Clean air in Delhi Air Pollution : गर्मियों के खत्म होते ही मौसम करवट लेने लगता है। धूप का कहर कम होने लगता है और फिजा में सुकून का एहसास होने लगता है। लेकिन दिवाली के आते ही दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम किसी अभिशाप से कम नहीं होता। गिरते तापमान और बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली की हवा जहरीली बनने लगती है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ और बच्चों का स्कूल जाना तक मुश्किल हो जाता है। आए दिन दिल्ली की जहरीली हवा की खबरें मीडिया में छाई रहती हैं। सरकार और प्रशासन इसे लेकर पसोपेश में बने रहते हैं, लेकिन इससे निजात के लिए दिल्ली के लोगों को सिर्फ समय बीतने का इंतजार रहता है। सुकून भरी सांसों के इंतजार के बंधन को तोड़ने के लिए दिल्ली के एक दंपति ने अद्भुत मिसाल पेश की है।
दिल्ली में एक ऐसी भी जगह है जहां भीषण प्रदूषण के वक्त भी एक्यूआई 13 या 14 ही रहता है। आपको ये जान कर यकीन नहीं आ रहा होगा। लेकिन यह बात पूरी तरह सच है। यह कमाल कर दिखाया है साउथ दिल्ली में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति ने। प्रदूषण से भरे शहर के बीचो बीच- उनके घर का AQI हमेशा हेल्दी ही रहता है। कैसे ? आइए आपको बताते हैं। यह दंपति हैं नीनो कौर और पीटर सिंह। इनकी उम्र 70 और 80 साल है, लेकिन इनका एनर्जी लेवल 35 या 40 की उम्र के युवाओं से कम नहीं है। जब इस साल दिल्ली में नवंबर के महीने में AQI 500 पहुंच गया था और सांस लेना दूभर हो गया था, तब भी उनके घर का AQI मात्र 15 और 20 ही था। इनके घर में कोई एयर प्यूरीफायर यंत्र नहीं है, फिर भी यहां की हवा बेहद शुद्ध है।
कैसे बनाया क्लीन एयर वाला घर !
पीटर सिंह ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया कि उनकी पत्नी को ब्लड कैंसर हो गया था, जिससे उनके फेफड़े भी प्रभावित हो गए थे। डॉक्टर ने उन्हें दिल्ली से बाहर रहने की सलाह दी और वह सलाह मान कर गोवा शिफ्ट हो गए। पर बीच-बीच में उन्हें काम के लिए दिल्ली आना ही पड़ता था और यह उनका अपना घर था। इस घर से उनकी यादें जुड़ी थी। फिर कुछ समय बाद उन्होंने सोचा कि क्यों ना अपने घर में कुछ ऐसा किया जाए जिससे फिर गोवा जाने की जरूरत ही ना पड़े। इसके लिए उन्होंने कुछ रिसर्च की, जानकारी एकत्र की फिर अपने 800 यार्ड के घर को बदलना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने घर में बहुत से पेड़ पौधे लगाए। आपको बता दें उनके घर में 1500 से भी ज्यादा पेड़ पौधे हैं। घर में घुसते ही अहाते में कई पेड़ पौधे लगे हुए हैं और घर के अंदर जाने वाली दीवार के बाहर एक कूलर पैनल बनाया गया है। यह कूलर पैनल 6 फीट लंबा और 8 फीट चौड़ा है। इस पर लकड़ी की छाजन से एक दीवार नुमा जाली तैयार की गई है, जैसे कि आप कूलर में देखते हैं और या कई बार पुराने घरों में खस की जाली बनाई जाती थी। वैसी ही यह एक दीवार है। इस पर हमेशा पानी बहता रहता है, घर के अंदर यानी कूलर पैनल की दूसरी तरफ ऊपर को एक एग्जॉस्ट फैन लगा है जो 24 घंटे चलता रहता है। और साफ हवा भीतर भेजता है। बाहर भले ही एक्यूआई 400 हो पर घर के अंदर का AQI 5 या 6 ही रहता है।
भीषण प्रदूषण में भी घर में रहता है 10 AQI
पैनल के माध्यम से यह साफ हवा पूरे घर में आती है। घर के अंदर आपको ऐसा एहसास होता है मानो पहाड़ों की हवा आ रही हो।
Aquaponics farming तकनीक से घर पर ही उगाते हैं फल और सब्जियां
सिर्फ साफ हवा ही नहीं, यह अपने खाने-पीने के लिए फल और सब्जियां भी घर पर ही उगाते हैं। वह टमाटर से लेकर अंगूर तक अपने घर पर उपजा लेते हैं। इसके लिए उन्होंने बागवानी का अनोखा तरीका तैयार किया है जिसे एक्वेपोनिक्स (Aquaponics) कहा जाता है। इसके लिए उन्होंने 4 फिश टैंक तैयार किए हैं, जहां से पानी निकल कर गार्डन में मिट्टी को नमी देता है और फिर साफ होकर टैंक में वापस पहुंच जाता है। वह केवल खुद की उगाई फल और सब्जियां खाते हैं। और ज्यादा उपज होने पर उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से खरीदारों को सप्लाई भी कर देते हैं। इस समय उनके बगीचे में सरसों, पालक, मेथी, टमाटर, लेट्यूस, सैलरी इत्यादि लगी हुई है। वह मौसम के हिसाब से अपनी उपज तैयार करते हैं। अपने घर में वह किसी तरह के प्रोसैस्ड फूड का इस्तेमाल नहीं करते। घर पर ही तैयार की गई सब्जियों और फलों को खाकर 70 और 80 की उम्र में भी वह पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने अपने घर में एक जापानी गार्डन भी तैयार किया है। जहां मेडिटेशन भी किया जा सकता है। इसके साथ ही दो पूल है जहां वे लगभग 170 किलो मछली का उत्पादन भी कर लेते हैं। जिसमें रोहू, कतला और मिरगल जैसी ताजा पानी की मछलियां हैं । यहां उन्होंने सिंचाई की ऐसी व्यवस्था की है कि पानी, पौधों के नीचे जमीन में प्रवाहित होता रहता है और बचा हुआ पानी वे फिर से रीसाइकल कर लेते हैं।
खुद को कहते हैं अर्बन फार्मर्स (Urban Farmer)
शहर में रहकर यह अपनी जरूरत की सब चीजें अपने ही घर में उपजा रहे ये दंपति खुद को अर्बन फार्मर्स कहलाना पसंद करते हैं। उनके घर में 1500 से भी ज्यादा पेड़ पौधे हैं। घर पर फल सब्जियां उगाते हैं और मछली का भी उत्पादन करते हैं। उन्होंने खुद ही इस घर को डिजाइन किया है और साथ ही ऐसे ग्रीन हाउस तैयार किए हैं जहां वह प्लांट्स लगाते हैं। बाहर की अशुद्ध हवा यहां प्रवेश तक नहीं कर पाती, क्योंकि उन्होंने खास ग्रीनहाउस तैयार किए हैं। वे इसी घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी कर रहे हैं ताकि बरसात के पानी का पूरा उपयोग कर सकें। उनके पास 10,000 लीटर के दो अंडरग्राउंड टैंक हैं। जहां बरसात के पानी को स्टोर किया जाता है और अतिरिक्त पानी जमीन के भीतर चला जाता है, जिससे यहां का ग्राउंड वाटर लेवल भी बढ़ गया है।
घर में नहीं है कोई एयर कंडीशनर !
घर में भरपूर पौधे होने की वजह से गर्मियों में जब बाहर 45 डिग्री तापमान होता है तब भी उनके घर के भीतर 25 डिग्री तापमान बना रहता है। उनके इस प्राकृतिक घर में कोई एयर कंडीशनर नहीं लगाया गया है। वह एक्वेपोनिक्स विधि से सिंचाई करते हैं। जिसमें उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती साथ ही पौधों में ज्यादा वीडिंग की जरूरत नहीं होती और पौधों को अलग से पानी भी नहीं देना पड़ता, क्योंकि फिश टैंक के जरिए पानी जमीन से रिसता हुआ पौधों के नीचे से बहता रहता है। फिश टैंक से पानी दूसरे टैंक में जाता है जहां अमोनिया जो मछलियों के लिए नुकसानदायक होता है, वहां बैक्टीरिया की मदद से नाइट्रेट में बदल जाता है जो पौधों के लिए पोषण देता है। पौधों की जड़े पानी को साफ करती हैं और साफ पानी फिर फिश टैंक में चला जाता है।
अपने घर के वेस्ट से बनाते हैं कंपोस्ट
वह अपने घर की हर चीज का सदुपयोग करते हैं। इसके लिए वह अपने खाने पीने के वेस्ट से घर में ही कंपोस्ट खाद भी तैयार कर लेते हैं। उन्होंने अपने घर में ही एक सस्टेनेबल अर्थव्यवस्था तैयार की है। यानी कि वह साफ वातावरण में रहते हैं, फल सब्जियां उगाते हैं और उन्हें बेचकर पैसा भी कमा रहे हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर भी एक बगीचा तैयार किया है। घर की छत पर सोलर पैनल भी लगाए हुए हैं जिससे उन्हें बिजली भी मिल जाती है।
दूसरों के लिए भी बने सस्टेनेबल लिविंग (Sustainable Living) का पर्याय
वे यह काम सिर्फ अपने लिए नहीं कर रहे, वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग शहर में रहते हुए हेल्दी जीवन जी पाए, इसलिए लोगों की मदद के लिए वह ऑनलाइन कोर्सेज भी उपलब्ध कराते हैं। जहां वे अपने अनुभव और जानकारी साझा करते हैं। जिससे सबको इसका फायदा मिल सके। उनका कहना है कि इस सब को मेंटेन करने में कोई खास खर्च भी नहीं आता केवल एक बार कुछ चीजें इंस्टॉल करने में जो खर्च आता है वही है। बाकी वे दो सहायकों की मदद से अपने गार्डन की पूरी देखभाल कर लेते हैं।