Mauni Amavasya Upay : हिंदू पंचांग में हर माह पड़ने वाली अमावस्या तिथि अपने आप में महत्वपूर्ण होती है। परंतु माघ माह में पड़ने वाली मौनी अमावस्या स्नान, दान और पितृ तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, और हमारे पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। सनातन धर्म में माघ के महीने का विशेष महत्व होता है। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करने, पूजन एवं दान करने से समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। अगर यह स्नान दान अमावस्या या पूर्णिमा तिथि को किया जाए तो विशेष महत्व रखता है। आईए जानते हैं कि मौनी अमावस्या के दिन किस तरह की चीजों का दान करके हम अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
Mauni Amavasya Upay
मौनी अमावस्या का महत्व:
माघ माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह अमावस्या तिथि स्नान दान के लिए विशेष महत्व रखती है। मौनी अमावस्या के दिन करोड़ो की संख्या में श्रद्धालु धर्म नगरी प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाने आते हैं। यह मकर संक्रांति के बाद दूसरा और महत्वपूर्ण अमृत स्नान होता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। इसके पश्चात नदी का पूजन करने का भी विधान है। ऐसी मान्यता है कि पवित्र नदियों में स्नान करने से हमें समस्त पापों से छुटकारा मिलता है। स्नान के बाद तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को शांति मिलती है। साथ ही हमारे पितरों की कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है।
महाकुंभ में मौनी अमावस्या का स्नान
ये महाकुंभ 2025 का दूसरा अमृत स्नान है। इस दिन सिद्ध योग और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग भी बन रहा है। शुभ नक्षत्र के कारण स्नान और दान का महत्व कहीं अधिक बढ़ जाता है। हमें किस चीज का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए या किस चीज का हमें दान करना है, आईए जानते हैं कि विशेष तिथि में किन विशेष चीजों का दान करने से हमें अक्षय फलों की प्राप्ति होगी। यह सभी कार्य मौन व्रत धारण करके किए जाते हैं इसिलिए इसे मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है ।
अमावस्या तिथी का प्रारंभ:
हिंदू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या की तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को होगी। जिसका समापन 29 जनवरी को होगा। उदय तिथि के अनुसार देखा जाए तो मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी। मौनी अमावस्या का प्रारंभ 28 जनवरी की संध्या काल के समय 7:35 पर होगा और अमावस्या तिथि का समापन 29 जनवरी की सायंकाल 6:05 पर होगा।
पितृ दोष की मुक्ति के लिए किए जाने वाले उपाय:
Mauni Amavasya Upay
यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो रहा है। तो इस दिन प्रात स्नान करने के पश्चात विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। किसी योग्य पंडित अथवा ब्राह्मण की सहायता से पितृ दोष का हवन एवं पूजन करना चाहिए एवं पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान भी करना चाहिए। इस दिन पितृ सूक्त का पाठ करने से भी पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। अमावस्या तिथि पर महादेव का पूजन करने से भी समस्त पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करने से राहु या शनि के कारण निर्मित पितृ दोष शांत होता है।
अमावस्या तिथि के दिन किस तरह से पूजन एवं दान करना चाहिए। :
1) अमावस्या तिथि के दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर उसमे अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए।
2)अमावस्या तिथि पर तिल का दान विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। आप तिल का दान भी कर सकते हैं और तिल से बनी वस्तुओं का भी दान कर सकते हैं। तिल के लड्डू का भी दान कर सकते हैं।
3) इस दिन आप गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भी दान कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है की गुड़ का दान करने से समस्त पितृ दोष से मुक्ति मिलती हैऔर हमारी कुंडली मे मंगल और सूर्य की स्थिति मजबूत होती हैं ।
4) अमावस्या के दिन आपको वस्त्रो का दान भी करना चाहिए। इस दिन आप किसी जरूरतमंद को कंबल का दान भी कर सकते हैं।
5) मौनी अमावस्या तिथि के दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उत्तर पूर्व दिशा में गाय के घी से बना दीपक जलाना चाहिए। Mauni Amavasya Upay उस दीपक में लाल रंग के कलावे की बाती बनाकर लगानी चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हो घर में बरकत आती है।