Diabetes Reversal by Stem Cell : विज्ञान के आविष्कार और खोज ने मानव जाति के कल्याण के लिए कई अनोखे यंत्र, तकनीक और स्वास्थ्य संबंधी जटिल रोगों से निजात दिलाने के लिए नायाब उपहार दिए हैं। विज्ञान और तकनीकी की ही देन है कि आज की दुनिया आपस में इतनी करीब आ गई है और जिंदगी जीने की तरीकों में भी काफी तब्दीली हुई है। हाल के दिनों में हुई नई खोज और रिसर्च ने मनुष्य को कई रोगों से बचाने और मुक्ति दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। पिछले तीन-चार दशकों से जीवन शैली में बदलाव के कारण मनुष्य घातक रोगों की चपेट में आया है। इसमें से एक रोग जो डायबिटीज के नाम से कुख्यात है! इसने आम लोगों को परेशान कर रखा है। आंकड़ों की बात करें तो WHO के मुताबिक भारत में 18 वर्ष से अधिक आयु के 77 मिलियन यानी 7 करोड़ से भी ज्यादा लोग मधुमेह (टाइप 2) से पीड़ित हैं, और लगभग 25 मिलियन यानी ढाई करोड़ प्रीडायबिटिक (निकट भविष्य में मधुमेह विकसित होने का अधिक खतरा) हैं। 50% से अधिक लोग अपनी मधुमेह की स्थिति से अनभिज्ञ हैं, जिसके कारण यदि समय पर पता न लगाया जाए और उपचार न किया जाए तो स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं।
अब इस दिशा में विज्ञान ने एक नई उम्मीद जगाई है। मधुमेह टाइप 1 ऐसा रोग है जो मनुष्य के शरीर में ऑटोइम्यून डिजीज यानी स्वप्रतिरोधी रोग के रूप में मनुष्य के पैंक्रियाज में इंसुलिन निर्माण करने वाली कोशिकाओं (Cells) को खत्म कर देता है। एक नई खोज में पाया गया है कि रीप्रोग्राम्ड स्टेम सेल (Reprogrammed Stem Cells ) के प्रतिरोपण ( Transplantation) से 3 महीने की भीतर शरीर ने इंसुलिन निर्माण फिर से शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया का परीक्षण कुछ समय पहले चीन में मधुमेह से पीड़ित एक 25 वर्षीय महिला पर किया गया और इसे सफल पाया गया।
क्या है स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन (Diabetes Reversal by Stem Cell)
स्टेम सेल प्लांटेशन में स्टेम सेल का प्रयोग किसी उत्तक ( Tissue) को ग्रो कराने में किया जाता है, जिसे शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। जिससे उस खास रोग की चिकित्सा संभव हो सके। इस विधि में स्टेम सेल को प्रयोगशाला में अनिश्चितकाल के लिए संवर्धित यानी कल्चरड किया जा सकता है। शोधकर्ताओं को ये उम्मीद है कि इस खोज की खास विधि से इलाज होने पर रोगी को स्वमारक (Immuno suppressant) देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह रिसर्च चीन के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है, जिसका प्रकाशन सेल (Cell) नामक जनरल में पिछले सप्ताह प्रकाशित हुआ है। हालांकि, इस तरह के कई शोध पिछले कुछ समय से प्रकाश में आए हैं।
उपचार की विधि
इस विधि से उपचार के लिए वैज्ञानिकों ने तीन मनुष्यों के शरीर से सेल कोशिकाओं को निकाल कर उसे Pluripotent state में ले जाया गया यानी कोशिकाओं को blank state में ले जाया गया। जिसमें कोई पूर्व निर्धारित प्रोग्राम नहीं रखा गया। ऐसा करने के पीछे का मकसद था कि इन कोशिकाओं को किसी भी खास कोशिका के रूप में परिवर्तित किया जा सके। शोधकर्ताओं ने रसायन युक्त यानी केमिकली इंड्यूस्ड Pluripotent स्टेम (iPS) सेल्स का प्रयोग कर 3D islets (पैंक्रियाज की कोशिकाएं इंसुलिन बनाने के कारक होते हैं) के समूह के निर्माण को आगे बढ़ाया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने महिला के पेट की मांसपेशियों में 1.5 मिलियन (लगभग 15 लाख) islets इंजेक्ट किया गया। इस प्रक्रिया के ढाई महीने बाद महिला के शरीर में पर्याप्त इंसुलिन का निर्माण होने लगा, जिससे इंसुलिन की अतिरिक्त डोज लेने की जरूरत नहीं पड़ी और इस अवस्था में एक साल से भी ज्यादा समय तक इंसुलिन निर्माण होता रहा ।
भ्रूण स्टेम (Pluripotent Cells) क्या होता है?
यह अति विशिष्ट कोशिकाएं होती हैं जिनमें लंबे समय तक खुद को नवीनीकृत करने और शरीर के सभी प्रकार की कोशिकाओं को जन्म देने की क्षमता होती है।
रिसर्च के नतीजे से उत्साहित हैं शोधकर्ता
रिसर्च के नतीजों को शोधकर्ता काफी साकारात्मक मान रहे हैं। मधुमेह के विरुद्ध दुनिया भर में इस तरह के इस तरह के रिसर्च और अध्ययन जारी हैं। लेकिन मीडिया सूत्रों के हवाले से फ्लोरिडा की मियामी यूनिवर्सिटी के एंडॉक्रिनलॉजिस्ट (Endocrinologist) Jay Skyler के अनुसार अभी इसका परीक्षण ज्यादा लोगों पर किया जाना अपेक्षित है। Skyler का विचार है कि वह देखना चाहते हैं कि जिस महिला पर यह परीक्षण किया गया है उसे स्वस्थ बताने के लिए महिला के शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का निर्माण अगले 5 वर्षों तक कर पाती है या नही।
आने वाले समय में मधुमेह की रोकथाम के लिए WHO ने खास योजनाओं का प्रारूप तैयार किया है और उसके सकारात्मक नतीजे पाने के लिए ये शोध Diabetes Reversal by Stem Cell और अध्ययन विशेष योगदान दे सकते हैं।
Disclaimer: इस आलेख में वर्णित तथ्य मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर है।