Tuesday, January 20, 2026
Home धर्म कर्म Kalki Jayanti : कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।

Kalki Jayanti : कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।

by KhabarDesk
0 comment
Kalki Jayanti

Kalki Jayanti :  श्रावण माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि भगवान विष्णु के 10 वें अवतार भगवान कल्कि को समर्पित है । कल्प कल्पान्तर से सतयुग, त्रेता, द्वापर के बाद कलियुग चार युगों में अंतिम युग । जिसकी अपनी विशिष्टता के साथ महानता भी है । कहते हैं आज के दिन ही भगवान कल्कि का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था । कलियुग हिंदू धर्म और पौराणिक कथाओं में वर्णित चार युगों में से एक, जो वर्तमान समय को दर्शाता है। कलियुग के दौरान, धर्म और नैतिकता का ह्रास होता है, और अधर्म, हिंसा, और अन्याय बढ़ते हैं।

कलियुग की विशेषताएँ:

– *अधर्म और अन्याय*: कलियुग में अधर्म और अन्याय बढ़ते हैं, और धर्म और नैतिकता का ह्रास होता है।
– *हिंसा और संघर्ष*: कलियुग में हिंसा और संघर्ष बढ़ते हैं, और लोगों के बीच मतभेद और द्वेष बढ़ते हैं।
– *नैतिकता का ह्रास*: कलियुग में नैतिकता का ह्रास होता है, और लोगों के मूल्य और आदर्श बदलते हैं।
कलियुग के बारे में तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है कि :-
कलियुग केवल नाम अधारा,
सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।”
अर्थ: कलियुग में केवल भगवान का नाम ही एकमात्र आधार है, और भगवान के नाम का स्मरण करके ही मनुष्य इस संसार से पार हो सकता है। जब कि सतयुग में ज्ञान और कठिन तपस्या के द्वारा , त्रेतायुग में यज्ञ और धर्म द्वापर युग में कर्म और भक्ति के द्वारा व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। किंतु कलियुग में केवल राम के नाम का स्मरण मात्र करने से ही व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है।

इसलिये चारों युगों में सबसे सरल जीवन कलियुग का है । अन्याय, अधर्म अत्याचार और हिंसा के मध्य भी रह कर यदि व्यक्ति केवल ईश्वर के नाम मात्र का ही सुमिरन करे तो जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जायेगा। ‌इसके पीछे का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक तथ्य इन सबके मध्य फंसे व्यक्ति को अपने स्वार्थवश लोभ और मोह ही उसे घेरे रहता है। उसी के चिंतन में उसके जो विचार उत्पन्न होते हैं वही उसके कार्य की दिशा निर्धारित कर देते हैं । इन परिस्थितियों में उसे ईश्वर के नाम का स्मरण भी नहीं रहता ।

भगवान कल्कि का जन्म कलियुग के अंत में पृथ्वी पर बढ़ रहे अधर्म , हिंसा, अन्याय और मानवता पर हो रहे भीषण प्रहार एवं अत्याचार को समाप्त करने करने के लिये होगा । जिसके पश्चात कल्प कल्पान्तर के साथ पुन: नवसृजन सतयुग का प्रारम्भ ।
जै भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की‌ अपने भक्तों की रक्षा करें ।। ऊँ भगवान कल्किने नम:।।
ऊषा सक्सेना

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें।

You may also like

Leave a Comment

About Us

We’re a media company. We promise to tell you what’s new in the parts of modern life that matter. Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo. Sed consequat, leo eget bibendum sodales, augue velit.

@2022 – All Right Reserved. Designed and Developed byu00a0PenciDesign