King Charles Australia Visit : एक दौर वो भी था जब ब्रिटेन का आधी दुनिया पर राज था और ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ, कॉमनवेल्थ के कई देशों की महारानी थी। पर समय बदला, देशों को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली और इन देशों से ब्रिटिश राजशाही भी जाती रही। लेकिन फिर भी कुछ देश ऐसे थे जिन्होंने स्वतंत्र होने की बाद भी सम्मान के तौर पर ब्रिटिश राजशाही का संवैधानिक अधिकार बरकरार रखा। उनमें से एक है ऑस्ट्रेलिया। जहां स्वतंत्रता की इतने सालों बाद भी आज तक ब्रिटिश राजा को ऑस्ट्रेलिया का भी राजा माना जाता है। हालांकि पिछले कई दशकों से ऑस्ट्रेलिया में एक बहस छिड़ी हुई है, जहां ब्रिटिश राजशाही को ऑस्ट्रेलिया में संवैधानिक प्रमुख (Constitutional Head) का दर्जा बरकरार रखने पर पक्ष और विपक्ष की दलीले सामने आती रहती है।
King Charles Australia Visit किंग चार्ल्स का ऑस्ट्रेलिया दौरा
ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स के गद्दी संभालने के बाद उनका रानी कैमिला (Camilla) के साथ ऑस्ट्रेलिया का पहला दौरा है। लेकिन इस दौरे के दौरान उन्हें कुछ कड़वे अनुभव भी हुए हैं। आपको बता दें कि लगभग 70 साल बाद कोई ब्रिटिश सम्राट आधिकारिक रूप से ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आया है। इससे पहले साल 1954 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय यानी किंग चार्ल्स की मां ने ऑस्ट्रेलिया का ऐतिहासिक दौरा किया था, तब भी उनके सामने ऑस्ट्रेलिया के साथ ब्रिटिश राजशाही के रिश्ते मजबूत बनाने की चुनौती थी। जिसमें वह काफी हद तक खरी उतरी थीं । और उनका दौरा कई मायनो में सफल रहा था।
70 साल बाद ऑस्ट्रेलिया में जारी है ब्रिटिश राजशाही का विरोध
लेकिन 70 साल बाद किंग चार्ल्स के दौरे के वक्त ऑस्ट्रेलिया का ब्रिटिश राजशाही को संवैधानिक प्रमुख मानने का विरोध खुलकर सामने आ रहा है। 75 वर्षीय King Charles का ऑस्ट्रेलिया दौरा (King Charles Australia Visit) काफी मुश्किलों भरा रहा। हालांकि उनके स्वागत में सिडनी के ओपेरा हाउस को रॉयल ओपेरा हाउस (Royal Opera House) के रूप में सजाया गया था। जहां किंग चार्ल्स और रानी केमिला की तस्वीर दिखाई पड़ रही थी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया की संसद में एक कार्यक्रम के दौरान किंग चार्ल्स के खिलाफ नारेबाजी हुई। किंग चार्ल्स का ऑस्ट्रेलिया के संसद में भाषण का कार्यक्रम था लेकिन इस दौरान सीनेटर लीडिया थार्प उनके विरोध में नारे लगाते हुए सामने आई और उन्होंने कहा “आप हमारे राजा नहीं हैं, आप हत्यारे हैं । आपने हमारे लोगों का नरसंहार किया है । ” लीडिया ऑस्ट्रेलिया के पारंपरिक कपड़े पहनकर संसद पहुंची थी और ब्रिटिश राजशाही का विरोध कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाए कि ब्रिटिश साम्राज्य ने ऑस्ट्रेलियाई मूल के लोगों के साथ अत्याचार किया था। उनकी जमीन को बर्बाद कर दिया था। हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने लीडिया को संसद से बाहर कर दिया लेकिन यह दृश्य सोशल मीडिया पर छाए रहे।
Queen Elizabeth ll के निधन के बाद ब्रिटिश राजशाही के संवैधानिक पद को खत्म करने का अभियान हुआ तेज
2022 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद से ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश साम्राज्य से संबंध खत्म करने पर फिर से बहस तेज गई थी। ऑस्ट्रेलिया के स्वतंत्र देश बनने के बाद भी संवैधानिक तौर पर राजशाही बरकरार है,जहां ब्रिटिश राजा या रानी को औपचारिक रूप से देश का संवैधानिक प्रमुख माना जाता है।
वैसे तो ऑस्ट्रेलिया 1901 में ही स्वतंत्र हो गया था, लेकिन वह फिर भी ब्रिटिश डोमिनियन के रूप में अस्तित्व में था और ब्रिटिश राजशाही के पास बहुत से अधिकार थे। लेकिन साल 1986 को ऑस्ट्रेलिया अधिनियम द्वारा ब्रिटिश सरकार के पास ऑस्ट्रेलिया पर मौजूद किसी भी कानूनी या विधायी शक्ति को खत्म कर दिया गया । लेकिन ब्रिटिश राजशाही का ऑस्ट्रेलिया में संवैधानिक प्रमुख के रूप में पद बरकरार रह गया । ऑस्ट्रेलिया अब पूरी तरह से स्वतंत्र देश है, लेकिन यह ब्रिटिश राष्ट्रमंडल राष्ट्रों का हिस्सा बना हुआ है।
राजशाही के समर्थकों और विरोधियों के बीच छिड़ी बहस
ब्रिटेन के राजा बनने के बाद किंग चार्ल्स का ये पहला ऑस्ट्रेलियाई दौरा है । ऑस्ट्रेलिया में राजशाही विरोधी नेता लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश राजशाही का संवैधानिक पद खत्म कर दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि दुनिया के दूसरे छोर पर बैठा कोई राजा या रानी उनके देश का संवैधानिक प्रमुख कैसे बना रह सकता है। ऑस्ट्रेलियन रिपब्लिक मूवमेंट (Australian Republic Movement) भी लंबे समय से मांग उठा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया का निवासी ही इस देश का संवैधानिक प्रमुख होना चाहिए ना कि ब्रिटिश राजशाही।
किंग चार्ल्स के दौरे के दौरान ARM द्वारा “राजशाही को अंतिम गुड बाय” अभियान भी चलाया गया है। उनका मानना है कि राजशाही को अलविदा कहने का वक्त आ गया है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में ऐसे भी लोग मौजूद हैं जो ब्रिटिश राजशाही से संबंध खत्म करने की हिमायती नहीं है। उनका मानना है कि ऑस्ट्रेलिया को राजशाही से अपना रिश्ता बरकरार रखना चाहिए और किंग चार्ल्स का यह दौरा (King Charles Australia Visit ) इन संबंधों को मजबूती देगा। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में विरोध के स्वर ज्यादा मुखर हैं। यहां तक कि स्थानीय नेताओं के बीच में इसका गहरा विरोध साफ दिख रहा है। देश के 6 राज्यों के प्रमुखों ने राजधानी कैनबरा में किंग चार्ल्स के स्वागत में दिए गए रिसेप्शन में आने का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया था।