Gupt Navratri 2025 : गुप्त नवरात्रि के चतुर्थ दिवस पर मां भुवनेश्वरी की पूजा होती है। दस महाविद्याओं में चतुर्थ आदिशक्ति और मूल रूप प्रकति, जिनकी आराधना करके स्वयं शिव एवं विष्णु भी शक्ति प्राप्त कर अपने कार्य को सफलता पूर्वक करते हैं।
शाकाम्भरी देवी व शताक्षी देवी के नाम से भी है जिनकी महिमा
संपूर्ण भुवन के ऐश्वर्य की स्वामिनी देवी भुवनेश्वरी का ही एक रूप शाकाम्भरी देवी एवं शताक्षी का है। एक बार जब पृथ्वी पर बहुत समय तक वर्षा न होने से भयंकर अकाल पड़ा और सृष्टि का विनाश अनावृष्टि के कारण होने लगा तब ऋषि मुनियों ने हिमाचल की शिवालिक पर्वत श्रृंखला पर देवी को प्रसन्न करने के लिये कठिन तप किय। उनके तप से प्रसन्न होकर देवी ने साक्षात प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिये और सभी की भूख मिटाने के लिये शाक फल आदि की वर्षा की इसीलिये ऋषि मुनियों ने उन्हें माँ शाकाम्भरी देवी के नाम से पुकारा। इसके बाद देवी ने शताक्षी रूप धारण करते हुये शिवालिक की पहाड़ी पर खड़े होकर अनवरत अविरल नौदिन अश्रु वर्षा करके धरती की प्यास बुझाई और उसे वैभव प्रदान किया ।
पुत्र प्राप्ति के लिए की जाती है आराधना
माता भुवनेश्वरी अर्थात् संपूर्ण ऐश्वर्य की स्वामिनी संसार के भौतिक पदार्थ सुख-साधन के वैभव को देने वाली माता भुवनेश्वरी ही तो हैं जिसमें भुवन भर का चेतनात्मक आनंद भरा हो उसे हम भुवनेश्वरी ही तो कहेंगे। इस महाविद्या कीआराधना से व्यक्ति सूर्य के समान तेजस्वी हो जाता है। पुत्रप्राप्ति के लिये भी इनकी ही आराधना की जाती है। जै माता भुवनेश्वरी अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करें ।
जै माता भुवनेश्वरी नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमो नम:।
ऊषा सक्सेना
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता को ठेस पहुँचाना नहीं है। पाठक कृपया अपनी विवेकपूर्ण समझ और परामर्श से कार्य करें।