Tuesday, February 10, 2026
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श्री राज राजेश्वरी कमला देवी : धन लाभ और सौभाग्य प्राप्ति के लिए होती है पूजा

by KhabarDesk
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Gupt Navratri : श्री कमला महाविद्या सृष्टि की केन्द्रीय सर्वोच्च नियामक एवं क्रियात्मक सत्ता मूल शक्ति की प्रकृति स्वरूपी प्रधान सोलह कलाओं में से दशम योगिनी एवं तुरीय विद्या हैं। देवी कमला या कमलात्मिका दस महाविद्याओं में अंतिम विद्या कमल या कमल पुष्प के समान दिव्यता की प्रतीक हैं। आदि शक्ति माता पार्वती के दस रूपों में अंतिम विद्या धनलाभ के लिये ,देवी कमला को तांत्रिक लक्ष्मी के रूप में भी जाना जाता है। इनका संबंध श्रीसौभाग्य ऐश्वर्य सम्पन्नता और समृद्धि और वंश विस्तार से है। श्रीमद्भागवत के आठवें स्कंद के अनुसार भौतिक सुख की इच्छा रखने वालों के लिये इनकी आराधना सर्वश्रेष्ठ है।

पूजा से मिलता है धनलाभ 

माता कमला देवी सती का दसवां रूपांतरण होने से परम चेतना एवं परमानंद का प्रतीक है। वह सुख के अमृृत से स्नान करती हैं तथा ब्रह्म का एकत्व साक्षात्कार हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति साक्षात कुबेर के समान हो जाता है। व्यक्ति का यश सम्मान और कारोबार बढ़ता है। धन से जुड़ी सारी समस्याओं का समाधान इनकी आराधना और पूजन से हो जाता है।

कमल पर स्थित होने के कारण  नाम भी कमला पड़ा

उत्पत्ति की कथा :-एक बार दुर्वासा ऋषि के शाप से सारे देवता श्री हीन हो गये। भगवान विष्णु को त्याग करके लक्ष्मी जी भी विलुप्त हो गईं। तब सभी दैत्य एवं देवताओं ने समुद्र का मंथन किया जिसमें चौदह रत्नों के साथ लक्ष्मी जी अमृत कलश लेकर कमल के ऊपर आसीन होकर उत्पन्न हुईं। कमल पर स्थित होने के कारण उनका नाम भी कमला पड़ा। उनके साथ उनकी बड़ी बहिन अलक्ष्मी निऋति भी उत्पन्न हुई। लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु का वरण किया और निऋति अलक्ष्मी का भगवान विष्णु के आदेश पर उनके भक्त दुसहमुनि पिप्पलाद ने वरण किया। भगवान विष्णु का वरण कर वह लक्ष्मी बनी। लक्ष्मी जी ने शक्ति प्राप्त करने के लिये श्रीविद्या देवी की कठोर आराधना और तप किया। उनके तप से प्रसन्न होकर देवी त्रिपुरसुंदरी ने प्रसन्न होकर उन्हें श्री की उपाधि देते हुये उसकी अधिष्ठात्री देवी बनाया। अब वह श्री सौभाग्य और संपन्नता की देवी थीं।

सत्तात्मक शक्तियों की स्वामिनी होकर वह राजाओं द्वारा पूजित होकर राजराजेश्वरी कहलाईं । आदिकाल से राजघरानों और सभी समृद्ध लोगोंं द्वारा वह सदा ही पूजी जाती हैं और आराधित रहीं हैं। सतोगुणी होने के कारण इन्हें अंधेरा और अज्ञान पसंद नहीं यह सदैव ही प्रकाश मेंं प्रकाशित होती हैं। अंधेरा होने पर इनके सम्मुख दीप जलाकर इन्हें प्रसन्न किया जाता है। समस्त जगत का कल्याण करने वाली माता कमलादेवी श्री लक्ष्मी राजराजेश्वरी को शत शत नमन ।
उषा सक्सेना

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें।

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