उन्होंने ही चारों वेदों का संकलन किया। पुराण उपनिषद की अपने शिष्यों के साथ रचना की और पांचवें वेद के रूप में प्रतिष्ठित महाभारत श्री गणेश जी की सहायता से लिखा जिसके वह स्वयं साक्षी थे। गीता के उपदेश के पश्चात अपनी आत्म संतुष्टि के लिये श्रीमद् भागवत लिखी । वह वशिष्ठ मुनि के पौत्र पाराशर मुनि एवं सत्यवती के पुत्र थे। जिनका जन्म यमुना के तट पर कालपी जिला जालौन (उ.प्र.) में हुआ था ।उनका रंग काला होने एव द्वी में जन्म होने के कारण उनका नाम कृष्ण द्वैपायन पड़ा । उनके जन्म के कुछ समय बाद पाराशर मुनि उन्हें अपने साथ ले गये और उनको सभी प्रकार की शिक्षा प्रदान की ।
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि वेदव्यास जी त्रिकालज्ञ थे । उन्होंने ही एक वेद के चार भाग करते हुये ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद में विभाजित करते हुये अपने शिष्य पैल ,जैमिनी, वैशम्पायन,एवं सुमन्तु मुनि को पढ़ाया।वेद के ज्ञान को अत्यंत गूढ़ एवं शुष्क होने के कारण 18 पुराणों की रचना की और इसे उन्होंने लोमहर्षण जी को पढाया । इस प्रकार वेद व्यास जी के जन्म दिन को समर्पित यह पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के नाम से जानी जाती है । गुरु शिष्य परम्परा में आज Guru Purnima के दिन सभी शिष्य अपने गुरु का पूजन करते हुये उनके प्रति अपना आदर और सम्मान प्रकट करते हैं । जै गुरुदेव।
उषा सक्सेना