Wednesday, April 8, 2026
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हरतालिका तीज : जानें शुभ समय और व्रत में ध्यान देने योग्य बातें

हरतालिका शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है हरत और आलिका

by Jai P Swarn
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Hartalika teej 2024

Hartalika teej 2024 : हरतालिका तीज का त्यौहार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथी को मनाया जाता हैं । विवाहित महिलायें इस व्रत को पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिये रखती हैं । कुछ जगह कुवांरी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिये भी इस व्रत को रखती हैं । हिंदू पंचांग के इस बार हरतालिका तीज का व्रत 6 सितंबर 2024 को है।

हरतालिका का अर्थ:

हरतालिक तीज का व्रत महिलायें सुखी दांपत्य और पति की लंबी आयु के लिये रखती हैं । हरतालिका शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है हरत और आलिका ।  जंहा हरत शब्द का अर्थ हरण और आलिका का अर्थ है सखी।तीज का मतलब तृतीय तिथी होता हैं ।

व्रत करने की कथा:

इस व्रत को करने के पीछे एक कहानी है । माता पार्वती के पिता ने पार्वती जी का विवाह भगवान विष्णु से करने की बात कही थी। लेकिन माता पार्वती महादेव को मन ही मन मे अपना वर मान चुकी थी। इसके लिये माता पार्वती की सखियों ने माता का हरण कर के जंगल मे छिपा दिया था। जंगल मे गंगा नदी के किनारे कठोर तप करके माता पार्वती ने महादेव को वर के रूप में प्राप्त किया।   इसी कथा के आधार पर हरतालिका तीज का त्यौहार मनाया जानें लगा।

व्रत करने की शुभ तिथी:

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से शुरू हो रही है, जो 6 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का त्यौहार 6 सितंबर 2024, शुक्रवार को मनाया जायेगा।

पूजा करने का शुभ समय:

पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 2 मिनट से सुबह के 8 बजकर 33 मिनट तक है । कई जगहों पर प्रदोष काल मे पूजा करने का विधान है । इस दिन सूर्यास्त 6 बजकर 36 मिनट पर हो रहा है ।

व्रत करने मे ध्यान देने योग्य बातें:

Hartalika teej व्रत को करने में ध्यान  देने वाली बातें ये है कि यह व्रत निर्जला होता हैं । इस व्रत को करते समय गलती से भी क्रोध नही करना चाहिए । व्रत का संकल्प लेने के बाद व्रत पूरी निष्ठा के साथ रखना चाहिए । व्रती महिलाओं को रात्रि मे सोना नही चहिये और रात भर जाग कर माता पार्वती और भगवान शिव का पूजन करना चाहिए । इस दिन महिलाओं को काले रंग के कपड़े और काले रंग की चूड़ियाँ पहनने से बचना चहिये। महिलाओं को अपने पति से झगड़ा नही करना चाहिये । अपने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए । इस दिन तामसिक वस्तुओ का सेवन नही करना चाहिए । इस दिन पति को अपनी पत्नी को वस्त्र और आभूषण आदि उपहार मे देना चाहिये। इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन मे खुशहाली और मधुरता आती है ।

बबीता आर्या

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